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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बदला गया फिल्म का नाम
बालीवुड न्यूज़
नीरज पांडेय बोले—‘घूसखोर पंडत’ अब अतीत, नया टाइटल कहानी के अनुरूप होगा
अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म से जुड़ा विवादित शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ आधिकारिक रूप से हटा दिया गया है। फिल्ममेकर नीरज पांडेय ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के जरिए यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का पुराना नाम अब कहीं भी उपयोग में नहीं लाया जाएगा और नया टाइटल अभी तय नहीं किया गया है।
हलफनामे में कहा गया है कि फिल्म का नया नाम उसकी कहानी और उद्देश्य को सही ढंग से दर्शाएगा। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि नया शीर्षक पुराने नाम से न तो मिलता-जुलता होगा और न ही किसी तरह की गलत व्याख्या की गुंजाइश छोड़ेगा। निर्माता की ओर से यह भी बताया गया कि विवादित नाम से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री—पोस्टर, टीज़र और ट्रेलर—पहले ही हटा दी गई है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिया था आदेश
12 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिल्ममेकर और ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix को फिल्म का नाम बदलने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता अतुल मिश्रा ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि शीर्षक एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
टीज़र रिलीज के बाद शुरू हुआ था विवाद
फिल्म का ऐलान 3 फरवरी 2026 को टीज़र के साथ किया गया था। टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों में विरोध शुरू हो गया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हुए और मामला अदालत तक पहुंच गया। टीज़र में मनोज बाजपेयी को सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में दिखाया गया था, जिन्हें ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है और जो एक विवादित पुलिस अधिकारी के रूप में पेश किए गए हैं।
ब्राह्मण समाज ने जताई आपत्ति
विभिन्न शहरों में ब्राह्मण समाज के संगठनों ने फिल्म के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। उनका कहना था कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। इसे रचनात्मक स्वतंत्रता के बजाय सामाजिक संवेदनशीलता की अनदेखी बताया गया।
विवाद बढ़ने पर हटाया गया प्रमोशनल कंटेंट
विरोध के बाद नेटफ्लिक्स इंडिया ने फिल्म से जुड़ा टीज़र और अन्य प्रचार सामग्री अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दी। नीरज पांडेय ने भी स्पष्ट किया कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और किसी जाति, धर्म या समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने भरोसा दिलाया कि फिल्म की मंशा केवल कहानी कहने और मनोरंजन तक सीमित है।
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