कौन हैं अक्षरा गुप्ता? 15 साल की उम्र में तिहरा शतक, अब 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' के नाम से चर्चा में

स्पोर्ट्स डेस्क

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बिहार के रक्सौल की 15 वर्षीय बल्लेबाज अक्षरा गुप्ता ने अंडर-19 वनडे मुकाबले में 126 गेंदों पर नाबाद 306 रन बनाकर सभी का ध्यान खींचा।

भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ महीनों से बिहार की युवा प्रतिभाओं की चर्चा लगातार बढ़ रही है। पहले वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाई और अब बिहार की 15 वर्षीय बल्लेबाज अक्षरा गुप्ता सुर्खियों में हैं। महिला अंडर-19 वनडे प्रतियोगिता में उन्होंने महज 126 गेंदों पर नाबाद 306 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 242.86 की स्ट्राइक रेट से खेली गई यह पारी सिर्फ आंकड़ों की वजह से खास नहीं रही, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि बिहार से महिला क्रिकेट में भी नई प्रतिभाएं तेजी से सामने आ रही हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में उन्हें 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' कहा जाने लगा है। अक्षरा गुप्ता बिहार के नेपाल सीमा से सटे रक्सौल शहर की रहने वाली हैं। सीमित संसाधनों वाले इस इलाके से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं, जबकि मां रीना देवी गृहिणी हैं। परिवार ने शुरू से ही उनकी रुचि को समझा और हर संभव सहयोग दिया। बेटी की क्रिकेट के प्रति लगन देखकर पिता ने घर के पीछे ही अभ्यास के लिए नेट और पिच तैयार करवा दी। वहीं मां रोज सुबह जल्दी उठाकर उन्हें अभ्यास के लिए भेजती थीं। परिवार के इसी सहयोग ने अक्षरा की नींव मजबूत की।

अक्षरा ने महज आठ साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वह अपने भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ खेलती थीं। उनके चाचा रामकृपा ने सबसे पहले उनकी बल्लेबाजी की क्षमता को पहचाना और नियमित अभ्यास करवाना शुरू किया। साल 2020 से उन्होंने व्यवस्थित ट्रेनिंग लेना शुरू किया और तब से आज तक रोजाना कई घंटे अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। लगातार मेहनत और अनुशासन ने धीरे-धीरे उनके खेल को नई ऊंचाई दी। साल 2024 उनके क्रिकेट करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ समय बाद ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिल गई। महज 14 साल की उम्र में टीम की कमान संभालना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उन्होंने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं और चयनकर्ताओं का भरोसा जीता। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्हें बिहार की सीनियर महिला टीम में भी जगह मिली। इतनी कम उम्र में सीनियर स्तर पर खेलने वाली वह राज्य की सबसे युवा महिला क्रिकेटरों में शामिल हो गईं। इसके बाद उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। एक ही घरेलू सीजन में उन्होंने बीसीसीआई के चार अलग-अलग आयु वर्ग के टूर्नामेंट खेले, जिसमें अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23 प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। लगातार मैच खेलने से उन्हें अनुभव मिला और उनकी बल्लेबाजी में और निखार आया।

19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड मैदान पर खेले गए बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी मुकाबले में अक्षरा ने ऐसी पारी खेली, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। उन्होंने सिर्फ 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। उन्होंने केवल 16 गेंदों में अपना अर्धशतक और 34 गेंदों में शतक पूरा कर लिया। करीब 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं और विपक्षी गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। उनकी इस पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन का विशाल स्कोर बनाया, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। इसके चार दिन बाद भी उन्होंने शानदार बल्लेबाजी जारी रखते हुए 68 गेंदों पर 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। अक्षरा की बल्लेबाजी शैली भी उन्हें अलग पहचान देती है। वह बाएं हाथ की बल्लेबाज हैं और शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज में रन बनाने पर भरोसा करती हैं। यही विशेषता वैभव सूर्यवंशी के खेल में भी देखने को मिलती है। दोनों बिहार से आते हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली गेंद से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इसी समानता की वजह से क्रिकेट प्रेमियों ने उन्हें 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' कहना शुरू कर दिया। उनका पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है और स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी को सबसे मजबूत माना जाता है। अक्षरा अपनी प्रेरणा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना को मानती हैं। उनकी बल्लेबाजी की टाइमिंग और कवर ड्राइव उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। वहीं विराट कोहली की फिटनेस, आक्रामक सोच और मैदान पर ऊर्जा भी उन्हें प्रेरित करती है। वह महिला प्रीमियर लीग और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की समर्थक हैं। उनका सपना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना है।

