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Nepal Flood: मौत के सैलाब से बचकर घर लौटा 36 सदस्यीय मलयाली दल, बोले- भगवान ने हम सबको बचा लिया
भारत
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बीच रास्ते बंद हुए तो समूह ने बदला रूट, रात में जंगल से गुजरना पड़ा; 31 सदस्य नेदुंबस्सेरी पहुंचे, कासरगोड के पांच लोग बेंगलुरु के रास्ते घर लौटे
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बीच जान बचाकर निकला 36 सदस्यीय मलयाली समूह रविवार को केरल लौट आया। समूह के 31 सदस्य करीब 2:30 बजे तड़के नेदुंबस्सेरी एयरपोर्ट पहुंचे, जबकि कासरगोड के पांच सदस्य बेंगलुरु पहुंचे और वहां से ट्रेन के जरिए घर रवाना हुए। यात्रियों के लिए यह वापसी सामान्य यात्रा नहीं थी। नेपाल में जिस इलाके से वे गुजर रहे थे, वहां अचानक रास्ते बंद हो गए और कुछ ही दूरी पर बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। यात्रियों के मुताबिक, जिस जगह वे थे, उससे करीब 500 मीटर दूर आपदा का असर दिखाई दे रहा था।
मंदिर में रुकना बना जिंदगी बचाने वाला फैसला
समूह की सदस्य राजिनी के मुताबिक, वे आगे के सफर के लिए निकलने वाले थे, लेकिन उससे पहले मंदिर जाने के लिए कुछ देर रुक गए। इसी दौरान आगे का रास्ता बंद हो गया और बाद में उन्हें पता चला कि उनके रास्ते से थोड़ी दूरी पर बड़ी तबाही हुई है। राजिनी ने इसे उनके लिए निर्णायक समय बताते हुए कहा कि मंदिर में रुकना शायद उन्हें उस समय उस इलाके से दूर रखने में मददगार रहा। उन्होंने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया।
देखते ही देखते बदल गया छुट्टी का सफर
यह समूह ओणम के दौरान नेपाल की यात्रा पर गया था। यात्रियों के अनुसार शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि हालात इतने तेजी से बिगड़ जाएंगे। प्रदीप कुमार ने बताया कि पहले वाहन रुक गए और आसपास के स्थानीय लोग भी भागते दिखाई दिए। जब समूह ने आगे जाकर स्थिति देखी तो पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि पेड़ और इमारतें तक उसकी चपेट में आ गई थीं। उन्होंने इस दृश्य की तुलना सुनामी जैसी स्थिति से की।
बस में घंटों रुके, फिर अंधेरे में जंगल का रास्ता
बाढ़ और रास्ते बंद होने के बाद समूह को कई घंटे बस में रहना पड़ा। रास्ता बदलने की कोशिश के दौरान भूस्खलन ने उनकी मुश्किल और बढ़ा दी। अंधेरा होने के बाद यात्रियों को जंगल के रास्ते से आगे बढ़ना पड़ा। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भी उन्हें परेशानी हुई। बाद में ट्रैवल एजेंसी की मदद से समूह को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया और रात में ठहरने की व्यवस्था की गई। विनया कुमार ने बताया कि शुरुआत में खाने की व्यवस्था करना मुश्किल रहा, लेकिन बाद में एजेंसी के लोगों ने समूह को सुरक्षित जगह पहुंचाने में मदद की। उनके अनुसार रात करीब 3 बजे तक ठहरने की व्यवस्था हो गई थी।
100 किलोमीटर का सफर कर भारत पहुंचे
नेपाल से बाहर निकलने के लिए समूह ने करीब 100 किलोमीटर का रास्ता तय किया। इसके बाद उन्होंने भारत में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर एयरपोर्ट तक पहुंचे। वहां से समूह के सदस्यों ने अलग-अलग उड़ानों से घर की यात्रा की। कासरगोड के पांच सदस्यों ने बेंगलुरु तक उड़ान भरी और फिर ट्रेन से केरल के लिए रवाना हुए। कासरगोड से लौटने वाले पांच लोगों में पेरिया पॉलिटेक्निक के शिक्षक राजन, शिक्षक अनिल नीलांबरी, पूर्व एसआई प्रदीप कुमार, पूर्व केएसईबी अधिकारी करुणाकरन और मुजक्कोय के राजीवन शामिल हैं।
‘ओणम के बीच ऐसी आपदा की उम्मीद नहीं थी’
समूह की सदस्य रंजीथा ने कहा कि त्योहार के दौरान ऐसी भयावह घटना की किसी ने कल्पना नहीं की थी। उन्होंने बताया कि आपदा के दृश्य अब भी उनकी आंखों के सामने हैं और सुरक्षित लौटने को लेकर उन्होंने भगवान का आभार जताया।
नेपाल में फिर भोटे कोशी नदी को लेकर अलर्ट
मलयाली यात्रियों की वापसी के बीच नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए एक और चेतावनी जारी की गई है। National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) ने भोटे कोशी नदी के बहाव और आवाज में अचानक बढ़ोतरी की सूचना के बाद नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों और राहत टीमों को सतर्क रहने को कहा है। इस अलर्ट में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के नदी किनारे के इलाकों को विशेष रूप से सावधान रहने को कहा गया है। रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के आसपास के समुदायों से जलस्तर पर नजर रखने की अपील की गई है, जबकि नुवाकोट और धादिंग में स्थानीय प्रशासन और आपात सेवाओं को सतर्क रखा गया है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी हैं। इस बीच अलग-अलग देशों के नागरिकों के फंसे होने और लापता होने की खबरों के बीच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी चल रहे हैं।
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