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‘इंडिया न्यू वर्ल्ड ऑर्डर में आगे बढ़ रहा है’, रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने बताया अगले 20 साल किसके
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नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में भारत धीरे-धीरे नए विश्व क्रम (New World Order) में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह बात ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की। उन्होंने अगले 20 सालों में आर्थिक और निवेश अवसरों का विश्लेषण करते हुए कहा कि पैसा हमेशा पहले चलता है, और नरेटिव बाद में बनता है।
कियोसाकी ने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था इसलिए तेजी से आगे बढ़ रही है क्योंकि इसका ढांचा चीन की तरह निर्यात पर आधारित नहीं है। भारत का लगभग 70% GDP घरेलू खपत पर निर्भर है, जिससे यह बाहरी झटकों के प्रति अधिक स्थिर रहता है। वहीं, चीन की अर्थव्यवस्था ऐतिहासिक रूप से निर्यात और निवेश पर निर्भर रही है, जिससे वैश्विक मांग में गिरावट के समय यह अस्थिर हो जाता है।
उन्होंने सप्लाई चेन पर बदलाव का भी जिक्र किया। 2018 से बढ़ती ट्रेड बाधाओं और टैरिफ ने वैश्विक सप्लाई चेन को नया स्वरूप दिया है। कंपनियां अब रिस्क के चलते डायवर्सिफिकेशन कर रही हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में चीन के निर्यात पर दबाव पड़ा है। कियोसाकी के अनुसार, इस बदलाव का सीधा लाभ भारत जैसे देशों को मिल रहा है, जिनकी आंतरिक खपत मजबूत है और युवा आबादी तथा बढ़ता मध्य वर्ग इसकी ताकत बन रहे हैं।
रॉबर्ट कियोसाकी ने निवेशकों के लिए भी सलाह दी। उनका कहना है कि पैसा हमेशा उस जगह जाता है जहां डिमांड बढ़ रही हो और इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य के लिए तैयार हो। निवेशक उन जगहों की ओर ध्यान दें जहाँ सप्लाई चेन रूट बदल रहा हो और लंबे समय तक स्थिर आर्थिक ढांचे की संभावना हो।
उन्होंने चीन के भविष्य पर भी टिप्पणी की। कियोसाकी के अनुसार, चीन गायब नहीं होगा, लेकिन वैश्विक बैलेंस बदल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमीर लोग अनुमान नहीं लगाते, वे अपनी पोजिशन पहले बना लेते हैं। यही सीख वित्तीय रूप से जागरूक निवेशकों को अपनानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा शक्ति, बढ़ता घरेलू बाजार और रणनीतिक आर्थिक ढांचा इसे अगले दो दशकों में वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने में सक्षम बना सकते हैं। वहीं, चीन और अन्य निर्यात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को आने वाले वर्षों में तेजी से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, कियोसाकी ने वैश्विक आर्थिक बदलाव में भारत के बढ़ते प्रभाव और निवेश के अवसरों को रेखांकित किया है। उनका संदेश स्पष्ट है: पैसा पहले चलता है, नैरेटिव बाद में, और अगले 20 सालों के लिए भारत को अवसरों की दिशा में अग्रसर माना जा सकता है।
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