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नेपाल में बाढ़ के बाद '31 टन का सबसे बड़ा शालिग्राम' मिलने का दावा वायरल, जानें तस्वीर की पूरी सच्चाई
अंतराष्ट्रीय न्यूज
सोशल मीडिया पोस्ट में इसे मुक्तिनाथ धाम के पास बाढ़ के बाद मिला प्राकृतिक शालिग्राम बताया जा रहा है, जांच में सामने आया कि वायरल तस्वीर जोमसोम की पहले से बनी 22 फीट ऊंची शालिग्राम प्रतिकृति की है
नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ के बीच सोशल मीडिया पर एक विशाल काले पत्थर की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि मुक्तिनाथ धाम के पास 31 टन वजनी दुनिया का सबसे बड़ा शालिग्राम पत्थर बाढ़ के बाद मिला है। तस्वीर पर इसे 'Stone Older Than Dinosaurs' भी बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध तथ्यों की जांच करने पर यह दावा सही नहीं पाया गया। वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही संरचना नेपाल के मुस्तांग जिले के जोमसोम में मौजूद करीब 22 फीट यानी 6.7 मीटर ऊंची शालिग्राम शिला की प्रतिकृति है। इसे हाल की बाढ़ के बाद खोजी गई प्राकृतिक शिला के रूप में पेश करना भ्रामक है।
कहां की है वायरल तस्वीर?
वायरल तस्वीर वास्तव में घरपझोंग ग्रामीण नगरपालिका-4, जोमसोम में कालिगंडकी नदी के किनारे बनाई गई विशाल शालिग्राम शिला की है। नेपाल की रिपोर्टों के मुताबिक इसे नेपाल एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स से जुड़े मूर्तिकारों ने एक बड़े प्राकृतिक पत्थर को तराशकर तैयार किया है। इस परियोजना के तहत 20 अप्रैल से 4 मई 2026 तक 15 दिनों की मूर्तिकला कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें 36 से अधिक मूर्तिकारों ने हिस्सा लिया और कालिगंडकी नदी के किनारे मौजूद बड़े पत्थरों से धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विषयों पर करीब 18 कलाकृतियां तैयार कीं। इनमें शालिग्राम शिला के अलावा भगवान शिव, पार्वती, विष्णु, बुद्ध और हिमालयी वन्यजीवों से जुड़ी आकृतियां भी शामिल थीं। बाद में विशाल शालिग्राम प्रतिकृति धार्मिक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई।
क्या 31 टन का शालिग्राम नेपाल में है?
31 टन वाले शालिग्राम की कहानी पूरी तरह काल्पनिक नहीं है, लेकिन इसे मौजूदा वायरल तस्वीर और मुक्तिनाथ के पास नई खोज से जोड़ना गलत है। फरवरी 2023 में नेपाल से 31 टन और 15 टन वजन वाले दो शालिग्राम पत्थर अयोध्या पहुंचे थे। ये पत्थर नेपाल के कालीगंडकी क्षेत्र से लाए गए थे और करीब 1,000 किलोमीटर की यात्रा के बाद अयोध्या पहुंचे थे। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे 31 टन वाले दावे में संभव है कि पुरानी शालिग्राम संबंधी जानकारी को वर्तमान नेपाल बाढ़ और जोमसोम की विशाल प्रतिकृति की तस्वीर के साथ मिला दिया गया हो। उपलब्ध रिपोर्टों में 26 अगस्त 2026 की बाढ़ के बाद मुक्तिनाथ के पास 31 टन का प्राकृतिक शालिग्राम मिलने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
नेपाल में प्राकृतिक शालिग्राम कहां मिलते हैं?
शालिग्राम पत्थरों का नेपाल से गहरा धार्मिक और भौगोलिक संबंध है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार कालीगंडकी नदी के किनारे कागबेनी से दक्षिण की ओर रिडी तक शालिग्राम पाए जाते हैं। मुक्तिनाथ के उत्तर में स्थित दामोदर कुंड कालीगंडकी नदी के स्रोत क्षेत्र से जुड़ा है और यहां भी शालिग्राम मिलने की परंपरा है। हिंदू, खासकर वैष्णव परंपरा में शालिग्राम को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक महत्व के कारण इन पत्थरों से जुड़े स्थानों पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही रहती है।
क्या शालिग्राम 'डायनासोर से भी पुराना' है?
वायरल पोस्ट में शालिग्राम को 'डायनासोर से भी पुराना' बताया गया है। यह दावा भी बिना संदर्भ के सही नहीं माना जा सकता। भूवैज्ञानिक दृष्टि से शालिग्राम आम तौर पर अम्मोनाइट के जीवाश्म से जुड़े होते हैं। अम्मोनाइट समुद्री जीव थे, जिनके जीवाश्म कालीगंडकी क्षेत्र में पाए जाते हैं। कुछ शालिग्राम जीवाश्म जुरासिक काल से जुड़े हैं, जो करोड़ों वर्ष पुराने हैं। लेकिन 'डायनासोर से पुराना' कहना बहुत सामान्य दावा है, क्योंकि डायनासोर भी करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी पर मौजूद रहे और उनका समयकाल शालिग्राम से जुड़े अलग-अलग जीवाश्मों के काल से ओवरलैप करता है। इसलिए सिर्फ इस आधार पर वायरल पत्थर को 'डायनासोर से पुराना' बताना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
नेपाल में पहले भी सामने आया है विशाल प्राकृतिक शालिग्राम
नेपाल में विशाल प्राकृतिक शालिग्राम होने की जानकारी जरूर मिलती है। सेतिबेनी में कालीगंडकी और सेती नदियों के संगम के पास स्थित एक बड़े शालिग्राम को दुनिया का सबसे बड़ा शालिग्राम बताया जाता रहा है। जुलाई 2026 में लगातार बारिश के कारण कालीगंडकी नदी का जलस्तर बढ़ा और यह शिला बाढ़ के पानी में डूब गई थी। यानी नेपाल में बड़े शालिग्राम का धार्मिक और स्थानीय महत्व वास्तविक है, लेकिन वायरल तस्वीर को हाल की बाढ़ के बाद मुक्तिनाथ के पास मिले 31 टन के प्राकृतिक शालिग्राम के रूप में पेश करना सही नहीं है।
वायरल तस्वीर का निष्कर्ष क्या है?
उपलब्ध जानकारी के आधार पर वायरल तस्वीर में दिख रही विशाल संरचना जोमसोम में बनाई गई करीब 22 फीट ऊंची शालिग्राम प्रतिकृति है। यह प्राकृतिक रूप से हाल में सामने आई 31 टन की शिला नहीं है। 31 टन वाले शालिग्राम की एक अलग और पुरानी घटना 2023 में नेपाल से अयोध्या पहुंचे पत्थर से जुड़ी है।
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