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नेपाल की बाढ़ में चाय का कुछ मिनट का ब्रेक बना जीवनरक्षक, रायपुर लौटे 5 दोस्तों ने सुनाई खौफनाक रात की कहानी
रायपुर (छ.ग.)
भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बढ़े पानी के बीच फंसे पांचों दोस्तों ने ऊंचाई वाले इलाके में शरण ली, एक रात कार में बिताई, लौटने पर रेलवे स्टेशन पर मिट्टी माथे से लगाकर जताया आभार
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बीच फंसे रायपुर के पांच दोस्त शनिवार को सुरक्षित अपने घर लौट आए। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने के बाद पांचों ने जमीन पर माथा टेका और मिट्टी को सिर से लगाया। उनके लिए यह सिर्फ घर वापसी नहीं थी, बल्कि उस सफर से बाहर निकलना था जिसमें कुछ घंटों के भीतर हालात जानलेवा हो गए थे। माना कैंप निवासी दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। यात्रा के दौरान उन्हें भोटे कोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ का सामना करना पड़ा।
दोस्तों के मुताबिक, जिस समय वे रास्ते में थे, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में हालात इतने खराब हो जाएंगे। रास्ते में उन्होंने चाय पीने के लिए कुछ समय रुकने का फैसला किया। उनका कहना है कि यही छोटा-सा ठहराव बाद में उनकी सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित हुआ। चाय पीने के बाद जब वे आगे बढ़े तो बाढ़ का असर तेजी से दिखाई देने लगा। पानी का बहाव बढ़ चुका था और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल था। दोस्तों ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने पानी के तेज बहाव में मकानों को बहते देखा।
हालात बिगड़ने पर पांचों ने आगे बढ़ने के बजाय ऊंचाई वाले इलाके में शरण लेने का फैसला किया। करीब दो दिन तक उन्हें सुरक्षित जगह पर रहना पड़ा। इस दौरान सामान्य आवाजाही और यात्रा पूरी तरह प्रभावित रही।
एक रात दोस्तों ने अपनी कार के भीतर बिताई। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रात गुजारना उनके लिए बेहद तनावपूर्ण था। आसपास पानी का असर और लगातार बदलती परिस्थितियों के बीच वे सुरक्षित स्थान से बाहर निकलने का इंतजार करते रहे। दोस्तों ने बताया कि उस दौरान उन्हें कई बार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता हुई। जिस रास्ते से वे कुछ समय पहले गुजर रहे थे, वही इलाका बाद में तेज बहाव और बाढ़ की चपेट में आ गया। इसी वजह से रास्ते में लिया गया चाय का ब्रेक उनके लिए यादगार बन गया।
दो दिन तक ऊंचाई वाले इलाके में रुकने के बाद जब परिस्थितियां संभलीं, तो पांचों ने नेपाल से वापस लौटने की तैयारी की। घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान देखे हालात परिवार और परिचितों को बताए। रायपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद पांचों ने जमीन को प्रणाम किया। उन्होंने बाबा पशुपतिनाथ और बाबा भंडारी का जयकारा लगाया और अपने अनुभव को बेहद भावुक करने वाला बताया।
उनका कहना है कि नेपाल की यात्रा धार्मिक उद्देश्य से शुरू हुई थी, लेकिन बाढ़ के बीच फंसने के बाद सफर का पूरा स्वरूप बदल गया। रास्ते में कुछ मिनट के लिए लिया गया ब्रेक, ऊंचाई वाले इलाके में शरण और कार में बिताई रात अब उनकी यात्रा की सबसे अहम घटनाओं में शामिल हैं। पांचों दोस्तों के सुरक्षित लौटने की जानकारी मिलने के बाद उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली। यात्रा के दौरान सामने आए बाढ़ के हालात ने उन्हें सामान्य पर्यटन यात्रा और आपदा के बीच बदलते हालात का प्रत्यक्ष अनुभव कराया।
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