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रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए
रायपुर,(छ.ग.)
एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी
रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।
फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।
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रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए
रायपुर,(छ.ग.)
रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।
फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।
