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Budget 2026: आम आदमी की जेब और जरूरतें कसौटी पर, रेलवे से यात्रियों की बड़ी उम्मीदें
बिजनेस न्यूज
1 फरवरी को पेश होगा बजट, सस्ती टिकट, समय पर ट्रेन और बुनियादी सुविधाओं पर टिकी नजर
नई दिल्ली।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी। बजट से पहले भारतीय रेलवे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। करोड़ों रेल यात्रियों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार बजट में कॉमन मैन की जरूरतों और जेब को प्राथमिकता मिलेगी। सरकार के बड़े निवेश और प्रीमियम ट्रेनों के विस्तार के बावजूद आम यात्री आज भी रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता, भीड़ और बुनियादी सुविधाओं को लेकर असंतुष्ट नजर आता है।
क्या चाहते हैं रेल यात्री
देश के बड़े हिस्से के लिए रेलवे अब भी सबसे सस्ता और भरोसेमंद परिवहन साधन है। यात्रियों की सबसे बड़ी मांग है कि सस्ती दरों पर कन्फर्म टिकट मिलें और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही उम्मीद की जा रही है कि बजट में लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने के लिए ठोस प्रावधान किए जाएंगे। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों के साथ-साथ आम ट्रेनों की स्थिति भी सुधरनी चाहिए।
सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल
रेलवे को लेकर शिकायतों की सूची लंबी है। ट्रेनों की सफाई व्यवस्था, पैंट्री कार में मिलने वाले खाने की क्वालिटी, बोतलबंद पानी और अन्य सामानों की एमआरपी से अधिक वसूली, गंदे टॉयलेट और पानी की कमी जैसी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। इसके अलावा स्टेशनों और ट्रेनों में चोरी-चकारी और कभी-कभार होने वाली दुर्घटनाएं भी यात्रियों की चिंता बढ़ाती हैं। बजट से उम्मीद है कि इन मुद्दों पर बुनियादी सुधार के लिए पर्याप्त फंड आवंटन होगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रैक पर जोर
रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई और तेज रफ्तार ट्रेनों से पहले रेलवे ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। कई रूट्स पर ट्रैक की हालत ऐसी है कि ट्रेनें अपनी घोषित स्पीड से नहीं चल पातीं। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेडेशन, सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर खर्च बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार और विशेषज्ञों की राय
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को रेलवे के लिए “रिफॉर्म ईयर” बताया है। उनका दावा है कि साल के 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे। वहीं, चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम सुधांशु मणि का कहना है कि पहले रेलवे बजट बनाते समय आम आदमी की जेब और जरूरतों को केंद्र में रखा जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बजट में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। उनका मानना है कि प्रीमियम ट्रेनें जरूरी हैं, पर आम यात्रियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
अब सबकी निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं। बजट 2026 यह तय करेगा कि रेलवे विकास की दौड़ में आम यात्री को साथ लेकर चलता है या नहीं। यदि सस्ती यात्रा, बेहतर सेवाएं और सुरक्षा पर संतुलित निवेश हुआ, तो यह बजट रेल यात्रियों के लिए राहत लेकर आ सकता है।
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