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जर्मनी वर्ल्ड कप से बाहर, ब्राजील और मोरक्को ने दर्ज की यादगार जीत
स्पोर्ट्स डेस्क
पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराया, ब्राजील ने आखिरी मिनट में जापान को मात देकर अंतिम-16 में बनाई जगह, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को बाहर किया।
फुटबॉल वर्ल्ड कप में मंगलवार को ऐसा दिन देखने को मिला, जिसने टूर्नामेंट की तस्वीर ही बदल दी। चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का सफर राउंड ऑफ-32 में ही खत्म हो गया। पैराग्वे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के दौरान 4-3 से जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, लेकिन फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो शानदार बचाव कर पैराग्वे को ऐतिहासिक जीत दिलाई। दूसरी ओर, ब्राजील ने इंजरी टाइम में गैब्रियल मार्टिनेली के गोल की बदौलत जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई। वहीं, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर अगले दौर का टिकट पक्का कर लिया। एक ही दिन में तीन मुकाबलों के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि इस बार वर्ल्ड कप में कोई भी टीम सुरक्षित नहीं है और छोटे माने जाने वाले देश भी बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।
फॉक्सबोरो में खेले गए जर्मनी और पैराग्वे के मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। जर्मनी ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 42वें मिनट में मिगेल अल्मिरोन के शानदार मूव पर मातियास गालार्सा ने गेंद बॉक्स में पहुंचाई, जहां जूलियो एनसिसो ने हेडर लगाकर पैराग्वे को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में पीछे रहने के बाद जर्मनी ने दूसरे हाफ में दबाव बढ़ाया और 52वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने शानदार हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद जर्मनी ने लगातार कई मौके बनाए, लेकिन पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल बार-बार दीवार बनकर सामने खड़े रहे। अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन ताह ने कॉर्नर पर गोल भी कर दिया था, लेकिन वीडियो रिव्यू में गोलकीपर पर फाउल मिलने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा। शुरुआती चार राउंड के बाद दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन निर्णायक क्षण में ऑरलैंडो गिल ने दो अहम पेनल्टी रोक दीं और जोस कैनाले ने विजयी पेनल्टी को गोल में बदलकर पैराग्वे को यादगार जीत दिला दी। मैच के बाद गिल ने कहा कि टीम ने जर्मनी के हर खिलाड़ी की पेनल्टी लेने की शैली का पहले से अध्ययन किया था और उसी तैयारी का फायदा उन्हें मिला। दूसरी तरफ जर्मनी के खिलाड़ियों ने माना कि टीम कई अच्छे मौके भुनाने में नाकाम रही और यही हार की सबसे बड़ी वजह बनी।
ह्यूस्टन में ब्राजील और जापान के बीच मुकाबला भी आखिरी सेकेंड तक रोमांच से भरपूर रहा। जापान ने 29वें मिनट में काइशू सानो के शानदार लंबी दूरी के गोल से बढ़त हासिल कर ली। ब्राजील ने पहले हाफ में कई मौके बनाए लेकिन बराबरी नहीं कर सका। दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और 56वें मिनट में कैसेमीरो ने हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद विनीसियस जूनियर और रोड्रिगो को भी गोल करने के अवसर मिले, लेकिन जापानी गोलकीपर जियोन सुजुकी लगातार बेहतरीन बचाव करते रहे। मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तभी दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे गैब्रियल मार्टिनेली ने इंजरी टाइम के छठे मिनट में शानदार गोल दागकर ब्राजील को 2-1 की जीत दिला दी। यह जीत ब्राजील के लिए कई मायनों में खास रही। टीम लगातार 20वीं बार वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में पहुंची और यह जीत उसी दिन मिली, जिस दिन ब्राजील ने 1958 में अपना पहला विश्व कप खिताब जीता था। मैच के बाद कोच कार्लो एंसेलोटी ने कहा कि उनकी टीम ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और आखिरी मिनट तक जीत के लिए संघर्ष किया। उन्होंने मार्टिनेली की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं, स्टार खिलाड़ी नेमार इस मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरे। कोच ने बताया कि उन्हें खेलने पर विचार किया गया था, लेकिन टीम को उसकी जरूरत महसूस नहीं हुई।
तीसरे मुकाबले में मोरक्को और नीदरलैंड के बीच भी जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। निर्धारित समय में दोनों टीमों ने एक-एक गोल किए। नीदरलैंड ने 72वें मिनट में कोडी गाक्पो के गोल से बढ़त बनाई थी और जीत के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने हेडर लगाकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बूनू ने क्रिसेंसियो समरविल की पेनल्टी रोककर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद इस्माइल सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलते हुए मोरक्को को 3-2 से जीत दिला दी। इस जीत के साथ मोरक्को ने 1994 विश्व कप में नीदरलैंड से मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। अब अगले दौर में ब्राजील का सामना आइवरी कोस्ट या नॉर्वे से होगा, जबकि पैराग्वे फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगा। मोरक्को की टीम 4 जुलाई को कनाडा के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। मंगलवार के इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ इतिहास या रैंकिंग नहीं, बल्कि उस दिन का प्रदर्शन ही जीत और हार तय करता है।
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जर्मनी वर्ल्ड कप से बाहर, ब्राजील और मोरक्को ने दर्ज की यादगार जीत
