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8वें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग: ₹69,000 बेसिक सैलरी का प्रस्ताव
बिजनेस न्यूज
डबल इंक्रीमेंट, DA मर्जर और पेंशन सुधार सहित कई बदलावों की सिफारिश
केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग के समक्ष वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों में व्यापक सुधार की मांग रखी है। कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹69,000 करने, फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू करने और सालाना इंक्रीमेंट को दोगुना करने का प्रस्ताव दिया है। यह मांगें ऐसे समय में सामने आई हैं जब महंगाई और जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रीय परिषद–संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की ओर से 14 अप्रैल को आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान वेतन संरचना कर्मचारियों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हुई थी। अब इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग की गई है, जिससे वेतन में बड़ा उछाल आ सकता है।
ज्ञापन में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जैसे ही DA 25% तक पहुंचे, उसे बेसिक वेतन में शामिल कर लिया जाए, ताकि कुल वेतन संरचना अधिक स्थिर और लाभकारी हो सके। यह व्यवस्था पहले के वेतन आयोगों में लागू रही है।
सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि प्रमोशन और करियर ग्रोथ को लेकर भी बदलाव सुझाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा पे-मैट्रिक्स जटिल है और इसमें कई स्तर ऐसे हैं जो प्रमोशन में देरी का कारण बनते हैं। इसे सरल बनाने और पदों के बीच के गैप को कम करने की सिफारिश की गई है।
परिवार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। ज्ञापन में पितृत्व अवकाश को बेहतर बनाने, परिवार की परिभाषा में पांच सदस्यों को शामिल करने और सरोगेसी या गोद लेने की स्थिति में विशेष अवकाश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, पुराने पेंशनभोगियों को नए वेतनमान का पूरा लाभ देने की भी वकालत की गई है।
इन प्रस्तावों का प्रभाव व्यापक हो सकता है। अनुमान है कि करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी, यानी कुल 1.15 करोड़ लोग इससे प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो सरकारी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, लेकिन इससे उपभोग बढ़ने और अर्थव्यवस्था को गति मिलने की भी संभावना है।
फिलहाल, सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले समय में आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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8वें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी मांग: ₹69,000 बेसिक सैलरी का प्रस्ताव
बिजनेस न्यूज
केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग के समक्ष वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों में व्यापक सुधार की मांग रखी है। कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर ₹69,000 करने, फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू करने और सालाना इंक्रीमेंट को दोगुना करने का प्रस्ताव दिया है। यह मांगें ऐसे समय में सामने आई हैं जब महंगाई और जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है।
राष्ट्रीय परिषद–संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की ओर से 14 अप्रैल को आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान वेतन संरचना कर्मचारियों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हुई थी। अब इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग की गई है, जिससे वेतन में बड़ा उछाल आ सकता है।
ज्ञापन में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जैसे ही DA 25% तक पहुंचे, उसे बेसिक वेतन में शामिल कर लिया जाए, ताकि कुल वेतन संरचना अधिक स्थिर और लाभकारी हो सके। यह व्यवस्था पहले के वेतन आयोगों में लागू रही है।
सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि प्रमोशन और करियर ग्रोथ को लेकर भी बदलाव सुझाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा पे-मैट्रिक्स जटिल है और इसमें कई स्तर ऐसे हैं जो प्रमोशन में देरी का कारण बनते हैं। इसे सरल बनाने और पदों के बीच के गैप को कम करने की सिफारिश की गई है।
परिवार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। ज्ञापन में पितृत्व अवकाश को बेहतर बनाने, परिवार की परिभाषा में पांच सदस्यों को शामिल करने और सरोगेसी या गोद लेने की स्थिति में विशेष अवकाश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, पुराने पेंशनभोगियों को नए वेतनमान का पूरा लाभ देने की भी वकालत की गई है।
इन प्रस्तावों का प्रभाव व्यापक हो सकता है। अनुमान है कि करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी, यानी कुल 1.15 करोड़ लोग इससे प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है, तो सरकारी खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, लेकिन इससे उपभोग बढ़ने और अर्थव्यवस्था को गति मिलने की भी संभावना है।
फिलहाल, सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले समय में आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
