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महिला को कुचलने के बाद फिर बेकाबू हुआ लोनर हाथी, दो मकान तोड़े, ग्रामीणों में दहशत
कोरबा,(छ.ग.)
कटघोरा वनमंडल में लगातार उत्पात मचा रहा झुंड से बिछड़ा हाथी, वन विभाग ड्रोन से कर रहा निगरानी; 27 हाथियों का दल भी बढ़ा रहा चिंता।
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में एक लोनर हाथी की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सरगुजा वनमंडल से भटककर आए इस हाथी ने बीते कुछ दिनों में लगातार कई घटनाओं को अंजाम दिया है। मंगलवार को एक बुजुर्ग महिला की जान लेने के बाद अब हाथी ने बुधवार रात दो मकानों को नुकसान पहुंचाकर इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। वन विभाग लगातार उसकी निगरानी कर रहा है, लेकिन हाथी की अनिश्चित गतिविधियों के कारण आसपास के गांवों के लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। यह लोनर हाथी सरगुजा वनमंडल से निकलकर केंदई रेंज के जंगलों में पहुंचा था। वन अधिकारियों के मुताबिक, झुंड से अलग होने के बाद हाथी का व्यवहार आक्रामक हो गया है। क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद से ही वह लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है और मकानों तथा फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। शुरुआती दिनों में उसने एक ग्रामीण के मकान को क्षतिग्रस्त किया था, लेकिन बाद की घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया।मंगलवार को पतुरियाडांड क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना हुई थी। जंगल की ओर गई एक वृद्ध महिला अचानक हाथी के सामने आ गई। बताया जा रहा है कि हाथी ने महिला पर हमला कर दिया और उसे पैरों तले कुचल दिया। घटना इतनी अचानक हुई कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की थी।
महिला की मौत के अगले ही दिन हाथी ने फिर उत्पात मचाया। बुधवार देर रात वह मदनपुर गांव के आश्रित मोहल्ला करैहापारा पहुंच गया। रात के सन्नाटे में हाथी के गांव में प्रवेश करने से लोगों में हड़कंप मच गया। हाथी ने सबसे पहले तुलेश्वर सिंह गोंड़ के मकान को निशाना बनाया और घर के बाहरी हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद वह शांति बाई के घर की ओर बढ़ा और वहां भी तोड़फोड़ की। मकानों को नुकसान पहुंचने से परिवारों को आर्थिक क्षति हुई है, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी की चिंघाड़ और घर टूटने की आवाज सुनकर परिवारों की नींद खुल गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए घर के सदस्य तुरंत एक सुरक्षित कमरे में छिप गए। यदि वे समय रहते सतर्क नहीं होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। कई ग्रामीण पूरी रात जागते रहे और हाथी के गांव से बाहर जाने का इंतजार करते रहे।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पटाखे फोड़े और शोर मचाकर हाथी को गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि हाथी फिलहाल पुटा जंगल क्षेत्र में मौजूद है, लेकिन उसकी गतिविधियां लगातार बदल रही हैं, इसलिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है। वन विभाग ने हाथी की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। अधिकारियों के अनुसार मैदानी अमले के साथ ड्रोन कैमरों की मदद से हाथी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ड्रोन के जरिए उसके मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि समय रहते आसपास के गांवों को अलर्ट किया जा सके। विभाग का मानना है कि इससे किसी भी संभावित खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
हाथी की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने गांव-गांव मुनादी कराई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से जंगल की ओर न जाएं और विशेष रूप से रात के समय घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरतें। अधिकारियों ने लोगों को अकेले जंगल या खेतों में जाने से भी मना किया है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। इधर, क्षेत्र में पहले से मौजूद 27 हाथियों का एक बड़ा दल भी वन विभाग की चिंता बढ़ा रहा है। जटगा रेंज के मेढ़उड़ पहाड़ क्षेत्र में डेरा डाले इस दल में से करीब आधा दर्जन हाथी हाल ही में पहाड़ से नीचे उतर आए थे। हालांकि इन हाथियों ने अभी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी है, लेकिन उनकी मौजूदगी के कारण वन विभाग लगातार अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। जंगलों के सिकुड़ते दायरे और भोजन की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आना अब सामान्य होता जा रहा है। ऐसे मामलों में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने के साथ-साथ वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि किसी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
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महिला को कुचलने के बाद फिर बेकाबू हुआ लोनर हाथी, दो मकान तोड़े, ग्रामीणों में दहशत
कोरबा,(छ.ग.)
कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल में एक लोनर हाथी की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सरगुजा वनमंडल से भटककर आए इस हाथी ने बीते कुछ दिनों में लगातार कई घटनाओं को अंजाम दिया है। मंगलवार को एक बुजुर्ग महिला की जान लेने के बाद अब हाथी ने बुधवार रात दो मकानों को नुकसान पहुंचाकर इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। वन विभाग लगातार उसकी निगरानी कर रहा है, लेकिन हाथी की अनिश्चित गतिविधियों के कारण आसपास के गांवों के लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। यह लोनर हाथी सरगुजा वनमंडल से निकलकर केंदई रेंज के जंगलों में पहुंचा था। वन अधिकारियों के मुताबिक, झुंड से अलग होने के बाद हाथी का व्यवहार आक्रामक हो गया है। क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद से ही वह लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है और मकानों तथा फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। शुरुआती दिनों में उसने एक ग्रामीण के मकान को क्षतिग्रस्त किया था, लेकिन बाद की घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया।मंगलवार को पतुरियाडांड क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना हुई थी। जंगल की ओर गई एक वृद्ध महिला अचानक हाथी के सामने आ गई। बताया जा रहा है कि हाथी ने महिला पर हमला कर दिया और उसे पैरों तले कुचल दिया। घटना इतनी अचानक हुई कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की थी।
महिला की मौत के अगले ही दिन हाथी ने फिर उत्पात मचाया। बुधवार देर रात वह मदनपुर गांव के आश्रित मोहल्ला करैहापारा पहुंच गया। रात के सन्नाटे में हाथी के गांव में प्रवेश करने से लोगों में हड़कंप मच गया। हाथी ने सबसे पहले तुलेश्वर सिंह गोंड़ के मकान को निशाना बनाया और घर के बाहरी हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद वह शांति बाई के घर की ओर बढ़ा और वहां भी तोड़फोड़ की। मकानों को नुकसान पहुंचने से परिवारों को आर्थिक क्षति हुई है, हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी की चिंघाड़ और घर टूटने की आवाज सुनकर परिवारों की नींद खुल गई। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए घर के सदस्य तुरंत एक सुरक्षित कमरे में छिप गए। यदि वे समय रहते सतर्क नहीं होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। कई ग्रामीण पूरी रात जागते रहे और हाथी के गांव से बाहर जाने का इंतजार करते रहे।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पटाखे फोड़े और शोर मचाकर हाथी को गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि हाथी फिलहाल पुटा जंगल क्षेत्र में मौजूद है, लेकिन उसकी गतिविधियां लगातार बदल रही हैं, इसलिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है। वन विभाग ने हाथी की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। अधिकारियों के अनुसार मैदानी अमले के साथ ड्रोन कैमरों की मदद से हाथी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ड्रोन के जरिए उसके मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि समय रहते आसपास के गांवों को अलर्ट किया जा सके। विभाग का मानना है कि इससे किसी भी संभावित खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
हाथी की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने गांव-गांव मुनादी कराई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से जंगल की ओर न जाएं और विशेष रूप से रात के समय घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरतें। अधिकारियों ने लोगों को अकेले जंगल या खेतों में जाने से भी मना किया है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। इधर, क्षेत्र में पहले से मौजूद 27 हाथियों का एक बड़ा दल भी वन विभाग की चिंता बढ़ा रहा है। जटगा रेंज के मेढ़उड़ पहाड़ क्षेत्र में डेरा डाले इस दल में से करीब आधा दर्जन हाथी हाल ही में पहाड़ से नीचे उतर आए थे। हालांकि इन हाथियों ने अभी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी है, लेकिन उनकी मौजूदगी के कारण वन विभाग लगातार अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। जंगलों के सिकुड़ते दायरे और भोजन की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आना अब सामान्य होता जा रहा है। ऐसे मामलों में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ग्रामीणों को सतर्क रहने के साथ-साथ वन विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि किसी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
