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श्रीलंका दौरे पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, तमिल समुदाय से संवाद और शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात
नेशनल डेस्क
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रीलंका दौरे पर, तमिल समुदाय और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात। भारत-श्रीलंका संबंधों को मिलेगा नया बल।
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन रविवार (19 अप्रैल) को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका रवाना हुए। पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला द्विपक्षीय दौरा है, जिसे भारत-श्रीलंका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे और भारतीय मूल के तमिल समुदाय के साथ सीधे संवाद स्थापित करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति का यह दौरा व्यापक कार्यक्रमों से भरा है, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और विकासात्मक पहलुओं पर फोकस रहेगा। यात्रा के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिणी अमरासुरिया और विपक्ष के नेताओं से मुलाकात तय है।
तमिल समुदाय पर फोकस
उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम भारतीय मूल के तमिल समुदाय के साथ जुड़ाव को प्राथमिकता देता है। नुवारा एलिया क्षेत्र में बड़ी संख्या में बसे इस समुदाय से सीधे संवाद के जरिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, राधाकृष्णन भारतीय मूल के तमिलों के सामाजिक-आर्थिक हालात का जायजा लेंगे और भारत समर्थित आवास परियोजनाओं का निरीक्षण भी करेंगे।
यात्रा के दौरान वह उन आवासीय बस्तियों का दौरा करेंगे, जो भारत सरकार की मदद से विकसित की गई हैं। इन परियोजनाओं के तहत अब तक करीब 4,000 घर बनाए जा चुके हैं, जबकि 10,000 अतिरिक्त घरों का निर्माण जारी है।
धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
कार्यक्रम में नुवारा एलिया स्थित सीता मंदिर के दौरे की भी संभावना जताई गई है। यह स्थल भारत और श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा के अनुसार, यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने का भी प्रयास करेगा।
पृष्ठभूमि के तौर पर देखें तो भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत ने श्रीलंका को आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लगातार सहायता प्रदान की है, जिससे द्विपक्षीय विश्वास और सहयोग में वृद्धि हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा ‘विजन महासागर’ पहल के तहत क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
इस दौरे का स्वागत करते हुए लंका इंडिया बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष मेनन ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के इतिहास में एक अहम क्षण बताया। वहीं, इंडियन सीईओ फोरम के अध्यक्ष किशोर रेड्डी ने कहा कि इस यात्रा से व्यापार और आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि उपराष्ट्रपति की यह यात्रा राजनीतिक संवाद के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सामाजिक जुड़ाव को भी बढ़ाएगी। खासतौर पर तमिल समुदाय के साथ सीधा संपर्क भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को और प्रभावी बना सकता है।
आने वाले समय में इस दौरे के परिणाम दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग में नए अवसर खोल सकते हैं। भारत-श्रीलंका संबंधों की दिशा तय करने में यह यात्रा एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।
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श्रीलंका दौरे पर उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, तमिल समुदाय से संवाद और शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात
नेशनल डेस्क
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन रविवार (19 अप्रैल) को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका रवाना हुए। पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला द्विपक्षीय दौरा है, जिसे भारत-श्रीलंका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे और भारतीय मूल के तमिल समुदाय के साथ सीधे संवाद स्थापित करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी देते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति का यह दौरा व्यापक कार्यक्रमों से भरा है, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और विकासात्मक पहलुओं पर फोकस रहेगा। यात्रा के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिणी अमरासुरिया और विपक्ष के नेताओं से मुलाकात तय है।
तमिल समुदाय पर फोकस
उपराष्ट्रपति का कार्यक्रम भारतीय मूल के तमिल समुदाय के साथ जुड़ाव को प्राथमिकता देता है। नुवारा एलिया क्षेत्र में बड़ी संख्या में बसे इस समुदाय से सीधे संवाद के जरिए उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, राधाकृष्णन भारतीय मूल के तमिलों के सामाजिक-आर्थिक हालात का जायजा लेंगे और भारत समर्थित आवास परियोजनाओं का निरीक्षण भी करेंगे।
यात्रा के दौरान वह उन आवासीय बस्तियों का दौरा करेंगे, जो भारत सरकार की मदद से विकसित की गई हैं। इन परियोजनाओं के तहत अब तक करीब 4,000 घर बनाए जा चुके हैं, जबकि 10,000 अतिरिक्त घरों का निर्माण जारी है।
धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
कार्यक्रम में नुवारा एलिया स्थित सीता मंदिर के दौरे की भी संभावना जताई गई है। यह स्थल भारत और श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा के अनुसार, यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने का भी प्रयास करेगा।
पृष्ठभूमि के तौर पर देखें तो भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत ने श्रीलंका को आर्थिक संकट और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लगातार सहायता प्रदान की है, जिससे द्विपक्षीय विश्वास और सहयोग में वृद्धि हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, यह यात्रा ‘विजन महासागर’ पहल के तहत क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
इस दौरे का स्वागत करते हुए लंका इंडिया बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष मेनन ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के इतिहास में एक अहम क्षण बताया। वहीं, इंडियन सीईओ फोरम के अध्यक्ष किशोर रेड्डी ने कहा कि इस यात्रा से व्यापार और आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि उपराष्ट्रपति की यह यात्रा राजनीतिक संवाद के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सामाजिक जुड़ाव को भी बढ़ाएगी। खासतौर पर तमिल समुदाय के साथ सीधा संपर्क भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को और प्रभावी बना सकता है।
आने वाले समय में इस दौरे के परिणाम दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग में नए अवसर खोल सकते हैं। भारत-श्रीलंका संबंधों की दिशा तय करने में यह यात्रा एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।
