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नए इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी: 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा सरल टैक्स सिस्टम
बिजनेस न्यूज
नियम 511 से घटकर 333, फॉर्म 399 से 190 हुए; 22 फरवरी तक आम जनता दे सकेगी सुझाव
आयकर विभाग ने ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार का उद्देश्य टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाना और नियमों की जटिलता कम करना है। प्रस्तावित ढांचे में मौजूदा 511 नियमों को घटाकर 333 कर दिया गया है, जबकि फॉर्म की संख्या 399 से कम होकर 190 रह जाएगी। यह कदम कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, कई अप्रासंगिक प्रावधान हटाए गए हैं और समान प्रकृति के नियमों को समेकित किया गया है। इससे टैक्स प्रशासन में स्पष्टता आएगी और करदाताओं के अनुपालन का बोझ घटेगा। बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नियमों और फॉर्म को सरल बनाने की घोषणा की थी, जिसके तहत अब फॉर्म की भाषा को अधिक सहज बनाया गया है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने मसौदा सार्वजनिक डोमेन में जारी कर दिया है। करदाता, उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों को 22 फरवरी 2026 तक सुझाव देने का अवसर दिया गया है। विभाग का कहना है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। यह प्रक्रिया नीति निर्माण में सहभागिता बढ़ाने की पहल के रूप में देखी जा रही है।
प्रस्तावित नियमों में टैक्स ‘ईयर’ की अवधारणा को प्रमुखता दी गई है, जबकि फॉर्म और प्रक्रियाओं को संक्षिप्त किया गया है। क्रिप्टो एसेट्स को अनडिस्क्लोज्ड आय की श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास के रूप में सामने आया है। साथ ही, वेतन से संबंधित कटौतियों—जैसे स्टैंडर्ड डिडक्शन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट—को एकीकृत ढांचे में प्रस्तुत किया गया है। टैक्सपेयर्स चार्टर को भी विधायी ढांचे में शामिल किया गया है, जिससे करदाताओं के अधिकारों और कर अधिकारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जा सके।
प्रस्तावित नियम व्यापक कर सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसमें नए आयकर विधेयक के जरिए छह दशक पुराने कानून को प्रतिस्थापित करने की तैयारी है।
कर विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों की संख्या घटने और फॉर्म सरल होने से स्व-फाइलिंग को बढ़ावा मिलेगा और अनुपालन लागत कम होगी। डिजिटल लेनदेन पर निगरानी बढ़ने से कर आधार का विस्तार भी संभव है।
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