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पीयूष गोयल ने भारतीय युवाओं की उद्यमशीलता को सराहा, जापान के साथ वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर
भारत
जापान दौरे में वित्तीय संस्थानों और कारोबारियों से बातचीत; भारत में निवेश, स्टार्टअप साझेदारी और हाईटेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-जापान आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए जापान में कई अहम बैठकों में हिस्सा लिया। उन्होंने जापानी निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के सामने भारत में मौजूद कारोबारी संभावनाओं को रखा और दोनों देशों के बीच बैंकिंग, वित्त, निवेश तथा नई तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान की यात्रा पर हैं। उनके साथ भारत का बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, हेल्थकेयर, वित्तीय सेवाओं और स्टार्टअप सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं।
जापान की बड़ी वित्तीय कंपनियों से मुलाकात
टोक्यो में गोयल ने जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बातचीत में भारत में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने, संस्थागत पूंजी आकर्षित करने और दोनों देशों के वित्तीय क्षेत्र के बीच सहयोग मजबूत करने पर विचार हुआ। बैठक में MUFG, Mizuho, Development Bank of Japan, Nomura, Morgan Stanley और Nippon Life जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे। गोयल ने भारत की आर्थिक क्षमता और निवेश के लिए उभर रहे नए क्षेत्रों की जानकारी भी साझा की।
सेमीकंडक्टर और AI में निवेश पर जोर
भारत की ओर से जापानी कंपनियों को सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर ध्यान देने का आग्रह किया गया। सरकार इन क्षेत्रों को भविष्य की औद्योगिक जरूरतों और रोजगार सृजन के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। जापानी कंपनियों के लिए भारत को उत्पादन के साथ-साथ रिसर्च और वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य
भारत और जापान के आर्थिक रिश्तों में जापानी निवेश को बढ़ाना एक प्रमुख लक्ष्य है। अगले दशक में जापान से भारत में निजी निवेश को 10 ट्रिलियन येन तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया है। गोयल ने जापानी वित्तीय संस्थानों को भारत के GIFT City में मौजूद अवसरों से भी अवगत कराया। इसे अंतरराष्ट्रीय निवेश और सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
युवा उद्यमियों की क्षमता पर गोयल का जोर
गोयल ने भारत के युवा उद्यमियों और स्टार्टअप इकोसिस्टम की क्षमता को भी जापानी कारोबारियों के सामने रखा। उन्होंने दोनों देशों के युवा उद्यमियों के बीच सीधे संपर्क और निवेश के अवसर बढ़ाने की जरूरत बताई। इसी दिशा में ‘Shark Tank’ की तर्ज पर स्टार्टअप पिचिंग कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। ऐसे मंचों के जरिए भारतीय और जापानी स्टार्टअप अपने बिजनेस आइडिया निवेशकों और संभावित साझेदारों के सामने रख सकेंगे।
जापानी कंपनियों से भारत में उत्पादन बढ़ाने की अपील
वाणिज्य मंत्री ने जापानी कंपनियों से भारत में स्थानीय उत्पादन और वैल्यू एडिशन बढ़ाने का आग्रह किया। इसके अलावा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर तथा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और तकनीकी क्षेत्रों में जापानी कंपनियों की विशेषज्ञता को भारत के बड़े बाजार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
भारत को निवेश और निर्यात के केंद्र के तौर पर पेश किया
गोयल ने जापानी निवेशकों के सामने भारत को केवल बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और निर्यात के संभावित केंद्र के रूप में भी प्रस्तुत किया। भारत की आर्थिक वृद्धि, बड़ा घरेलू बाजार, कुशल युवा कार्यबल और विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक समझौतों को निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार के तौर पर रखा गया। यात्रा के दौरान भारत-जापान आर्थिक संबंधों को हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप, वित्त और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
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