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चीनी खरीद पर लिमिट, Blinkit-Swiggy से 2 से 5 किलो तक ही ऑर्डर; दाम ₹65 के पार
Digital Desk
रक्षाबंधन से पहले बढ़ी मांग और कीमतों के बीच ऑनलाइन-ऑफलाइन स्टोर्स ने खरीद सीमित की; सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी
रक्षाबंधन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और त्योहारी मांग के बीच ग्राहकों के लिए बड़ी मात्रा में चीनी खरीदना मुश्किल हो गया है। Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ कुछ बड़े रिटेल स्टोर्स ने भी चुनिंदा चीनी उत्पादों पर खरीद की सीमा लगाई है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म, शहर और ब्रांड के हिसाब से यह लिमिट बदल रही है। 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 26 जुलाई को यह औसत कीमत करीब ₹48.68 प्रति किलो थी। यानी एक महीने में खुदरा भाव लगभग 34% बढ़ा है।
किस प्लेटफॉर्म पर कितनी खरीद?
चीनी की उपलब्धता के हिसाब से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग लिमिट दिखाई दे रही है।
- Blinkit: कुछ इलाकों में एक बार में 5 किलो तक के पैक की अनुमति।
- Swiggy Instamart: कुछ लिस्टिंग पर 1-1 किलो के दो पैकेट तक की सीमा।
- BigBasket: कुछ ब्रांडों पर कुल 5 किलो तक की सीमा।
- Zepto: चुनिंदा उत्पादों पर पैकेट की संख्या सीमित की गई है।
- D-Mart: कुछ स्टोर्स में प्रति बिल 5 किलो तक की सीमा लगाई गई है।
ये सीमाएं सभी जगह एक जैसी नहीं हैं और स्टॉक, ब्रांड तथा स्थानीय स्थिति के अनुसार बदल सकती हैं।
चीनी इतनी महंगी क्यों हुई?
सरकार के मुताबिक हालिया तेजी के पीछे कई कारण हैं। इनमें अनुमान से कम उत्पादन, त्योहारों से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक कीमतों में तेजी और कुछ स्तरों पर जमाखोरी-सट्टेबाजी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT था। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी हालिया तेजी को लेकर कहा है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है और कीमतों में उछाल में स्टॉकिंग तथा सट्टेबाजी की भूमिका हो सकती है।
सरकार ने उठाए ये कदम
कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार की टीमें चीनी मिलों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं। सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 LMT के मुकाबले 10 LMT से ज्यादा होने की उम्मीद जताई गई है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग
रक्षाबंधन के साथ आने वाले गणेश उत्सव, नवरात्रि और दिवाली के दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों में चीनी की खपत बढ़ती है। ऐसे में खुदरा बाजार में कीमत बढ़ने के साथ खरीद की मात्रा पर लगाई गई सीमा उपभोक्ताओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गई है।
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