पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत

बिजनेस डेस्क

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1 जुलाई से कॉमर्शियल खरीदार भी रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे, 200 लीटर प्रतिदिन की सीमा भी समाप्त होगी।

सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।

पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।

इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।

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30 Jun 2026 By Vaishnavi.J

पेट्रोल-डीजल खरीद पर सभी पाबंदियां खत्म, 1 जुलाई से रीटेल पंपों से मिलेगी पूरी राहत

बिजनेस डेस्क

सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लागू सभी आपातकालीन पाबंदियों को 1 जुलाई 2026 से हटाने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद अब कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता भी सामान्य ग्राहकों की तरह रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक वाहन में एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा भी समाप्त कर दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 29 जून को नया आदेश जारी करते हुए पहले लगाए गए प्रतिबंध वापस ले लिए। मंत्रालय का कहना है कि देश में ईंधन की आपूर्ति अब सामान्य हो चुकी है, इसलिए इन प्रतिबंधों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रही। सरकार ने 11 जून को पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच कई अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। उस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई थी। हालात को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी, कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की थी। इन नियमों के तहत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, फैक्ट्रियों, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य कमर्शियल खरीदारों को रीटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल बल्क सेल प्वाइंट्स या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही ईंधन लेना पड़ता था। प्रतिबंधों के दौरान आम वाहनों और ट्रकों के लिए भी एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल भरवाने की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कृत्रिम कमी पैदा न हो और सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से आपूर्ति बनी रहे। हालांकि पिछले कुछ दिनों में सप्लाई की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। मंत्रालय के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई भी पहले की तुलना में सामान्य हो गई है।

पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रीटेल और थोक बाजार में डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला था। उदाहरण के तौर पर, रीटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत काफी कम थी, जबकि थोक खरीदारों के लिए इसकी कीमत कहीं अधिक पड़ रही थी। इसी कारण कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, बस ऑपरेटर और टेलीकॉम कंपनियां सीधे रीटेल पंपों से ईंधन खरीदने लगी थीं। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग अचानक बढ़ गई और सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बनने लगा। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्थायी प्रतिबंध लागू किए थे। सरकार का कहना है कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री मार्गों से तेल की आपूर्ति सामान्य होने के कारण भारत को कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति मिलने लगी है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली ऑयल शिपमेंट्स फिर से सुचारु होने से घरेलू स्तर पर स्टॉक मजबूत हुआ है। इसी समीक्षा के बाद मंत्रालय ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया।

इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। पहले ट्रक ऑपरेटरों और बस कंपनियों को निर्धारित सीमा के कारण कई बार अलग-अलग पेट्रोल पंपों से डीजल लेना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। अब यह परेशानी खत्म हो जाएगी। इसी तरह निर्माण कार्यों, औद्योगिक इकाइयों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों को भी ईंधन की उपलब्धता पहले की तरह आसान हो जाएगी। प्रतिबंध हटने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और ईंधन की खरीद की प्रक्रिया सामान्य होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगी। यदि भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति संबंधी चुनौती सामने आती है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की बात नहीं बताई गई है। 1 जुलाई से लागू होने वाले इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं और बड़े व्यावसायिक खरीदारों दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचा था।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/all-restrictions-on-purchase-of-petrol-and-diesel-ended-complete/article-57373

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