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वेदांता की नई पहल ‘विविध वर्स’: बदलते भारत की अनसुनी कहानियों को मिला नया मंच
नई दिल्ली।
संस्कृति, उद्यमिता, खेल, एआई और जमीनी भारत की प्रेरक आवाज़ों को जोड़ने वाली अनूठी द्विभाषी पत्रिका लॉन्च
भारत की अग्रणी प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने देश की बदलती सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक धारा को नई अभिव्यक्ति देने के उद्देश्य से अपनी प्रीमियम द्विभाषी पत्रिका ‘विविध वर्स’ लॉन्च की है। यह लिमिटेड एडिशन कलेक्टिबल मैगज़ीन भारत की उन कहानियों को सामने लाने का प्रयास है, जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से दूर रह जाती हैं, लेकिन देश के बदलते स्वरूप को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
‘विविध वर्स’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की विविध सोच, संघर्ष, आकांक्षाओं और रचनात्मकता का दस्तावेज़ है। इसमें संस्कृति, सार्वजनिक नीति, खेल, तकनीक, स्टार्टअप, एआई, शिक्षा, संगीत और जमीनी उद्यमिता जैसे विषयों पर गहन और प्रेरक सामग्री प्रस्तुत की गई है।
तेजी से डिजिटल होती दुनिया में यह पत्रिका पाठकों को एक ऐसा अनुभव देने का प्रयास करती है, जहां शब्द केवल सूचना नहीं देते, बल्कि सोचने और महसूस करने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रिंट और डिजिटल दोनों स्वरूपों में उपलब्ध यह विशेष संस्करण भारत के गांवों, छोटे शहरों, स्टार्टअप गलियारों, फैक्ट्री परिसरों और सांस्कृतिक मंचों से उभरती आवाज़ों को एक साथ जोड़ता है।
अनिल अग्रवाल बोले – “राष्ट्र निर्माण केवल उद्योग नहीं, अवसर निर्माण भी है”
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ‘विविध वर्स’ को भारत की सामूहिक ऊर्जा और संभावनाओं का मंच बताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को अवसर देना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कहानियों में समाज की सोच बदलने और भविष्य को दिशा देने की ताकत होती है और यही सोच इस पत्रिका के पीछे प्रेरणा बनी। उनके अनुसार, यह पहल उन करोड़ों भारतीयों को समर्पित है, जो अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश को आगे बढ़ा रहे हैं।
समकालीन भारत की प्रेरक हस्तियों के विचार शामिल
‘विविध वर्स’ के पहले संस्करण में देश के कई प्रतिष्ठित और प्रेरक व्यक्तित्वों के विचारों को शामिल किया गया है।
बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बदलती सामाजिक संस्कृति और जीवन के अनुभवों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “सिर्फ लाइक्स नहीं, जीवन के वास्तविक अनुभव जरूरी हैं।”
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान और समान अवसरों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत का संविधान हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर देता है।
पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने खेलों में अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता को सफलता की कुंजी बताया।
स्टार्टअप जगत के युवा उद्यमी राहुल गर्ग ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र और तकनीकी बदलावों पर चर्चा करते हुए फैक्ट्री संस्कृति में आधुनिक बदलाव की आवश्यकता बताई।
एआई, संगीत, शिक्षा और जमीनी भारत पर विशेष फोकस
पत्रिका में केवल प्रसिद्ध चेहरों के इंटरव्यू ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा में तकनीक की भूमिका, पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियां, लोक संस्कृति, संगीत नवाचार और भारत के उभरते सामाजिक बदलावों पर भी विशेष लेख शामिल किए गए हैं।
‘धुरंधर’ फिल्म से जुड़े संगीत कलाकार फ़्लिपेराची, लोकेश आनंद और डीजे आउटलॉ ने भारतीय संगीत की बदलती वैश्विक पहचान और युवाओं की नई पसंद पर अपने विचार साझा किए हैं।
संग्रहणीय प्रस्तुति बनी खास आकर्षण
‘विविध वर्स’ की सबसे खास बात इसकी प्रीमियम और संग्रहणीय प्रस्तुति है। पत्रिका के प्रत्येक संस्करण को विशेष डिजाइन, आकर्षक विजुअल्स और सीमित संस्करण की फ्रेम की गई कलाकृतियों के साथ तैयार किया गया है, जिससे यह केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, बल्कि लंबे समय तक संजोकर रखने योग्य सांस्कृतिक दस्तावेज़ बन जाती है।
बदलते भारत की नई पहचान बनेगी ‘विविध वर्स’
वेदांता लिमिटेड का मानना है कि आने वाले समय में ‘विविध वर्स’ भारत की बदलती सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। कंपनी के अनुसार, इसके आगामी संस्करणों में भी देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रेरक व्यक्तित्वों, नवाचारकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों की कहानियों को प्रमुखता दी जाएगी।
