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कूनो से बाहर निकले चीते, 12 खुले जंगल में, प्रबंधन सतर्क
श्योपुर (म.प्र.)
कूनो नेशनल पार्क में 12 चीते खुले जंगल में, 6 बाहर; बढ़ती मूवमेंट और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर प्रबंधन की नजर।
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए अफ्रीकी चीतों का दायरा अब लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में बाड़ों और नियंत्रित क्षेत्र तक सीमित रहने वाले ये चीते अब खुले जंगलों में तेजी से फैल रहे हैं। उनकी गतिविधियां अब पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के वन क्षेत्रों और मानव बस्तियों के करीब तक पहुंच रही हैं। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
खुले जंगल में 12 चीते, आधे पार्क से बाहर
वर्तमान स्थिति के अनुसार कुल 12 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। इनमें से छह चीते अभी भी पार्क की सीमा के भीतर हैं, जबकि छह चीते बाहर के इलाकों में घूम रहे हैं। इनकी लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला है कि चीते अब श्योपुर से आगे बढ़कर ग्वालियर, मुरैना और शिवपुरी के जंगलों तक पहुंच चुके हैं। कुछ चीतों की हलचल राजस्थान की दिशा में बारां की ओर भी दर्ज की गई है। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि चीते अपने नए पर्यावरण के साथ धीरे-धीरे तालमेल बिठा रहे हैं।
प्रबंधन का दावा, फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं
कूनो प्रबंधन का कहना है कि चीतों को प्राकृतिक रूप से विचरण करने के लिए पहले से चिन्हित क्षेत्रों में ही मूव कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक ऐसी कोई गंभीर स्थिति नहीं बनी है जिससे आम लोगों को तत्काल खतरा हो। हालांकि, वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और चीतों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के संकेत बढ़े
जमीनी स्तर पर कुछ घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली भी सामने आई हैं। सबलगढ़ क्षेत्र में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक ग्रामीण अपनी भैंस को बचाने के लिए चीते को खदेड़ता नजर आया। यह घटना इस बात का संकेत है कि इंसानों और चीतों के बीच आमना-सामना अब पहले से ज्यादा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भविष्य में संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
17 हजार वर्ग किमी का ‘चीता लैंडस्केप’ तैयार
चीतों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक बड़ा ‘चीता लैंडस्केप’ विकसित किया है। इसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुल 25 जिले शामिल हैं। मध्य प्रदेश के श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना, ग्वालियर, गुना और अशोकनगर जैसे जिले इसके दायरे में आते हैं। यह लैंडस्केप कूनो के साथ गांधी सागर और मुकुंदरा हिल्स जैसे अभयारण्यों को जोड़ता है, जिससे चीतों को प्राकृतिक कॉरिडोर मिल सके।
दो राज्यों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर का निर्माण
इस विस्तृत लैंडस्केप का उद्देश्य चीतों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सुरक्षित और बिना बाधा के विचरण करने का अवसर देना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल लंबे समय में चीतों के स्थायी पुनर्वास के लिए अहम साबित हो सकता है। इससे उनकी आबादी बढ़ने और जैव विविधता को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।
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कूनो से बाहर निकले चीते, 12 खुले जंगल में, प्रबंधन सतर्क
श्योपुर (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए अफ्रीकी चीतों का दायरा अब लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में बाड़ों और नियंत्रित क्षेत्र तक सीमित रहने वाले ये चीते अब खुले जंगलों में तेजी से फैल रहे हैं। उनकी गतिविधियां अब पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के वन क्षेत्रों और मानव बस्तियों के करीब तक पहुंच रही हैं। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
खुले जंगल में 12 चीते, आधे पार्क से बाहर
वर्तमान स्थिति के अनुसार कुल 12 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। इनमें से छह चीते अभी भी पार्क की सीमा के भीतर हैं, जबकि छह चीते बाहर के इलाकों में घूम रहे हैं। इनकी लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला है कि चीते अब श्योपुर से आगे बढ़कर ग्वालियर, मुरैना और शिवपुरी के जंगलों तक पहुंच चुके हैं। कुछ चीतों की हलचल राजस्थान की दिशा में बारां की ओर भी दर्ज की गई है। यह विस्तार इस बात का संकेत है कि चीते अपने नए पर्यावरण के साथ धीरे-धीरे तालमेल बिठा रहे हैं।
प्रबंधन का दावा, फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं
कूनो प्रबंधन का कहना है कि चीतों को प्राकृतिक रूप से विचरण करने के लिए पहले से चिन्हित क्षेत्रों में ही मूव कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक ऐसी कोई गंभीर स्थिति नहीं बनी है जिससे आम लोगों को तत्काल खतरा हो। हालांकि, वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और चीतों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के संकेत बढ़े
जमीनी स्तर पर कुछ घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली भी सामने आई हैं। सबलगढ़ क्षेत्र में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक ग्रामीण अपनी भैंस को बचाने के लिए चीते को खदेड़ता नजर आया। यह घटना इस बात का संकेत है कि इंसानों और चीतों के बीच आमना-सामना अब पहले से ज्यादा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भविष्य में संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
17 हजार वर्ग किमी का ‘चीता लैंडस्केप’ तैयार
चीतों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक बड़ा ‘चीता लैंडस्केप’ विकसित किया है। इसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुल 25 जिले शामिल हैं। मध्य प्रदेश के श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना, ग्वालियर, गुना और अशोकनगर जैसे जिले इसके दायरे में आते हैं। यह लैंडस्केप कूनो के साथ गांधी सागर और मुकुंदरा हिल्स जैसे अभयारण्यों को जोड़ता है, जिससे चीतों को प्राकृतिक कॉरिडोर मिल सके।
दो राज्यों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर का निर्माण
इस विस्तृत लैंडस्केप का उद्देश्य चीतों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सुरक्षित और बिना बाधा के विचरण करने का अवसर देना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल लंबे समय में चीतों के स्थायी पुनर्वास के लिए अहम साबित हो सकता है। इससे उनकी आबादी बढ़ने और जैव विविधता को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।
