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India-US Trade Talks: अमेरिका के 15% टैरिफ के बाद व्यापार वार्ता स्थगित, दोनों देशों ने लिया बड़ा फैसला
Digital Desk
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता स्थगित। ट्रंप के 15% टैरिफ से बदली समीकरण, दोनों देश कर रहे स्थिति का आकलन। पढ़ें पूरी खबर।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता को फिलहाल टाल दिया गया है। दोनों देश वाशिंगटन डीसी में होने वाली इस बैठक को स्थगित करने पर सहमत हुए हैं, ताकि अमेरिका द्वारा हाल ही में लगाए गए 15 प्रतिशत टैरिफ के वैश्विक प्रभावों का आकलन किया जा सके। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सूत्रों ने रविवार को दी।
क्यों टली अहम बैठक?
भारतीय मुख्य वार्ताकार दर्पेन जैन के नेतृत्व में 23 फरवरी से शुरू होने वाली तीन दिवसीय बैठक टाल दी गई है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों ने महसूस किया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और नई टैरिफ घोषणाओं के बाद और समय लेकर स्थिति का गहन विश्लेषण करना आवश्यक है। बैठक की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और ट्रंप का पलटवार
यह विलंब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद आया है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार को सीमित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन 1977 के कानून (IEEPA) का इस्तेमाल कर व्यापक आयात कर लगाने में बहुत आगे बढ़ गया था।
इस फैसले के जवाब में, राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत एक कार्यकारी आदेश जारी कर सभी देशों से आने वाले सामानों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह नया टैरिफ 1974 के व्यापार अधिनियम के तहत लगाया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15% कर दिया गया।
भारत पर 15% टैरिफ का सीधा असर
व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि भारत को भी यह नया 15% टैरिफ देना होगा। यह टैरिफ अगली सूचना तक जारी रहेगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापारिक साझेदारों से मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करने की उम्मीद करता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने कहा, "अब भारत बिना कोई रियायत दिए 15% टैरिफ पर अमेरिका को निर्यात कर सकता है, जो पहले 18% की दर के लिए कई रियायतें देने को तैयार था।"
सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "यह भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई अतिरिक्त शर्तें न जुड़ें।"
सेक्टर-वार संभावित प्रभाव
1. टेक्सटाइल सेक्टर: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा टेक्सटाइल बाजार है। 15% टैरिफ से इस सेक्टर को सीधा लाभ होगा, क्योंकि पहले यह दर अधिक थी।
2. ज्वेलरी सेक्टर: कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह ने इसे बड़ी राहत बताते हुए कहा कि इससे मांग और आपूर्ति का अंतर कम होगा।
3. लेदर सेक्टर: चेन्नई के निर्यातक ईश्वर अहमद ने कहा, "अब हम दूसरे देशों के साथ समान स्तर पर हैं। बस हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत पर सेक्शन 301 या 232 के तहत अतिरिक्त टैरिफ न लगे।"
भारत सरकार का रुख
भारत सरकार ने कहा है कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और नए टैरिफ उपायों के निहितार्थों का गहन अध्ययन कर रही है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह इन घटनाक्रमों का विश्लेषण कर संभावित प्रभाव को समझ रहा है।
क्या है पृष्ठभूमि?
भारत और अमेरिका ने फरवरी की शुरुआत में एक प्रारंभिक व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार की थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच अधिक व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना था। मौजूदा अनिश्चितता के बावजूद, दोनों देश भविष्य में एक व्यापक व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत के पास बेहतर सौदेबाजी की स्थिति है। पहले जहां भारत को टैरिफ में छूट पाने के लिए रियायतें देनी पड़तीं, वहीं अब वह बिना किसी समझौते के भी 15% टैरिफ पर निर्यात कर सकता है। हालांकि, यह टैरिफ अस्थायी है और 150 दिनों के बाद समाप्त हो सकता है, जब तक कि कांग्रेस इसे बढ़ाने का फैसला न करे।
दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता की अगली तारीख का फिलहाल इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इतना तय है कि अब भारत मजबूत स्थिति में वार्ता की मेज पर लौटेगा।