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वेदांता की नई पहल ‘विविध वर्स’: बदलते भारत की अनसुनी कहानियों को मिला नया मंच
नई दिल्ली।
भारत की अग्रणी प्राकृतिक संसाधन कंपनी वेदांता लिमिटेड ने देश की बदलती सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक धारा को नई अभिव्यक्ति देने के उद्देश्य से अपनी प्रीमियम द्विभाषी पत्रिका ‘विविध वर्स’ लॉन्च की है। यह लिमिटेड एडिशन कलेक्टिबल मैगज़ीन भारत की उन कहानियों को सामने लाने का प्रयास है, जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से दूर रह जाती हैं, लेकिन देश के बदलते स्वरूप को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
‘विविध वर्स’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की विविध सोच, संघर्ष, आकांक्षाओं और रचनात्मकता का दस्तावेज़ है। इसमें संस्कृति, सार्वजनिक नीति, खेल, तकनीक, स्टार्टअप, एआई, शिक्षा, संगीत और जमीनी उद्यमिता जैसे विषयों पर गहन और प्रेरक सामग्री प्रस्तुत की गई है।
तेजी से डिजिटल होती दुनिया में यह पत्रिका पाठकों को एक ऐसा अनुभव देने का प्रयास करती है, जहां शब्द केवल सूचना नहीं देते, बल्कि सोचने और महसूस करने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रिंट और डिजिटल दोनों स्वरूपों में उपलब्ध यह विशेष संस्करण भारत के गांवों, छोटे शहरों, स्टार्टअप गलियारों, फैक्ट्री परिसरों और सांस्कृतिक मंचों से उभरती आवाज़ों को एक साथ जोड़ता है।
अनिल अग्रवाल बोले – “राष्ट्र निर्माण केवल उद्योग नहीं, अवसर निर्माण भी है”
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने ‘विविध वर्स’ को भारत की सामूहिक ऊर्जा और संभावनाओं का मंच बताते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को अवसर देना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कहानियों में समाज की सोच बदलने और भविष्य को दिशा देने की ताकत होती है और यही सोच इस पत्रिका के पीछे प्रेरणा बनी। उनके अनुसार, यह पहल उन करोड़ों भारतीयों को समर्पित है, जो अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश को आगे बढ़ा रहे हैं।
समकालीन भारत की प्रेरक हस्तियों के विचार शामिल
‘विविध वर्स’ के पहले संस्करण में देश के कई प्रतिष्ठित और प्रेरक व्यक्तित्वों के विचारों को शामिल किया गया है।
बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बदलती सामाजिक संस्कृति और जीवन के अनुभवों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि “सिर्फ लाइक्स नहीं, जीवन के वास्तविक अनुभव जरूरी हैं।”
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान और समान अवसरों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत का संविधान हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर देता है।
पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने खेलों में अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता को सफलता की कुंजी बताया।
स्टार्टअप जगत के युवा उद्यमी राहुल गर्ग ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र और तकनीकी बदलावों पर चर्चा करते हुए फैक्ट्री संस्कृति में आधुनिक बदलाव की आवश्यकता बताई।
एआई, संगीत, शिक्षा और जमीनी भारत पर विशेष फोकस
पत्रिका में केवल प्रसिद्ध चेहरों के इंटरव्यू ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा में तकनीक की भूमिका, पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियां, लोक संस्कृति, संगीत नवाचार और भारत के उभरते सामाजिक बदलावों पर भी विशेष लेख शामिल किए गए हैं।
‘धुरंधर’ फिल्म से जुड़े संगीत कलाकार फ़्लिपेराची, लोकेश आनंद और डीजे आउटलॉ ने भारतीय संगीत की बदलती वैश्विक पहचान और युवाओं की नई पसंद पर अपने विचार साझा किए हैं।
संग्रहणीय प्रस्तुति बनी खास आकर्षण
‘विविध वर्स’ की सबसे खास बात इसकी प्रीमियम और संग्रहणीय प्रस्तुति है। पत्रिका के प्रत्येक संस्करण को विशेष डिजाइन, आकर्षक विजुअल्स और सीमित संस्करण की फ्रेम की गई कलाकृतियों के साथ तैयार किया गया है, जिससे यह केवल पढ़ने की सामग्री नहीं, बल्कि लंबे समय तक संजोकर रखने योग्य सांस्कृतिक दस्तावेज़ बन जाती है।
बदलते भारत की नई पहचान बनेगी ‘विविध वर्स’
वेदांता लिमिटेड का मानना है कि आने वाले समय में ‘विविध वर्स’ भारत की बदलती सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। कंपनी के अनुसार, इसके आगामी संस्करणों में भी देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रेरक व्यक्तित्वों, नवाचारकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों की कहानियों को प्रमुखता दी जाएगी।
