लगातार छठे महीने बढ़ी महंगाई, जून में रिटेल इन्फ्लेशन 4.38% पहुंचा; खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

बिजनेस डेस्क

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आलू, अदरक और खाद्य पदार्थों की कीमतों ने बढ़ाया दबाव, RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर पहुंची महंगाई; ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता

देश में आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। जून 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी 2026 में महंगाई दर 2.74 प्रतिशत थी, जिसके बाद हर महीने इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली। जून के आंकड़ों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल रही हैं।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 5.32 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 4.38 प्रतिशत थी। खास तौर पर आलू, अदरक और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इस दौरान सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में कुछ नरमी भी देखने को मिली, जिससे गैर-खाद्य श्रेणी में थोड़ी राहत मिली।

लगातार छह महीने बढ़ी महंगाई

जनवरी 2026 से महंगाई लगातार ऊपर की ओर बढ़ रही है। जनवरी में 2.74 प्रतिशत, फरवरी में 3.21 प्रतिशत, मार्च में 3.40 प्रतिशत, अप्रैल में 3.48 प्रतिशत, मई में 3.93 प्रतिशत और अब जून में यह बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पहली बार है जब जनवरी 2025 के बाद महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्य लक्ष्य (Midpoint Target) से ऊपर पहुंची है।

हालांकि यह दर अभी भी RBI के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई ने आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है।

खाद्य महंगाई बनी सबसे बड़ी वजह

जून महीने में सबसे अधिक असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का रहा। आलू, अदरक और कई अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री महंगी होने से फूड इन्फ्लेशन 5.32 प्रतिशत तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता, आपूर्ति संबंधी चुनौतियां और परिवहन लागत में वृद्धि भी खाद्य महंगाई को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।

दूसरी ओर, सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल महंगाई पर थोड़ा नियंत्रण बना रहा। लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं के महंगे होने का असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका

महंगाई के लगातार बढ़ने से अब यह संभावना भी बढ़ गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बदलाव पर विचार कर सकता है। यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है।

ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई पर पड़ सकता है। साथ ही उद्योगों और कारोबार की लागत बढ़ने से आर्थिक विकास की गति भी प्रभावित हो सकती है।

RBI पहले ही जता चुका है चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान महंगाई के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। RBI ने इसके पीछे अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया था।

यदि मानसून सामान्य नहीं रहता या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

नए महंगाई इंडेक्स का भी असर

सरकार ने जनवरी 2026 से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला लागू की है, जिसका आधार वर्ष 2024 रखा गया है। पहले आधार वर्ष 2012 था। नए इंडेक्स में लोगों के खर्च करने के तरीके और उपभोग की आदतों के अनुसार विभिन्न वस्तुओं का वेटेज बदला गया है।

नई व्यवस्था में आवश्यक वस्तुओं को अधिक महत्व दिया गया है, जबकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले कुछ खाद्य उत्पादों का वेटेज कम किया गया है। यही वजह है कि पुराने और नए आंकड़ों की सीधी तुलना संभव नहीं है।

महंगाई का आम आदमी पर असर

महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है। रसोई का बजट बढ़ जाता है, घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ती है और बचत प्रभावित होती है। यदि खाद्य पदार्थ लगातार महंगे होते रहे तो परिवारों के लिए मासिक खर्चों का प्रबंधन और कठिन हो सकता है।

इसके अलावा, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं की लागत भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है, जिससे समग्र जीवनयापन महंगा हो जाता है।

महंगाई कैसे तय होती है?

