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भौमवती अमावस्या 2026: कब है शुभ तिथि, जानें पूजा-विधि, महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय
धर्म डेस्क
मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य, हनुमान जी की पूजा और पीपल वृक्ष की परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है।
भौमवती अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तब उसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। 'भौम' का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है और मंगलवार भगवान हनुमान तथा मंगल देव को समर्पित होता है। ऐसे में जब अमावस्या और मंगलवार का संयोग बनता है तो इसे विशेष फलदायी योग माना जाता है।
साल 2026 की भौमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और विशेष पूजा-अर्चना का महत्वपूर्ण अवसर लेकर आएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से पितृ दोष, ग्रह दोष और जीवन की कई बाधाओं से राहत मिल सकती है।
कब है भौमवती अमावस्या 2026?
पंचांग के अनुसार, 2026 में भौमवती अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ेगी। इस दिन सूर्योदय से लेकर अमावस्या तिथि समाप्त होने तक स्नान, दान, तर्पण और पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिले जल से स्नान कर पूजा की शुरुआत करते हैं।
भौमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलने की मान्यता है। वहीं मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह और भगवान हनुमान से होने के कारण इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा भी की जाती है।
कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति, परिवार में सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर दिनभर भगवान का स्मरण करते हैं और शाम को पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।
इस दिन कैसे करें पूजा?
भौमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
इसके बाद पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और यदि संभव हो तो किसी नदी या तालाब के किनारे तर्पण करें। घर में पीपल के वृक्ष की पूजा कर उसकी सात या 108 परिक्रमा करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाना और काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
भौमवती अमावस्या पर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र, काला तिल, गुड़, चावल, अनाज, फल, जल, छाता या अन्य आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंद लोगों को दान करते हैं।
गाय, कौवे, कुत्ते और अन्य जीव-जंतुओं को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना जाता है। कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन करवाते हैं और मंदिरों में सेवा कार्य करते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति की मान्यता
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए अमावस्या का दिन विशेष माना जाता है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और पूर्वजों का स्मरण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार इन अनुष्ठानों का पालन करते हैं।
मंगल ग्रह से जुड़े उपाय
चूंकि भौमवती अमावस्या मंगलवार को पड़ती है, इसलिए इस दिन मंगल ग्रह से जुड़े उपाय भी किए जाते हैं। कई लोग हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करते हैं। वहीं मसूर की दाल, लाल वस्त्र या तांबे का दान भी शुभ माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इन उपायों से मंगल दोष शांत हो सकता है और साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
क्या करें और क्या न करें?
भौमवती अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों, दान-पुण्य और पूजा-पाठ को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। इस दिन क्रोध, विवाद, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और बुजुर्गों का सम्मान करना शुभ माना जाता है।
यदि व्रत रख रहे हैं तो पूरे दिन सात्विक भोजन का पालन करें और नशे या तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें। घर और मंदिर की साफ-सफाई कर सकारात्मक वातावरण बनाए रखना भी शुभ माना जाता है।
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भौमवती अमावस्या 2026: कब है शुभ तिथि, जानें पूजा-विधि, महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय
धर्म डेस्क
भौमवती अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब अमावस्या तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तब उसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। 'भौम' का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है और मंगलवार भगवान हनुमान तथा मंगल देव को समर्पित होता है। ऐसे में जब अमावस्या और मंगलवार का संयोग बनता है तो इसे विशेष फलदायी योग माना जाता है।
साल 2026 की भौमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और विशेष पूजा-अर्चना का महत्वपूर्ण अवसर लेकर आएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से पितृ दोष, ग्रह दोष और जीवन की कई बाधाओं से राहत मिल सकती है।
कब है भौमवती अमावस्या 2026?
पंचांग के अनुसार, 2026 में भौमवती अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ेगी। इस दिन सूर्योदय से लेकर अमावस्या तिथि समाप्त होने तक स्नान, दान, तर्पण और पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिले जल से स्नान कर पूजा की शुरुआत करते हैं।
भौमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलने की मान्यता है। वहीं मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह और भगवान हनुमान से होने के कारण इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा भी की जाती है।
कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति, परिवार में सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। कई लोग इस दिन व्रत रखकर दिनभर भगवान का स्मरण करते हैं और शाम को पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं।
इस दिन कैसे करें पूजा?
भौमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
इसके बाद पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और यदि संभव हो तो किसी नदी या तालाब के किनारे तर्पण करें। घर में पीपल के वृक्ष की पूजा कर उसकी सात या 108 परिक्रमा करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाना और काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
दान-पुण्य का विशेष महत्व
भौमवती अमावस्या पर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल प्रदान करता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र, काला तिल, गुड़, चावल, अनाज, फल, जल, छाता या अन्य आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंद लोगों को दान करते हैं।
गाय, कौवे, कुत्ते और अन्य जीव-जंतुओं को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना जाता है। कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन करवाते हैं और मंदिरों में सेवा कार्य करते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति की मान्यता
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए अमावस्या का दिन विशेष माना जाता है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और पूर्वजों का स्मरण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और विश्वास के अनुसार इन अनुष्ठानों का पालन करते हैं।
मंगल ग्रह से जुड़े उपाय
चूंकि भौमवती अमावस्या मंगलवार को पड़ती है, इसलिए इस दिन मंगल ग्रह से जुड़े उपाय भी किए जाते हैं। कई लोग हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करते हैं। वहीं मसूर की दाल, लाल वस्त्र या तांबे का दान भी शुभ माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इन उपायों से मंगल दोष शांत हो सकता है और साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
क्या करें और क्या न करें?
भौमवती अमावस्या के दिन धार्मिक कार्यों, दान-पुण्य और पूजा-पाठ को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। इस दिन क्रोध, विवाद, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और बुजुर्गों का सम्मान करना शुभ माना जाता है।
यदि व्रत रख रहे हैं तो पूरे दिन सात्विक भोजन का पालन करें और नशे या तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें। घर और मंदिर की साफ-सफाई कर सकारात्मक वातावरण बनाए रखना भी शुभ माना जाता है।