स्पोर्ट्स डेस्क
फुटबॉल वर्ल्ड कप में मंगलवार को ऐसा दिन देखने को मिला, जिसने टूर्नामेंट की तस्वीर ही बदल दी। चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का सफर राउंड ऑफ-32 में ही खत्म हो गया। पैराग्वे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट के दौरान 4-3 से जीत दर्ज कर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर थीं, लेकिन फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो शानदार बचाव कर पैराग्वे को ऐतिहासिक जीत दिलाई। दूसरी ओर, ब्राजील ने इंजरी टाइम में गैब्रियल मार्टिनेली के गोल की बदौलत जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई। वहीं, मोरक्को ने भी नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर अगले दौर का टिकट पक्का कर लिया। एक ही दिन में तीन मुकाबलों के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि इस बार वर्ल्ड कप में कोई भी टीम सुरक्षित नहीं है और छोटे माने जाने वाले देश भी बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।
फॉक्सबोरो में खेले गए जर्मनी और पैराग्वे के मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। जर्मनी ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और लगातार आक्रमण किए, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। 42वें मिनट में मिगेल अल्मिरोन के शानदार मूव पर मातियास गालार्सा ने गेंद बॉक्स में पहुंचाई, जहां जूलियो एनसिसो ने हेडर लगाकर पैराग्वे को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ में पीछे रहने के बाद जर्मनी ने दूसरे हाफ में दबाव बढ़ाया और 52वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने शानदार हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद जर्मनी ने लगातार कई मौके बनाए, लेकिन पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल बार-बार दीवार बनकर सामने खड़े रहे। अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन ताह ने कॉर्नर पर गोल भी कर दिया था, लेकिन वीडियो रिव्यू में गोलकीपर पर फाउल मिलने के बाद रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा। शुरुआती चार राउंड के बाद दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन निर्णायक क्षण में ऑरलैंडो गिल ने दो अहम पेनल्टी रोक दीं और जोस कैनाले ने विजयी पेनल्टी को गोल में बदलकर पैराग्वे को यादगार जीत दिला दी। मैच के बाद गिल ने कहा कि टीम ने जर्मनी के हर खिलाड़ी की पेनल्टी लेने की शैली का पहले से अध्ययन किया था और उसी तैयारी का फायदा उन्हें मिला। दूसरी तरफ जर्मनी के खिलाड़ियों ने माना कि टीम कई अच्छे मौके भुनाने में नाकाम रही और यही हार की सबसे बड़ी वजह बनी।
ह्यूस्टन में ब्राजील और जापान के बीच मुकाबला भी आखिरी सेकेंड तक रोमांच से भरपूर रहा। जापान ने 29वें मिनट में काइशू सानो के शानदार लंबी दूरी के गोल से बढ़त हासिल कर ली। ब्राजील ने पहले हाफ में कई मौके बनाए लेकिन बराबरी नहीं कर सका। दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और 56वें मिनट में कैसेमीरो ने हेडर के जरिए स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद विनीसियस जूनियर और रोड्रिगो को भी गोल करने के अवसर मिले, लेकिन जापानी गोलकीपर जियोन सुजुकी लगातार बेहतरीन बचाव करते रहे। मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तभी दूसरे हाफ में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर उतरे गैब्रियल मार्टिनेली ने इंजरी टाइम के छठे मिनट में शानदार गोल दागकर ब्राजील को 2-1 की जीत दिला दी। यह जीत ब्राजील के लिए कई मायनों में खास रही। टीम लगातार 20वीं बार वर्ल्ड कप के अंतिम-16 में पहुंची और यह जीत उसी दिन मिली, जिस दिन ब्राजील ने 1958 में अपना पहला विश्व कप खिताब जीता था। मैच के बाद कोच कार्लो एंसेलोटी ने कहा कि उनकी टीम ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और आखिरी मिनट तक जीत के लिए संघर्ष किया। उन्होंने मार्टिनेली की तारीफ करते हुए कहा कि वह हमेशा टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं, स्टार खिलाड़ी नेमार इस मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरे। कोच ने बताया कि उन्हें खेलने पर विचार किया गया था, लेकिन टीम को उसकी जरूरत महसूस नहीं हुई।
तीसरे मुकाबले में मोरक्को और नीदरलैंड के बीच भी जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। निर्धारित समय में दोनों टीमों ने एक-एक गोल किए। नीदरलैंड ने 72वें मिनट में कोडी गाक्पो के गोल से बढ़त बनाई थी और जीत के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन इंजरी टाइम के 91वें मिनट में इस्सा डियोप ने हेडर लगाकर मोरक्को को बराबरी दिला दी। अतिरिक्त समय में दोनों टीमों ने कई मौके बनाए, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। इसके बाद फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ। मोरक्को के अनुभवी गोलकीपर यासीन बूनू ने क्रिसेंसियो समरविल की पेनल्टी रोककर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद इस्माइल सैबारी ने निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलते हुए मोरक्को को 3-2 से जीत दिला दी। इस जीत के साथ मोरक्को ने 1994 विश्व कप में नीदरलैंड से मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया। अब अगले दौर में ब्राजील का सामना आइवरी कोस्ट या नॉर्वे से होगा, जबकि पैराग्वे फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगा। मोरक्को की टीम 4 जुलाई को कनाडा के खिलाफ मैदान पर उतरेगी। मंगलवार के इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ इतिहास या रैंकिंग नहीं, बल्कि उस दिन का प्रदर्शन ही जीत और हार तय करता है।