महंगाई मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती है। जब किसी वस्तु की मांग बढ़ जाती है लेकिन उसकी आपूर्ति पर्याप्त नहीं होती, तो उसकी कीमतें बढ़ने लगती हैं। वहीं यदि आपूर्ति अधिक और मांग कम हो, तो कीमतों में गिरावट आती है।

सरकार और रिजर्व बैंक दोनों मिलकर ऐसी नीतियां बनाते हैं जिनसे कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके और आर्थिक संतुलन बना रहे।

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13 Jul 2026 By Vaishnavi.J

लगातार छठे महीने बढ़ी महंगाई, जून में रिटेल इन्फ्लेशन 4.38% पहुंचा; खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

बिजनेस डेस्क

देश में आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। जून 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी 2026 में महंगाई दर 2.74 प्रतिशत थी, जिसके बाद हर महीने इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली। जून के आंकड़ों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के बजट पर असर डाल रही हैं।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़कर 5.32 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 4.38 प्रतिशत थी। खास तौर पर आलू, अदरक और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इस दौरान सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में कुछ नरमी भी देखने को मिली, जिससे गैर-खाद्य श्रेणी में थोड़ी राहत मिली।

लगातार छह महीने बढ़ी महंगाई

जनवरी 2026 से महंगाई लगातार ऊपर की ओर बढ़ रही है। जनवरी में 2.74 प्रतिशत, फरवरी में 3.21 प्रतिशत, मार्च में 3.40 प्रतिशत, अप्रैल में 3.48 प्रतिशत, मई में 3.93 प्रतिशत और अब जून में यह बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पहली बार है जब जनवरी 2025 के बाद महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्य लक्ष्य (Midpoint Target) से ऊपर पहुंची है।

हालांकि यह दर अभी भी RBI के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई ने आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है।

खाद्य महंगाई बनी सबसे बड़ी वजह

जून महीने में सबसे अधिक असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का रहा। आलू, अदरक और कई अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री महंगी होने से फूड इन्फ्लेशन 5.32 प्रतिशत तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता, आपूर्ति संबंधी चुनौतियां और परिवहन लागत में वृद्धि भी खाद्य महंगाई को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।

दूसरी ओर, सोने और चांदी के आभूषणों की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल महंगाई पर थोड़ा नियंत्रण बना रहा। लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं के महंगे होने का असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका

महंगाई के लगातार बढ़ने से अब यह संभावना भी बढ़ गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बदलाव पर विचार कर सकता है। यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है।

ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई पर पड़ सकता है। साथ ही उद्योगों और कारोबार की लागत बढ़ने से आर्थिक विकास की गति भी प्रभावित हो सकती है।

RBI पहले ही जता चुका है चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान महंगाई के अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। RBI ने इसके पीछे अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया था।

यदि मानसून सामान्य नहीं रहता या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

नए महंगाई इंडेक्स का भी असर

सरकार ने जनवरी 2026 से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला लागू की है, जिसका आधार वर्ष 2024 रखा गया है। पहले आधार वर्ष 2012 था। नए इंडेक्स में लोगों के खर्च करने के तरीके और उपभोग की आदतों के अनुसार विभिन्न वस्तुओं का वेटेज बदला गया है।

नई व्यवस्था में आवश्यक वस्तुओं को अधिक महत्व दिया गया है, जबकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले कुछ खाद्य उत्पादों का वेटेज कम किया गया है। यही वजह है कि पुराने और नए आंकड़ों की सीधी तुलना संभव नहीं है।

महंगाई का आम आदमी पर असर

महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है। रसोई का बजट बढ़ जाता है, घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ती है और बचत प्रभावित होती है। यदि खाद्य पदार्थ लगातार महंगे होते रहे तो परिवारों के लिए मासिक खर्चों का प्रबंधन और कठिन हो सकता है।

इसके अलावा, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं की लागत भी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है, जिससे समग्र जीवनयापन महंगा हो जाता है।

महंगाई कैसे तय होती है?

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सरकार और रिजर्व बैंक दोनों मिलकर ऐसी नीतियां बनाते हैं जिनसे कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके और आर्थिक संतुलन बना रहे।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/inflation-increased-for-the-sixth-consecutive-month-retail-inflation-reached/article-58673

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