क्रिप्टो से बना नया आर्थिक गठजोड़: रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने खड़ा किया समानांतर भुगतान नेटवर्क

Digital Desk

On

रिपोर्ट के मुताबिक तीनों देशों ने 2025 में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करीब ₹9.92 लाख करोड़ का लेनदेन किया। प्रतिबंधों से बचने, तेल, हथियार और सैन्य तकनीक के भुगतान के लिए डिजिटल नेटवर्क का तेजी से इस्तेमाल बढ़ा।

दुनिया की पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने डिजिटल मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए एक वैकल्पिक भुगतान तंत्र विकसित कर लिया है। क्रिप्टो लेनदेन पर नजर रखने वाली संस्था की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन देशों ने वर्ष 2025 के दौरान लगभग 9.92 लाख करोड़ रुपये के बराबर क्रिप्टो लेनदेन किए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में करीब आठ गुना अधिक बताया जा रहा है।

यह सिर्फ निवेश या सामान्य व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल, ड्रोन, हथियारों के पुर्जे, सैन्य तकनीक और अन्य रणनीतिक वस्तुओं के भुगतान के लिए भी किया जा रहा है। यही वजह है कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब तेजी से बढ़ते इस डिजिटल नेटवर्क पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार रूस ने अपनी वित्तीय रणनीति को मजबूत करने के लिए रूबल आधारित एक डिजिटल टोकन विकसित किया है, जिसे ए75 टोकन के नाम से जाना जाता है। इस व्यवस्था के तहत रूस के भीतर रूबल जमा कर विदेशों में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सकता है। मई 2025 तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए 11.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें 41 हजार से अधिक खाते सक्रिय बताए गए हैं, जबकि लगभग ढाई लाख डिजिटल ट्रांसफर किए गए हैं। रूस इस मॉडल के जरिए अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बाद रूस ने वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तलाश तेज कर दी थी और अब क्रिप्टोकरेंसी उसकी प्रमुख रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।

दूसरी ओर ईरान ने भी घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों को विदेशी व्यापार और तेल निर्यात के भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बना लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेल बिक्री से मिलने वाली रकम को डिजिटल वॉलेट के जरिए विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाता है। इससे पारंपरिक बैंकिंग चैनलों की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है।

ईरान का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज नोबाइटेक्स देश के डिजिटल मुद्रा कारोबार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके करीब 1.1 करोड़ उपयोगकर्ता बताए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेटवर्क ईरान के लिए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच एक वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था के रूप में उभर रहा है।

उत्तर कोरिया ने क्रिप्टोकरेंसी को अलग ही तरीके से अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां के साइबर हैकर समूहों ने वर्ष 2025 में करीब 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी चोरी की। सबसे बड़ी घटना फरवरी में सामने आई, जब कथित तौर पर लाजारस समूह ने एक बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म से 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल संपत्ति चुरा ली।

अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस साइबर हमले को उत्तर कोरिया समर्थित नेटवर्क से जोड़ा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2016 से अब तक उत्तर कोरिया विभिन्न साइबर हमलों के जरिए अरबों डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी हासिल कर चुका है, जिसका उपयोग मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य उपकरणों की खरीद में किया गया।

इसी बीच चीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क भी तेजी से सक्रिय हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये नेटवर्क प्रतिदिन लगभग 4,200 करोड़ रुपये की अवैध रकम को वैध वित्तीय प्रणाली में बदलने का काम कर रहे हैं। वर्ष 2025 के दौरान इन नेटवर्कों ने लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये की ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में बदलने में भूमिका निभाई। यह नेटवर्क केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रतिबंधित देशों के भुगतान और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को भी प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यही कारण है कि कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां इन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। इसमें बताया गया है कि चीन, उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स ने फर्जी पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार दस्तावेज और डीपफेक इंटरव्यू का इस्तेमाल कर दुनिया के लगभग 40 देशों की क्रिप्टो और टेक्नोलॉजी कंपनियों में रिमोट नौकरियां हासिल कीं। इस नेटवर्क ने पिछले दो वर्षों में लगभग 26,700 करोड़ रुपये जुटाए। कई मामलों में स्थानीय सहयोगियों के जरिए ऐसी कंपनियां बनाई गईं, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक पहचान छिपी रह सके।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
13 Jul 2026 By Vaishnavi.J

क्रिप्टो से बना नया आर्थिक गठजोड़: रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने खड़ा किया समानांतर भुगतान नेटवर्क

Digital Desk

दुनिया की पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस, ईरान और उत्तर कोरिया ने डिजिटल मुद्रा यानी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए एक वैकल्पिक भुगतान तंत्र विकसित कर लिया है। क्रिप्टो लेनदेन पर नजर रखने वाली संस्था की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन देशों ने वर्ष 2025 के दौरान लगभग 9.92 लाख करोड़ रुपये के बराबर क्रिप्टो लेनदेन किए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में करीब आठ गुना अधिक बताया जा रहा है।

