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सुप्रीम कोर्ट को चुनौती: ट्रंप ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर किया 15%
Digital Desk
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वैश्विक टैरिफ को 15% तक बढ़ा दिया है। जानें सेक्शन 122 और भारत-अमेरिका व्यापार पर इसके प्रभाव की पूरी जानकारी।
अमेरिकी व्यापार युद्ध में एक बड़ा मोड़ लेते हुए, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से मिली कानूनी हार के मात्र 24 घंटे के भीतर ग्लोबल टैरिफ (वैश्विक आयात शुल्क) को 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस फैसले की जानकारी दी, जो 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।
यह कदम शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस 6-3 के फैसले के बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए पुराने टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया था। अदालत का मानना था कि राष्ट्रपति के पास 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत इतने व्यापक टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है।
क्या है ट्रंप का नया 'प्लान-बी'?
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद, ट्रंप प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 (Section 122) का सहारा लिया है।
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सेक्शन 122 का अधिकार: यह कानून राष्ट्रपति को व्यापार घाटे या आर्थिक खतरों की स्थिति में अधिकतम 150 दिनों के लिए 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
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समय सीमा: यदि 150 दिनों के बाद भी इन शुल्कों को जारी रखना है, तो इसके लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी अनिवार्य होगी।
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छूट: कुछ चुनिंदा श्रेणियों जैसे आवश्यक खनिज, दवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को इस शुल्क से बाहर रखा जा सकता है।
"कोर्ट का फैसला शर्मनाक" — ट्रंप का तीखा हमला
शुक्रवार रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने जजों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने फैसले को "अमेरिका विरोधी" और "बेहद खराब" बताया। ट्रंप का तर्क है कि पिछले राष्ट्रपतियों की निष्क्रियता ने अन्य देशों को अमेरिका को "लूटने" की छूट दी है।
हालांकि, भारत के संदर्भ में ट्रंप का रुख सकारात्मक रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत के साथ हुई हालिया ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं होगा।
प्रमुख घटनाक्रम और व्यापारिक प्रभाव
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| नई दर | 10% से बढ़कर अब 15% |
| प्रभावी तिथि | 24 फरवरी 2026 |
| कानूनी आधार | ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 |
| कोर्ट का आदेश | IEEPA के तहत पुराने टैरिफ को रद्द किया गया |
$200 बिलियन के रिफंड पर सस्पेंस
एक बड़ा सवाल उन $200 बिलियन का है जो ट्रंप प्रशासन पिछले एक साल में टैरिफ के रूप में वसूल चुका है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को अवैध करार दिए जाने के बाद, कंपनियां अब रिफंड की मांग कर रही हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सरकार कोई पैसा वापस नहीं करेगी और यह मामला अगले कई वर्षों तक अदालतों में खिंच सकता है।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। जहां एक तरफ यह अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ इससे आयातित सामानों की कीमतें बढ़ने का खतरा है। 150 दिनों की यह समय सीमा अब वैश्विक बाजारों के लिए एक नई 'डेडलाइन' बन गई है।

