चेक बाउंस केस में राजपाल यादव ने किया सरेंडर, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद जेल पहुंचे अभिनेता

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करीब 9 करोड़ रुपये बकाया होने पर हाई कोर्ट ने राहत से किया इनकार, भुगतान न होने पर सजा बहाल

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुवार को जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी तरह की राहत पर विचार से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा।

मामला उस समय चर्चा में आया, जब हाई कोर्ट ने 2 फरवरी को राजपाल यादव को दो दिन के भीतर संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट का कहना था कि बार-बार दिए गए अवसरों के बावजूद शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान नहीं किया गया, जिससे पहले दी गई राहत वापस ली जा रही है।

सरेंडर के बाद राजपाल यादव व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट में पेश हुए और राहत की मांग की। अभिनेता ने अदालत को बताया कि वे 25 लाख रुपये का चेक लेकर आए हैं और शेष राशि भी चुकाने का आश्वासन दिया। हालांकि, अदालत ने दो टूक कहा कि पहले आत्मसमर्पण जरूरी है और उसके बाद ही किसी राहत पर विचार किया जा सकता है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले दी गई राहत सिर्फ इस आधार पर थी कि मामला आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा और बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। लेकिन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि कई मौकों के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। अदालत के अनुसार, इस समय भी करीब 9 करोड़ रुपये की राशि बकाया है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जून 2024 में सुनाई गई सजा को अस्थायी रूप से केवल इसलिए रोका गया था, ताकि याचिकाकर्ता को विवाद सुलझाने का समय मिल सके। लेकिन लगातार आश्वासनों और समय दिए जाने के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

कोर्ट ने डिमांड ड्राफ्ट में तकनीकी या टाइपिंग त्रुटि का तर्क भी खारिज करते हुए कहा कि ये दलीलें भरोसे के योग्य नहीं हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि भुगतान से जुड़े वादे वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से खुले तौर पर किए गए थे।

अदालत ने आदेश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंपी जाए और राजपाल यादव को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा काटनी होगी।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए। बाद में समझौते के बावजूद पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ। समय के साथ ब्याज जुड़ने से बकाया रकम काफी बढ़ गई। वर्ष 2018 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अभिनेता को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने ऊपरी अदालतों में अपील की थी।

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Edited By: Nitin Trivedi

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06 Feb 2026 By Nitin Trivedi

चेक बाउंस केस में राजपाल यादव ने किया सरेंडर, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद जेल पहुंचे अभिनेता

बालीवुड न्यूज़

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद गुरुवार को जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी तरह की राहत पर विचार से पहले उन्हें अनिवार्य रूप से सरेंडर करना होगा।

मामला उस समय चर्चा में आया, जब हाई कोर्ट ने 2 फरवरी को राजपाल यादव को दो दिन के भीतर संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट का कहना था कि बार-बार दिए गए अवसरों के बावजूद शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान नहीं किया गया, जिससे पहले दी गई राहत वापस ली जा रही है।

सरेंडर के बाद राजपाल यादव व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट में पेश हुए और राहत की मांग की। अभिनेता ने अदालत को बताया कि वे 25 लाख रुपये का चेक लेकर आए हैं और शेष राशि भी चुकाने का आश्वासन दिया। हालांकि, अदालत ने दो टूक कहा कि पहले आत्मसमर्पण जरूरी है और उसके बाद ही किसी राहत पर विचार किया जा सकता है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पहले दी गई राहत सिर्फ इस आधार पर थी कि मामला आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा और बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। लेकिन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि कई मौकों के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। अदालत के अनुसार, इस समय भी करीब 9 करोड़ रुपये की राशि बकाया है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जून 2024 में सुनाई गई सजा को अस्थायी रूप से केवल इसलिए रोका गया था, ताकि याचिकाकर्ता को विवाद सुलझाने का समय मिल सके। लेकिन लगातार आश्वासनों और समय दिए जाने के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

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अदालत ने आदेश दिया कि रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंपी जाए और राजपाल यादव को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा काटनी होगी।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए। बाद में समझौते के बावजूद पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ। समय के साथ ब्याज जुड़ने से बकाया रकम काफी बढ़ गई। वर्ष 2018 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अभिनेता को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने ऊपरी अदालतों में अपील की थी।

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