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महिलाओं में बढ़ता हार्मोनल इम्बैलेंस: क्या बदलती लाइफस्टाइल बन रही है सबसे बड़ी वजह?
लाइफस्टाइल डेस्क
तनाव, गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या से बिगड़ रहा हार्मोन संतुलन, डॉक्टरों ने जताई चिंता
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में महिलाओं के बीच हार्मोनल इम्बैलेंस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पीसीओएस, थायरॉयड, अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण अब कम उम्र की महिलाओं में भी आम होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता मानसिक तनाव और खानपान की आदतें इस समस्या की प्रमुख वजह बन रही हैं।
क्या हो रहा है और किसे हो रहा है असर?
हार्मोनल असंतुलन तब होता है जब शरीर में हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक या कम हो जाता है। यह समस्या सबसे ज्यादा 18 से 40 वर्ष की महिलाओं में देखी जा रही है। स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ओपीडी में आने वाली हर तीसरी महिला किसी न किसी हार्मोनल समस्या से जूझ रही है।
क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
डॉक्टरों का कहना है कि देर रात तक जागना, अनियमित नींद, जंक फूड का अधिक सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लगातार स्क्रीन टाइम हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करता है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं में वर्क प्रेशर, मल्टीटास्किंग और सामाजिक अपेक्षाएं भी मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर हार्मोन पर पड़ता है।
कैसे लाइफस्टाइल बन रही है जिम्मेदार?
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के अनुसार शरीर की एंडोक्राइन ग्रंथियां बेहद संवेदनशील होती हैं। जब महिला लगातार तनाव में रहती है या सही समय पर भोजन और नींद नहीं लेती, तो हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है। फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगर का ज्यादा सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाता है, जो पीसीओएस जैसी समस्याओं को जन्म देता है।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों की राय
दिल्ली के एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के मुताबिक, “हार्मोनल इम्बैलेंस अब सिर्फ मेडिकल नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल से जुड़ा मुद्दा बन गया है। समय रहते दिनचर्या में सुधार किया जाए तो दवाओं की जरूरत भी कम पड़ सकती है।” विशेषज्ञ नियमित हेल्थ चेकअप, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन पर जोर दे रहे हैं।
समाधान और बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि महिलाओं को रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, योग या वॉक करनी चाहिए। पर्याप्त नींद, मोबाइल और लैपटॉप से ब्रेक, ताजा और पौष्टिक भोजन तथा कैफीन और जंक फूड से दूरी हार्मोन संतुलन को बेहतर बना सकती है। साथ ही, किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।
आगे की स्थिति क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाइफस्टाइल में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में हार्मोनल समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ-साथ समाज और कार्यस्थलों को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक वातावरण बनाना होगा।
महिलाओं में बढ़ता हार्मोनल इम्बैलेंस आज की ताज़ा ख़बरों और लाइफस्टाइल न्यूज का अहम मुद्दा बन चुका है, जो सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि पब्लिक हेल्थ से जुड़ा विषय है।
