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लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में कार्रवाई तेज, 67 कोचिंग सेंटरों को नोटिस
Digital Desk
दुर्ग में 62 और बिलासपुर में 5 संस्थानों में मिली सुरक्षा खामियां, एक कोचिंग सेंटर सील; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट पर विशेष फोकस
लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुई भीषण आग की घटना के बाद देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बिलासपुर जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर सामने आए हैं, जहां बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने इसे गंभीर मानते हुए कई संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि एक संस्थान को सील भी कर दिया गया है। दुर्ग जिले में बुधवार रात पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने अचानक निरीक्षण अभियान चलाया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान में शहर और आसपास के प्रमुख कोचिंग सेंटरों की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं फायर एक्सटिंग्विशर की वैधता समाप्त हो चुकी थी तो कहीं उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका उपयोग योग्य तरीके से रखरखाव नहीं किया गया था। सबसे बड़ी चिंता इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था को लेकर सामने आई। जांच में पाया गया कि अधिकांश कोचिंग संस्थानों में वैकल्पिक निकासी मार्ग नहीं थे। कई भवनों में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार था। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में ऐसी व्यवस्था छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यही कारण है कि फायर सेफ्टी विभाग ने 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करते हुए कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं।
दुर्ग जिले में बड़ी संख्या में निजी कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। अनुमान के अनुसार यहां 150 से 200 के बीच प्रमुख कोचिंग सेंटर और ट्यूटोरियल संस्थान चल रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक संस्थान भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में स्थित हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई कोचिंग सेंटरों में छात्रों की संख्या के मुकाबले जगह काफी कम थी। कुछ भवनों में इतनी संकरी सीढ़ियां थीं कि एक समय में केवल एक व्यक्ति ही ऊपर या नीचे जा सकता था। ऐसी स्थिति में किसी दुर्घटना के दौरान छात्रों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण टीम ने छात्रों और संस्थान संचालकों से भी बातचीत की। अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली और यह समझने का प्रयास किया कि संस्थानों में आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्या व्यवस्था है। कई जगह संचालक जांच शुरू होते ही फायर सेफ्टी उपकरणों की व्यवस्था करते दिखाई दिए। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक रूप से उपलब्ध होना भी जरूरी है। दूसरी ओर बिलासपुर में भी नगर निगम, पुलिस और दमकल विभाग की संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। शहर के छह प्रमुख संस्थानों की जांच के दौरान पांच में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। इनमें फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, भवन अनुमति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी खामियां शामिल थीं। अधिकारियों ने सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब देने और कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं।
बिलासपुर में निरीक्षण के दौरान एक कोचिंग सेंटर में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। जांच में पाया गया कि भवन में प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा छात्रों की संख्या के अनुपात में भवन की क्षमता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। फायर सेफ्टी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों का पालन नहीं होने के कारण प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस और भवन संबंधी स्वीकृतियां पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं। कुछ जगहों पर सुरक्षा उपकरणों की संख्या कम थी, जबकि कुछ संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिक रूप से दिखाई गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छात्र सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन कई जगह सुरक्षा मानकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बड़ी संख्या में छात्र रोजाना इन संस्थानों में पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आग, भूकंप या अन्य आपात स्थिति से निपटने की तैयारी बेहद आवश्यक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट से ऐसी संभावित घटनाओं को रोका जा सकता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्था को सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में कार्रवाई तेज, 67 कोचिंग सेंटरों को नोटिस
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लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुई भीषण आग की घटना के बाद देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बिलासपुर जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर सामने आए हैं, जहां बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने इसे गंभीर मानते हुए कई संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि एक संस्थान को सील भी कर दिया गया है। दुर्ग जिले में बुधवार रात पुलिस और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने अचानक निरीक्षण अभियान चलाया। करीब दो घंटे तक चले इस अभियान में शहर और आसपास के प्रमुख कोचिंग सेंटरों की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान अधिकांश संस्थानों में फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं। कहीं फायर एक्सटिंग्विशर की वैधता समाप्त हो चुकी थी तो कहीं उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका उपयोग योग्य तरीके से रखरखाव नहीं किया गया था। सबसे बड़ी चिंता इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था को लेकर सामने आई। जांच में पाया गया कि अधिकांश कोचिंग संस्थानों में वैकल्पिक निकासी मार्ग नहीं थे। कई भवनों में केवल एक ही प्रवेश और निकास द्वार था। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में ऐसी व्यवस्था छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यही कारण है कि फायर सेफ्टी विभाग ने 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी करते हुए कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं।
दुर्ग जिले में बड़ी संख्या में निजी कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। अनुमान के अनुसार यहां 150 से 200 के बीच प्रमुख कोचिंग सेंटर और ट्यूटोरियल संस्थान चल रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक संस्थान भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में स्थित हैं। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई कोचिंग सेंटरों में छात्रों की संख्या के मुकाबले जगह काफी कम थी। कुछ भवनों में इतनी संकरी सीढ़ियां थीं कि एक समय में केवल एक व्यक्ति ही ऊपर या नीचे जा सकता था। ऐसी स्थिति में किसी दुर्घटना के दौरान छात्रों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण टीम ने छात्रों और संस्थान संचालकों से भी बातचीत की। अधिकारियों ने सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली और यह समझने का प्रयास किया कि संस्थानों में आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्या व्यवस्था है। कई जगह संचालक जांच शुरू होते ही फायर सेफ्टी उपकरणों की व्यवस्था करते दिखाई दिए। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक रूप से उपलब्ध होना भी जरूरी है। दूसरी ओर बिलासपुर में भी नगर निगम, पुलिस और दमकल विभाग की संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। शहर के छह प्रमुख संस्थानों की जांच के दौरान पांच में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं। इनमें फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, भवन अनुमति और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी खामियां शामिल थीं। अधिकारियों ने सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब देने और कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं।
बिलासपुर में निरीक्षण के दौरान एक कोचिंग सेंटर में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। जांच में पाया गया कि भवन में प्रवेश और निकास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा छात्रों की संख्या के अनुपात में भवन की क्षमता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। फायर सेफ्टी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों का पालन नहीं होने के कारण प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई संस्थानों के पास आवश्यक लाइसेंस और भवन संबंधी स्वीकृतियां पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं। कुछ जगहों पर सुरक्षा उपकरणों की संख्या कम थी, जबकि कुछ संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिक रूप से दिखाई गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छात्र सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन कई जगह सुरक्षा मानकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बड़ी संख्या में छात्र रोजाना इन संस्थानों में पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में आग, भूकंप या अन्य आपात स्थिति से निपटने की तैयारी बेहद आवश्यक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट से ऐसी संभावित घटनाओं को रोका जा सकता है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा जांच की जाएगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संस्था को सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
