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केजरीवाल आवास विवाद: भाजपा ने तस्वीरें जारी कीं, AAP ने बताया फर्जी
नेशनल न्यूज
केजरीवाल आवास को लेकर सियासत तेज, भाजपा ने लगाए आलीशान जीवन के आरोप, AAP ने तस्वीरों को बताया भ्रामक
नई दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी आवास को लेकर शनिवार को राजनीतिक विवाद गहरा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 95 लोधी एस्टेट स्थित आवास की कुछ तस्वीरें जारी करते हुए उन पर आलीशान जीवनशैली अपनाने का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को फर्जी और भ्रामक बताया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केजरीवाल हाल ही में इस नए आवास में शिफ्ट हुए हैं। आरोपों और सफाई के बीच यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।
भाजपा की ओर से दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तस्वीरें सार्वजनिक कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता सादगी की राजनीति की बात करते रहे, वे अब एक भव्य और महंगे सरकारी आवास में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, इस आवास को अत्याधुनिक सुविधाओं और महंगे इंटीरियर से सजाया गया है, जो आम जनता की अपेक्षाओं के विपरीत है।
आरोप और जवाब
AAP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेता आतिशी ने कहा कि जो तस्वीरें सामने लाई गई हैं, उनका केजरीवाल के वास्तविक आवास से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पारदर्शिता की बात है तो सभी पक्ष अपने-अपने आवास जनता के लिए खोलें, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
यह विवाद केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री आवास को लेकर खर्च और सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बहस हो चुकी है। भाजपा लंबे समय से केजरीवाल के पिछले सरकारी आवास को “शीशमहल” कहकर आलोचना करती रही है।
अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के रूप में केंद्र सरकार द्वारा 95 लोधी एस्टेट में आवास आवंटित किया गया था। यह टाइप-VII श्रेणी का सरकारी बंगला है, जो उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में गिना जाता है। इसमें कई कमरे, लॉन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में उनके पूर्व मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर निर्धारित अनुमान से अधिक खर्च का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान आवास आवंटन प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और इसमें कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक बयानबाजी के चलते यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यदि विवाद बढ़ता है तो जांच या तथ्यात्मक सत्यापन की मांग उठ सकती है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से और खुलासे या जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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केजरीवाल आवास विवाद: भाजपा ने तस्वीरें जारी कीं, AAP ने बताया फर्जी
नेशनल न्यूज
नई दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नए सरकारी आवास को लेकर शनिवार को राजनीतिक विवाद गहरा गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 95 लोधी एस्टेट स्थित आवास की कुछ तस्वीरें जारी करते हुए उन पर आलीशान जीवनशैली अपनाने का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को फर्जी और भ्रामक बताया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केजरीवाल हाल ही में इस नए आवास में शिफ्ट हुए हैं। आरोपों और सफाई के बीच यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।
भाजपा की ओर से दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तस्वीरें सार्वजनिक कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता सादगी की राजनीति की बात करते रहे, वे अब एक भव्य और महंगे सरकारी आवास में रह रहे हैं। उनके मुताबिक, इस आवास को अत्याधुनिक सुविधाओं और महंगे इंटीरियर से सजाया गया है, जो आम जनता की अपेक्षाओं के विपरीत है।
आरोप और जवाब
AAP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेता आतिशी ने कहा कि जो तस्वीरें सामने लाई गई हैं, उनका केजरीवाल के वास्तविक आवास से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पारदर्शिता की बात है तो सभी पक्ष अपने-अपने आवास जनता के लिए खोलें, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
यह विवाद केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री आवास को लेकर खर्च और सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बहस हो चुकी है। भाजपा लंबे समय से केजरीवाल के पिछले सरकारी आवास को “शीशमहल” कहकर आलोचना करती रही है।
अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के रूप में केंद्र सरकार द्वारा 95 लोधी एस्टेट में आवास आवंटित किया गया था। यह टाइप-VII श्रेणी का सरकारी बंगला है, जो उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में गिना जाता है। इसमें कई कमरे, लॉन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में उनके पूर्व मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण पर निर्धारित अनुमान से अधिक खर्च का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर भाजपा लगातार सवाल उठाती रही है।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान आवास आवंटन प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और इसमें कोई अनियमितता सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक बयानबाजी के चलते यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यदि विवाद बढ़ता है तो जांच या तथ्यात्मक सत्यापन की मांग उठ सकती है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से और खुलासे या जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