यह सिर्फ निवेश या सामान्य व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल, ड्रोन, हथियारों के पुर्जे, सैन्य तकनीक और अन्य रणनीतिक वस्तुओं के भुगतान के लिए भी किया जा रहा है। यही वजह है कि वैश्विक वित्तीय संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों की नजर अब तेजी से बढ़ते इस डिजिटल नेटवर्क पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार रूस ने अपनी वित्तीय रणनीति को मजबूत करने के लिए रूबल आधारित एक डिजिटल टोकन विकसित किया है, जिसे ए75 टोकन के नाम से जाना जाता है। इस व्यवस्था के तहत रूस के भीतर रूबल जमा कर विदेशों में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सकता है। मई 2025 तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए 11.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लेनदेन दर्ज किए जा चुके हैं। इसमें 41 हजार से अधिक खाते सक्रिय बताए गए हैं, जबकि लगभग ढाई लाख डिजिटल ट्रांसफर किए गए हैं। रूस इस मॉडल के जरिए अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के बाद रूस ने वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तलाश तेज कर दी थी और अब क्रिप्टोकरेंसी उसकी प्रमुख रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।

दूसरी ओर ईरान ने भी घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों को विदेशी व्यापार और तेल निर्यात के भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बना लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेल बिक्री से मिलने वाली रकम को डिजिटल वॉलेट के जरिए विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाता है। इससे पारंपरिक बैंकिंग चैनलों की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है।

ईरान का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज नोबाइटेक्स देश के डिजिटल मुद्रा कारोबार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। इसके करीब 1.1 करोड़ उपयोगकर्ता बताए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेटवर्क ईरान के लिए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच एक वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था के रूप में उभर रहा है।

उत्तर कोरिया ने क्रिप्टोकरेंसी को अलग ही तरीके से अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां के साइबर हैकर समूहों ने वर्ष 2025 में करीब 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी चोरी की। सबसे बड़ी घटना फरवरी में सामने आई, जब कथित तौर पर लाजारस समूह ने एक बड़े क्रिप्टो प्लेटफॉर्म से 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल संपत्ति चुरा ली।

अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस साइबर हमले को उत्तर कोरिया समर्थित नेटवर्क से जोड़ा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2016 से अब तक उत्तर कोरिया विभिन्न साइबर हमलों के जरिए अरबों डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी हासिल कर चुका है, जिसका उपयोग मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य उपकरणों की खरीद में किया गया।

इसी बीच चीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क भी तेजी से सक्रिय हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये नेटवर्क प्रतिदिन लगभग 4,200 करोड़ रुपये की अवैध रकम को वैध वित्तीय प्रणाली में बदलने का काम कर रहे हैं। वर्ष 2025 के दौरान इन नेटवर्कों ने लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये की ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में बदलने में भूमिका निभाई। यह नेटवर्क केवल आर्थिक अपराधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रतिबंधित देशों के भुगतान और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को भी प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यही कारण है कि कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां इन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। इसमें बताया गया है कि चीन, उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स ने फर्जी पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार दस्तावेज और डीपफेक इंटरव्यू का इस्तेमाल कर दुनिया के लगभग 40 देशों की क्रिप्टो और टेक्नोलॉजी कंपनियों में रिमोट नौकरियां हासिल कीं। इस नेटवर्क ने पिछले दो वर्षों में लगभग 26,700 करोड़ रुपये जुटाए। कई मामलों में स्थानीय सहयोगियों के जरिए ऐसी कंपनियां बनाई गईं, जिससे कर्मचारियों की वास्तविक पहचान छिपी रह सके।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-economic-alliance-formed-with-crypto-russia-iran-and-north/article-58650

खबरें और भी हैं

'हर दरवाजे पर शीश नवाऊंगा...' कहते ही भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा, मंच पर छलके आंसू

टाप न्यूज

'हर दरवाजे पर शीश नवाऊंगा...' कहते ही भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा, मंच पर छलके आंसू

आशुतोष तिवारी के समर्थन में सभा को संबोधित करते समय रुंध गया गला, सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष...
चुनाव  मध्य प्रदेश 
'हर दरवाजे पर शीश नवाऊंगा...' कहते ही भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा, मंच पर छलके आंसू

लगातार छठे महीने बढ़ी महंगाई, जून में रिटेल इन्फ्लेशन 4.38% पहुंचा; खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

आलू, अदरक और खाद्य पदार्थों की कीमतों ने बढ़ाया दबाव, RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर पहुंची महंगाई; ब्याज दरों...
बिजनेस 
लगातार छठे महीने बढ़ी महंगाई, जून में रिटेल इन्फ्लेशन 4.38% पहुंचा; खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी

रीवा में नशीली कफ सिरप तस्करी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 5 साल से फरार 5 हजार का इनामी आरोपी गिरफ्तार

गढ़ थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर की घेराबंदी, वर्ष 2021 से फरार स्थाई वारंटी को दबोचा, कोर्ट में...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
रीवा में नशीली कफ सिरप तस्करी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 5 साल से फरार 5 हजार का इनामी आरोपी गिरफ्तार

सतना में बाइक चोर पुलिस के हत्थे चढ़ा, चोरी की बाइक और स्कूटी समेत आरोपी गिरफ्तार

सिटी कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर की कार्रवाई, 1.58 लाख रुपये कीमत के दो चोरी के वाहन बरामद,...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
सतना में बाइक चोर पुलिस के हत्थे चढ़ा, चोरी की बाइक और स्कूटी समेत आरोपी गिरफ्तार

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.