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सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी तीन दिन में ₹22 हजार टूटी
बिजनेस डेस्क
सोना ₹2,156 सस्ता होकर ₹1.40 लाख पर पहुंचा, वैश्विक हालात और मुनाफावसूली से कीमती धातुओं पर बढ़ा दबाव
सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। गुरुवार, 25 जून 2026 को कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 2,156 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है, जिसके बाद इसका भाव घटकर करीब 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं चांदी की कीमत में एक ही दिन में 6,550 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है और इसका भाव 2.15 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गया है। खास बात यह है कि चांदी पिछले तीन कारोबारी दिनों में ही करीब 22 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सोना और चांदी दोनों में हाल के दिनों में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जून महीने की शुरुआत में सोना जहां करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वहीं अब इसमें लगभग 16 हजार रुपए की गिरावट आ चुकी है। इसी तरह चांदी का भाव भी महीने की शुरुआत में 2.63 लाख रुपए प्रति किलो था, जो अब घटकर 2.15 लाख रुपए के आसपास पहुंच गया है। यानी सिर्फ एक महीने में चांदी लगभग 48 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई है।
इस साल की शुरुआत से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कीमतों में उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा दिखाई देता है। वर्ष 2026 की शुरुआत में सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद जनवरी के अंत तक इसमें जोरदार तेजी आई और कीमतें 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। हालांकि इसके बाद बाजार का रुख बदला और लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया। वर्तमान कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 36 हजार रुपए तक नीचे आ चुका है। चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही है। पिछले वर्ष के अंत में चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त उछाल आया और कीमत 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जाता है। लेकिन उसके बाद बाजार में आई कमजोरी ने चांदी की चमक फीकी कर दी। करीब पांच महीनों के भीतर ही चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 1.70 लाख रुपए प्रति किलो तक टूट चुकी है। इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों को भी हैरान किया है।
कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक समझ और तनाव में आई कमी को माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में युद्ध और संघर्ष की आशंकाओं के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे थे। सोना और चांदी को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए इनके दाम लगातार बढ़ रहे थे। लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ, निवेशकों ने इन धातुओं से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया। दूसरा महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को माना जा रहा है। हाल के संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी मान रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की मांग पर पड़ता है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाने वाली एक अहम वजह बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने पर सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दिखाई देते हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में तेज गिरावट को बढ़ावा दिया है। बड़े फंड हाउस और संस्थागत निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर अपने निवेश का लाभ बुक किया, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी। गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में भी हाल के दिनों में बिकवाली का दबाव देखा गया है। निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षण कम होने से इन फंड्स से पैसा निकलना शुरू हुआ है। इसका असर घरेलू बाजारों में भी दिखाई दे रहा है और कीमतों में गिरावट का एक कारण इसे भी माना जा रहा है।
मौजूदा गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों से पहले कीमतों में आई नरमी ग्राहकों को राहत दे सकती है। लेकिन निवेश से पहले बाजार की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी होगा। सोना खरीदते समय ग्राहकों को हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमतों की जांच करना भी जरूरी है। सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया निवेश भविष्य में बेहतर लाभ दे सकता है। घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक नीतियों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा तय करेंगी।
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सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी तीन दिन में ₹22 हजार टूटी
बिजनेस डेस्क
सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। गुरुवार, 25 जून 2026 को कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 2,156 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है, जिसके बाद इसका भाव घटकर करीब 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं चांदी की कीमत में एक ही दिन में 6,550 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है और इसका भाव 2.15 लाख रुपए प्रति किलो पर आ गया है। खास बात यह है कि चांदी पिछले तीन कारोबारी दिनों में ही करीब 22 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है, जिससे निवेशकों और कारोबारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सोना और चांदी दोनों में हाल के दिनों में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जून महीने की शुरुआत में सोना जहां करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, वहीं अब इसमें लगभग 16 हजार रुपए की गिरावट आ चुकी है। इसी तरह चांदी का भाव भी महीने की शुरुआत में 2.63 लाख रुपए प्रति किलो था, जो अब घटकर 2.15 लाख रुपए के आसपास पहुंच गया है। यानी सिर्फ एक महीने में चांदी लगभग 48 हजार रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई है।
इस साल की शुरुआत से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कीमतों में उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा दिखाई देता है। वर्ष 2026 की शुरुआत में सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद जनवरी के अंत तक इसमें जोरदार तेजी आई और कीमतें 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। हालांकि इसके बाद बाजार का रुख बदला और लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया। वर्तमान कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 36 हजार रुपए तक नीचे आ चुका है। चांदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही है। पिछले वर्ष के अंत में चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त उछाल आया और कीमत 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जाता है। लेकिन उसके बाद बाजार में आई कमजोरी ने चांदी की चमक फीकी कर दी। करीब पांच महीनों के भीतर ही चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 1.70 लाख रुपए प्रति किलो तक टूट चुकी है। इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों को भी हैरान किया है।
कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक समझ और तनाव में आई कमी को माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में युद्ध और संघर्ष की आशंकाओं के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे थे। सोना और चांदी को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए इनके दाम लगातार बढ़ रहे थे। लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ, निवेशकों ने इन धातुओं से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया। दूसरा महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को माना जा रहा है। हाल के संकेतों से यह संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी मान रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की मांग पर पड़ता है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाने वाली एक अहम वजह बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने पर सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दिखाई देते हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में तेज गिरावट को बढ़ावा दिया है। बड़े फंड हाउस और संस्थागत निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर अपने निवेश का लाभ बुक किया, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी। गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में भी हाल के दिनों में बिकवाली का दबाव देखा गया है। निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षण कम होने से इन फंड्स से पैसा निकलना शुरू हुआ है। इसका असर घरेलू बाजारों में भी दिखाई दे रहा है और कीमतों में गिरावट का एक कारण इसे भी माना जा रहा है।
मौजूदा गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। शादी-विवाह के सीजन और त्योहारों से पहले कीमतों में आई नरमी ग्राहकों को राहत दे सकती है। लेकिन निवेश से पहले बाजार की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी होगा। सोना खरीदते समय ग्राहकों को हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमतों की जांच करना भी जरूरी है। सही जानकारी और सावधानी के साथ किया गया निवेश भविष्य में बेहतर लाभ दे सकता है। घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक नीतियों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा तय करेंगी।