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30 Jun 2026 By Vaishnavi.J

कौन हैं अक्षरा गुप्ता? 15 साल की उम्र में तिहरा शतक, अब 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' के नाम से चर्चा में

स्पोर्ट्स डेस्क

भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ महीनों से बिहार की युवा प्रतिभाओं की चर्चा लगातार बढ़ रही है। पहले वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाई और अब बिहार की 15 वर्षीय बल्लेबाज अक्षरा गुप्ता सुर्खियों में हैं। महिला अंडर-19 वनडे प्रतियोगिता में उन्होंने महज 126 गेंदों पर नाबाद 306 रन की विस्फोटक पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 242.86 की स्ट्राइक रेट से खेली गई यह पारी सिर्फ आंकड़ों की वजह से खास नहीं रही, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि बिहार से महिला क्रिकेट में भी नई प्रतिभाएं तेजी से सामने आ रही हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में उन्हें 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' कहा जाने लगा है। अक्षरा गुप्ता बिहार के नेपाल सीमा से सटे रक्सौल शहर की रहने वाली हैं। सीमित संसाधनों वाले इस इलाके से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं, जबकि मां रीना देवी गृहिणी हैं। परिवार ने शुरू से ही उनकी रुचि को समझा और हर संभव सहयोग दिया। बेटी की क्रिकेट के प्रति लगन देखकर पिता ने घर के पीछे ही अभ्यास के लिए नेट और पिच तैयार करवा दी। वहीं मां रोज सुबह जल्दी उठाकर उन्हें अभ्यास के लिए भेजती थीं। परिवार के इसी सहयोग ने अक्षरा की नींव मजबूत की।

अक्षरा ने महज आठ साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वह अपने भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ खेलती थीं। उनके चाचा रामकृपा ने सबसे पहले उनकी बल्लेबाजी की क्षमता को पहचाना और नियमित अभ्यास करवाना शुरू किया। साल 2020 से उन्होंने व्यवस्थित ट्रेनिंग लेना शुरू किया और तब से आज तक रोजाना कई घंटे अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। लगातार मेहनत और अनुशासन ने धीरे-धीरे उनके खेल को नई ऊंचाई दी। साल 2024 उनके क्रिकेट करियर का अहम मोड़ साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ समय बाद ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिल गई। महज 14 साल की उम्र में टीम की कमान संभालना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उन्होंने शानदार अर्धशतकीय पारियां खेलीं और चयनकर्ताओं का भरोसा जीता। इसके बाद फरवरी 2026 में उन्हें बिहार की सीनियर महिला टीम में भी जगह मिली। इतनी कम उम्र में सीनियर स्तर पर खेलने वाली वह राज्य की सबसे युवा महिला क्रिकेटरों में शामिल हो गईं। इसके बाद उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। एक ही घरेलू सीजन में उन्होंने बीसीसीआई के चार अलग-अलग आयु वर्ग के टूर्नामेंट खेले, जिसमें अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23 प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। लगातार मैच खेलने से उन्हें अनुभव मिला और उनकी बल्लेबाजी में और निखार आया।

19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड मैदान पर खेले गए बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी मुकाबले में अक्षरा ने ऐसी पारी खेली, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। उन्होंने सिर्फ 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। उन्होंने केवल 16 गेंदों में अपना अर्धशतक और 34 गेंदों में शतक पूरा कर लिया। करीब 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं और विपक्षी गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। उनकी इस पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन का विशाल स्कोर बनाया, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। इसके चार दिन बाद भी उन्होंने शानदार बल्लेबाजी जारी रखते हुए 68 गेंदों पर 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। अक्षरा की बल्लेबाजी शैली भी उन्हें अलग पहचान देती है। वह बाएं हाथ की बल्लेबाज हैं और शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज में रन बनाने पर भरोसा करती हैं। यही विशेषता वैभव सूर्यवंशी के खेल में भी देखने को मिलती है। दोनों बिहार से आते हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली गेंद से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इसी समानता की वजह से क्रिकेट प्रेमियों ने उन्हें 'फीमेल वैभव सूर्यवंशी' कहना शुरू कर दिया। उनका पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है और स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी को सबसे मजबूत माना जाता है। अक्षरा अपनी प्रेरणा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना को मानती हैं। उनकी बल्लेबाजी की टाइमिंग और कवर ड्राइव उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। वहीं विराट कोहली की फिटनेस, आक्रामक सोच और मैदान पर ऊर्जा भी उन्हें प्रेरित करती है। वह महिला प्रीमियर लीग और आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की समर्थक हैं। उनका सपना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करना है।

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