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नेपाल-चीन बाढ़: राक्षस का पात्र 633 पार, करीब 3,000 लापता; चौथा दिन भी रेस्तराँ ऑपरेशन जारी
अंतराष्ट्रीय न्यूज
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही मचाई है। नेपाल में 626 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शनिवार को भी बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान जारी है। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक देश में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 7 मौतों की पुष्टि हुई है। दोनों देशों के आंकड़ों को मिलाने पर मृतकों की संख्या कम से कम 633 हो गई है। करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने के बाद शुरू हुई। बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का भारी प्रवाह हिमालयी नदी तंत्र में पहुंचा और इसके बाद नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में बाढ़ और मलबे ने भारी तबाही मचाई।
खराब मौसम से हेलिकॉप्टर रेस्क्यू प्रभावित
नेपाल में शनिवार को खराब मौसम ने हवाई राहत और बचाव अभियान को प्रभावित किया। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत के अनुसार, मौसम में सुधार होने तक हेलिकॉप्टर संचालन रोकना पड़ा। कई इलाकों में भारी मात्रा में जमा मलबे और हेलिकॉप्टर उतारने के लिए सीमित जगह होने से बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। रेस्क्यू टीमों ने कुछ लोगों तक पहुंचने के लिए रस्सियों और टोकरियों का इस्तेमाल किया है। नेपाल में अब तक 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश
नेपाल के रासुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों का अनुमान है कि 100 से अधिक लोग मलबे से भरी सुरंग में फंसे हो सकते हैं। सुरंग में करीब 4 से 5 फीट यानी 1.2 से 1.5 मीटर तक कीचड़ जमा होने की वजह से बचाव दलों को अंदर पहुंचने में कठिनाई हो रही है। कुछ लोगों तक रस्सियों और अन्य उपकरणों की मदद से पहुंच बनाई गई है।
चीन के ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पर भी रेस्क्यू
चीन के तिब्बत क्षेत्र में नेपाल से लगे ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग को भी भारी नुकसान पहुंचा है। चीनी बचाव दल नष्ट हो चुके रास्तों के बीच पैदल, नाव और ड्रोन की मदद से प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचे। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, यहां हालात इतने खराब हैं कि कई जगह सड़क और संपर्क मार्ग पूरी तरह बह चुके हैं। बचावकर्मी मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचों के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं। चीन की ओर से 7 मौतों और 554 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
फिर बाढ़ का खतरा क्यों बना हुआ है?
पहली बाढ़ के बाद हिमालय में एक नई झील बन गई थी। इसके पानी के बढ़ने और बहाव को लेकर प्रशासन को दोबारा बाढ़ आने की आशंका थी। इसी वजह से शुक्रवार को कुछ समय के लिए नेपाल और चीन दोनों तरफ बचाव अभियान रोकना पड़ा था। खतरा कम होने के बाद अभियान फिर शुरू किया गया। हालांकि विशेषज्ञ अब भी ग्लेशियल झीलों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के निगरानी आंकड़ों के अनुसार एक झील का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से करीब 10 मीटर नीचे आ चुका है, जिससे तत्काल खतरा कुछ कम हुआ है।
हजारों लोग लापता, बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी
नेपाल में शनिवार को 2,426 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 554 लोग लापता बताए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे विदेशी नागरिक हैं जो काम, ट्रेकिंग या धार्मिक यात्रा के लिए इस क्षेत्र में पहुंचे थे। रॉयटर्स के मुताबिक, लापता विदेशी नागरिकों में कई भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं। नेपाल ने सामान्य खोज एवं बचाव के लिए विदेशी टीमों की मांग नहीं की है, लेकिन सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, सड़क और संचार व्यवस्था बहाल करने, शवों की पहचान, डीएनए जांच और शवों के सुरक्षित भंडारण जैसे विशेष तकनीकी सहयोग की जरूरत बताई है।
भारत से भी राहत और तकनीकी मदद
आपदा के बाद भारत समेत कई देशों ने नेपाल के लिए सहायता की पेशकश की है। रॉयटर्स के अनुसार भारत राहत सामग्री भेज चुका है और विशेष बचाव तथा चिकित्सा टीमों को भेजने की तैयारी में है। भारत के लिए यह आपदा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रभावित क्षेत्र में कई भारतीय नागरिक और तीर्थयात्री मौजूद थे। उनके परिजन लगातार नेपाल में अधिकारियों और राहत केंद्रों से संपर्क कर अपने रिश्तेदारों की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल को पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की जरूरत
बाढ़ से सड़क, पुल, बस्तियों और बिजली परियोजनाओं समेत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के मुताबिक शुरुआती अनुमान में देश को पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। यह अनुमान देश की अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। रेड क्रॉस के अनुसार आपदा से 90,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और सड़कों को दोबारा खोलने का काम भी चल रहा है।
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