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शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर जनपद सदस्य भूख हड़ताल पर बैठे
सतना,(म.प्र.)
पिथौराबाद में संचालित शराब दुकान का विरोध तेज, जनपद सदस्य बोले- 15 दिन पहले दिया था ज्ञापन, कार्रवाई नहीं होने पर शुरू किया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल।
सतना जिले के नागौद विधानसभा क्षेत्र में शराब दुकान को लेकर लंबे समय से चल रहा विरोध अब आंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम पंचायत पिथौराबाद में संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा ने मंगलवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने पोड़ी तिराहा स्थित हनुमान मंदिर के सामने धरना स्थल बनाकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। जनपद सदस्य का कहना है कि प्रशासन को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय के भीतर शराब दुकान को नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल के पहले दिन बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और क्षेत्र के लोग भी मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शराब दुकान की वजह से आसपास का माहौल लगातार खराब हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार दुकान मुख्य सड़क पर संचालित होने के कारण यहां दिनभर शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे आने-जाने वाले लोगों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शराब के नशे में लोग सड़क पर हंगामा करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उन्होंने कलेक्टर, जिला आबकारी अधिकारी और संबंधित पुलिस चौकी में लिखित ज्ञापन देकर शराब दुकान को हटाने की मांग की थी। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण उन्होंने आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर शराब दुकान संचालित हो रही है, वहां कई संवेदनशील संस्थान मौजूद हैं। दुकान के ठीक सामने विद्युत सब-स्टेशन स्थित है, जबकि कुछ ही दूरी पर शासकीय माध्यमिक विद्यालय भी संचालित है। ऐसे में स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना शराबियों की भीड़ के बीच से गुजरना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे उनके मानसिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस दुकान को पोड़ी के नाम से स्वीकृति मिली थी, वह वर्तमान में पिथौराबाद में संचालित की जा रही है। इसे लेकर पहले भी कई बार आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान के संचालन से गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों ने प्रशासन से इस संबंध में शिकायतें भी की हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे केवल शराब दुकान को आबादी और शैक्षणिक संस्थानों के पास से हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दुकान को नियमों के अनुरूप किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए तो स्थानीय लोगों की समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जब तक प्रशासन इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भूख हड़ताल शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखना शुरू कर दिया है। स्थानीय पुलिस भी एहतियात के तौर पर स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से शराब दुकान को हटाने या स्थानांतरित करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान या सार्वजनिक स्थान के पास शराब दुकान संचालित होने से लोगों को परेशानी हो रही है तो संबंधित विभाग को नियमों के अनुसार मामले की समीक्षा करनी चाहिए। वहीं कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की अपील भी की है। जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन शराब दुकान को हटाने के संबंध में स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लेता, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी ओर स्थानीय लोग भी आंदोलन को समर्थन देते हुए प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
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शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर जनपद सदस्य भूख हड़ताल पर बैठे
सतना,(म.प्र.)
सतना जिले के नागौद विधानसभा क्षेत्र में शराब दुकान को लेकर लंबे समय से चल रहा विरोध अब आंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम पंचायत पिथौराबाद में संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा ने मंगलवार से भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने पोड़ी तिराहा स्थित हनुमान मंदिर के सामने धरना स्थल बनाकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। जनपद सदस्य का कहना है कि प्रशासन को पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय के भीतर शराब दुकान को नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल के पहले दिन बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और क्षेत्र के लोग भी मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शराब दुकान की वजह से आसपास का माहौल लगातार खराब हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार दुकान मुख्य सड़क पर संचालित होने के कारण यहां दिनभर शराब पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे आने-जाने वाले लोगों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शराब के नशे में लोग सड़क पर हंगामा करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा ने बताया कि करीब 15 दिन पहले उन्होंने कलेक्टर, जिला आबकारी अधिकारी और संबंधित पुलिस चौकी में लिखित ज्ञापन देकर शराब दुकान को हटाने की मांग की थी। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण उन्होंने आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर शराब दुकान संचालित हो रही है, वहां कई संवेदनशील संस्थान मौजूद हैं। दुकान के ठीक सामने विद्युत सब-स्टेशन स्थित है, जबकि कुछ ही दूरी पर शासकीय माध्यमिक विद्यालय भी संचालित है। ऐसे में स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना शराबियों की भीड़ के बीच से गुजरना पड़ता है। अभिभावकों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है और इससे उनके मानसिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस दुकान को पोड़ी के नाम से स्वीकृति मिली थी, वह वर्तमान में पिथौराबाद में संचालित की जा रही है। इसे लेकर पहले भी कई बार आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान के संचालन से गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है। कई परिवारों ने प्रशासन से इस संबंध में शिकायतें भी की हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे केवल शराब दुकान को आबादी और शैक्षणिक संस्थानों के पास से हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि दुकान को नियमों के अनुरूप किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाए तो स्थानीय लोगों की समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि जब तक प्रशासन इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
भूख हड़ताल शुरू होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखना शुरू कर दिया है। स्थानीय पुलिस भी एहतियात के तौर पर स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से शराब दुकान को हटाने या स्थानांतरित करने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान या सार्वजनिक स्थान के पास शराब दुकान संचालित होने से लोगों को परेशानी हो रही है तो संबंधित विभाग को नियमों के अनुसार मामले की समीक्षा करनी चाहिए। वहीं कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की अपील भी की है। जनपद सदस्य रमेश कुशवाहा अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन शराब दुकान को हटाने के संबंध में स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लेता, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी ओर स्थानीय लोग भी आंदोलन को समर्थन देते हुए प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
