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भारतीय घरों में बढ़ रहा ‘क्वाइट लग्जरी’ का क्रेज, खादी और लाल ईंटों से सजा रहे घर
लाइफ स्टाइल
दिखावे और भारी सजावट से दूर युवा जोड़े प्राकृतिक सामग्री, सादगी और पारंपरिक कारीगरी को दे रहे हैं प्राथमिकता
भारतीय इंटीरियर डिजाइन में अब ऐसी शैली पर ध्यान बढ़ रहा है, जिसमें घर की खूबसूरती बड़े ब्रांड या जरूरत से ज्यादा सजावट दिखाने के बजाय सामग्री, बनावट, कारीगरी और स्पेस की शांति से सामने आती है। इसी सोच को इंटीरियर की दुनिया में ‘क्वाइट लग्जरी’ कहा जा रहा है। भारत में इस शैली का स्थानीय रूप खादी, लिनन, लकड़ी, पत्थर, लाल ईंट और हाथ से तैयार किए गए डेकोर के इस्तेमाल में दिखाई दे रहा है। भारतीय डिजाइन जगत में ऑर्गेनिक मटेरियल और पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक रूप देने वाले प्रोजेक्ट्स को भी इस दिशा से जोड़ा जा रहा है।
क्या है घरों में ‘क्वाइट लग्जरी’?
क्वाइट लग्जरी का मतलब सिर्फ महंगी चीजें खरीदना नहीं है। इस स्टाइल में घर को ऐसा रूप दिया जाता है, जहां कम चीजों के साथ बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक टिकने वाली डिजाइन पर जोर रहता है। न्यूट्रल या मिट्टी से जुड़े रंग, प्राकृतिक रोशनी, सॉफ्ट टेक्सचर, लकड़ी, पत्थर और हाथ से बने सामान इस तरह के इंटीरियर की पहचान बन रहे हैं।
इस डिजाइन फिलॉसफी में फर्नीचर और सजावटी सामान की संख्या कम रखी जाती है, लेकिन प्रत्येक चीज को सोच-समझकर चुना जाता है। यानी कमरे में मौजूद हर वस्तु का कोई उद्देश्य या दृश्य भूमिका होती है।
लाल ईंटों की दीवार क्यों बन रही है खास?
शहरी घरों में एक्सपोज्ड ब्रिक यानी बिना प्लास्टर की लाल ईंटों वाली दीवारें इस ट्रेंड का एक प्रमुख हिस्सा बन सकती हैं। ईंटों की प्राकृतिक बनावट कमरे को गर्माहट देती है और आधुनिक फर्नीचर के साथ इसका कॉन्ट्रास्ट भी तैयार होता है। लाल ईंट को पूरी दीवार पर इस्तेमाल करने के बजाय कई डिजाइनर इसे किसी एक हिस्से में एक्सेंट वॉल के तौर पर रखते हैं। इसके साथ लकड़ी का फर्नीचर, मिट्टी के रंग के फैब्रिक और हल्की रोशनी इस्तेमाल करने से स्पेस ज्यादा सुकूनभरा दिखाई देता है।
युवा कपल्स को क्यों पसंद आ रही यह शैली?
नई पीढ़ी के घरों में ऐसी डिजाइन की मांग बढ़ रही है जो फोटो में आकर्षक दिखने के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में भी आरामदायक हो। युवा जोड़े अक्सर ऐसे घर को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां बहुत ज्यादा चमक-दमक के बजाय पर्सनल टच, आराम और साफ-सुथरा स्पेस दिखाई दे। क्वाइट लग्जरी इसी जरूरत को पूरा करती है। इसमें घर को किसी होटल या शोरूम जैसा बनाने के बजाय रहने वाले लोगों की पसंद और जीवनशैली को केंद्र में रखा जाता है। किताबें, पौधे, परिवार की तस्वीरें, स्थानीय कलाकारों की कलाकृतियां और हाथ से बनी वस्तुएं सजावट का हिस्सा बन सकती हैं।
न्यूट्रल रंगों के साथ मिट्टी के शेड
इस तरह के इंटीरियर में सफेद और ग्रे के साथ बेज, टेराकोटा, ऑलिव, ब्राउन और ऑफ-व्हाइट जैसे रंग इस्तेमाल किए जाते हैं। इन रंगों की खासियत यह है कि वे कमरे को बहुत ज्यादा भरा हुआ या चमकीला दिखाए बिना गहराई देते हैं। लाल ईंट की दीवार के साथ ऑफ-व्हाइट सोफा, लकड़ी की सेंटर टेबल और खादी के कुशन इस्तेमाल करने से एक ऐसा संयोजन बन सकता है जो भारतीय भी लगे और आधुनिक भी।
महंगे सामान से ज्यादा कारीगरी पर जोर
क्वाइट लग्जरी का एक अहम पहलू क्वालिटी और क्राफ्ट्समैनशिप है। हाथ से बुने कपड़े, हस्तनिर्मित कालीन, कारीगरों द्वारा तैयार लकड़ी या पत्थर की वस्तुएं और सीमित संख्या में बनाए गए डेकोर पीसेज इस शैली को अलग पहचान देते हैं। भारत में होम डेकोर के क्षेत्र में पारंपरिक कारीगरी को समकालीन डिजाइन के साथ जोड़ने वाले ब्रांड और डिजाइन स्टूडियो पहले से सक्रिय हैं। कुछ डिजाइन प्रोजेक्ट्स में प्राकृतिक पत्थर, लकड़ी और पुराने क्राफ्टिंग तरीकों को आधुनिक फर्नीचर के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है।
कम सामान, लेकिन हर चीज सोच-समझकर
इस ट्रेंड में घर को सजाने के लिए बड़ी संख्या में शोपीस खरीदने के बजाय कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर जोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, एक बड़े कमरे में कई छोटे डेकोर पीस रखने के बजाय एक हस्तनिर्मित कालीन, एक आर्टवर्क और एक खास लाइटिंग पीस ही पर्याप्त हो सकता है। इससे घर में खाली जगह भी बनी रहती है और फर्नीचर तथा सजावट की प्रमुख चीजें ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती हैं।
रोशनी और टेक्सचर की भूमिका
क्वाइट लग्जरी में लाइटिंग को भी बहुत महत्व दिया जाता है। तेज सफेद रोशनी की जगह गर्म और सॉफ्ट लाइटिंग का इस्तेमाल कमरे को अधिक आरामदायक बना सकता है। प्राकृतिक रोशनी के लिए बड़े विंडो, हल्के पर्दे और खुले लेआउट भी उपयोगी होते हैं। इसी तरह सिर्फ रंगों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग टेक्सचर इस्तेमाल किए जाते हैं—जैसे खादी, लिनन, लकड़ी, ईंट, पत्थर और बुने हुए फैब्रिक। टेक्सचर की यह परतें बिना ज्यादा सजावट के भी कमरे को समृद्ध लुक देती हैं। डिजाइन विशेषज्ञों के बीच भी टेक्सचर और प्राकृतिक सामग्री को शांत, लंबे समय तक टिकने वाले इंटीरियर से जोड़कर देखा जाता है।
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