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ट्रंप की चेतावनी से कच्चे तेल में उबाल, होर्मुज संकट और ओपेक फैसले से बढ़ी वैश्विक चिंता
बिजनेस न्यूज
मध्य पूर्व तनाव के बीच ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में तेज उछाल, सप्लाई बाधित होने की आशंका से बाजार में हलचल
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका की कड़ी चेतावनी के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई भी 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता देखा गया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में और अधिक तेजी दर्ज की गई। पिछले सत्र में ही ब्रेंट में करीब 8 फीसदी और डब्ल्यूटीआई में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी उछालों में से एक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। वर्तमान परिस्थितियों में पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो चुकी है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
इस बीच तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने मई महीने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद राहत मिलने की संभावना सीमित मानी जा रही है। संगठन के कई सदस्य देश मौजूदा हालात में उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। युद्ध और हमलों के कारण कई ऊर्जा संयंत्र प्रभावित हुए हैं, जिनकी मरम्मत में समय और संसाधन दोनों लगेंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और वृद्धि देखी जा सकती है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर मध्य पूर्व की स्थिति और बड़े तेल उत्पादक देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में तेल कीमतों की दिशा तय करेंगे।
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ट्रंप की चेतावनी से कच्चे तेल में उबाल, होर्मुज संकट और ओपेक फैसले से बढ़ी वैश्विक चिंता
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वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका की कड़ी चेतावनी के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहां ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई भी 111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता देखा गया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में और अधिक तेजी दर्ज की गई। पिछले सत्र में ही ब्रेंट में करीब 8 फीसदी और डब्ल्यूटीआई में 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी उछालों में से एक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत वहन करता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। वर्तमान परिस्थितियों में पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो चुकी है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
इस बीच तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक प्लस ने मई महीने के लिए उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद राहत मिलने की संभावना सीमित मानी जा रही है। संगठन के कई सदस्य देश मौजूदा हालात में उत्पादन बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। युद्ध और हमलों के कारण कई ऊर्जा संयंत्र प्रभावित हुए हैं, जिनकी मरम्मत में समय और संसाधन दोनों लगेंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और वृद्धि देखी जा सकती है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर मध्य पूर्व की स्थिति और बड़े तेल उत्पादक देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में तेल कीमतों की दिशा तय करेंगे।
