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शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक टूटा; Shiprocket की मजबूत एंट्री
Digital Desk
मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव, Shiprocket NSE पर ₹131 और BSE पर ₹129.50 पर लिस्ट
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार 19 अगस्त को कारोबार की शुरुआत से ही दबाव दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 300 अंक टूटकर 76,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक नीचे 24,050 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टरों पर रहा और मेटल तथा ऑटो शेयरों में दबाव ज्यादा देखने को मिला। शुरुआती कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बनी रही। रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को निफ्टी 50 करीब 0.35% नीचे 24,070.65 पर था और सेंसेक्स 0.32% गिरकर 76,991.33 के स्तर पर आ गया था।
निफ्टी के लिए यह लगातार सातवां कमजोर सत्र रहा। पिछले छह कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बुधवार की शुरुआत ने बाजार में सतर्क माहौल को और मजबूत किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 प्रमुख सेक्टरों में से 13 में गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी करीब आधा फीसदी की कमजोरी रही। बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए दबाव बढ़ता है, क्योंकि इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और चालू खाते से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं।
बाजार में गिरावट के बीच मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। पिछले कुछ सत्रों से बाजार में लगातार कमजोरी देखी जा रही है और मंगलवार को भी सेंसेक्स तथा निफ्टी में गिरावट दर्ज हुई थी। ऊंचे क्रूड और वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल नए दांव लगाने से बचते दिख रहे हैं। खासकर उन सेक्टरों में दबाव है जहां लागत, मांग और वैश्विक कमोडिटी कीमतों का असर जल्दी दिखाई देता है। ऑटो शेयरों पर भी बिकवाली का असर रहा। मंगलवार के कारोबार में मारुति सुजुकी समेत कई ऑटो कंपनियों के शेयर दबाव में रहे थे।
मेटल सेक्टर में भी हाल के कारोबार में कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर कमजोर रहे हैं। बाजार में इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का बड़ा दौर निकल चुका है, इसलिए घरेलू स्तर पर नए ट्रिगर सीमित हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। रॉयटर्स ने भी बुधवार की गिरावट के पीछे महंगे क्रूड और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को अहम वजह बताया। इससे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सावधानी बढ़ी है। हालांकि कुछ शेयरों में बाजार की सामान्य दिशा से अलग खरीदारी भी दिखाई दी। ऐसे में पूरे बाजार की तस्वीर एकतरफा नहीं रही, लेकिन इंडेक्स पर दबाव बना हुआ है।
इसी कमजोर बाजार के बीच Shiprocket के शेयरों ने बुधवार को शानदार शुरुआत की। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स कंपनी Shiprocket का IPO शेयर बाजार में 19 अगस्त को सूचीबद्ध हुआ और निवेशकों को लिस्टिंग पर ही करीब 35% का प्रीमियम मिला। कंपनी का IPO प्राइस 97 रुपए प्रति शेयर था। NSE पर शेयर 131 रुपए पर खुला, यानी इश्यू प्राइस से करीब 35.05% ऊपर। BSE पर इसकी लिस्टिंग 129.50 रुपए पर हुई, जो करीब 33.51% का प्रीमियम है। इस तरह जिन निवेशकों को IPO में शेयर अलॉट हुए थे, उन्हें बाजार में कारोबार शुरू होते ही अच्छा लिस्टिंग गेन देखने को मिला। Shiprocket का IPO 12 से 14 अगस्त के बीच खुला था और इसकी प्राइस बैंड 92 से 97 रुपए रखी गई थी।
लिस्टिंग से पहले भी ग्रे मार्केट में शेयर को लेकर मजबूत धारणा बनी हुई थी। कंपनी के IPO का आकार करीब 1,617 करोड़ रुपए था और इश्यू को निवेशकों की ओर से काफी मजबूत प्रतिक्रिया मिली। बाद की ट्रेडिंग में शेयर ने लिस्टिंग प्राइस से भी ऊपर तेजी दिखाई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर एक समय इश्यू प्राइस से करीब 48.6% तक ऊपर पहुंच गया और कंपनी का बाजार मूल्यांकन लगभग 10,010 करोड़ रुपए यानी करीब 1.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया। Shiprocket ई-कॉमर्स कारोबार के लिए लॉजिस्टिक्स और शिपिंग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है और कंपनी को Temasek का समर्थन प्राप्त है।
Shiprocket की मजबूत लिस्टिंग ऐसे दिन हुई है जब व्यापक बाजार में निवेशक दबाव में कारोबार कर रहे हैं। IPO को लेकर पहले से ही काफी उत्साह था और करीब 100 गुना सब्सक्रिप्शन ने इसकी मांग का अंदाजा दिया था। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इश्यू को कुल करीब 99.4 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। संस्थागत निवेशकों की तरफ से भी मजबूत भागीदारी रही। कंपनी IPO से मिली रकम का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट, रणनीतिक अधिग्रहण और नेटवर्क विस्तार जैसे कामों में करने वाली है।
बाजार में कंपनी की लिस्टिंग को इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में टेक और डिजिटल बिजनेस से जुड़ी कंपनियों के IPO को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। दूसरी तरफ शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों में जारी कमजोरी के कारण आज का कारोबार दो अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक तरफ सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में हैं, मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से चिंता बनी हुई है। दूसरी तरफ नए सूचीबद्ध Shiprocket में खरीदारी दिखाई दे रही है। निवेशकों की नजर अब दिन के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी के अगले स्तरों के साथ-साथ Shiprocket के शेयर में लिस्टिंग के बाद की चाल पर बनी हुई है।
शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक टूटा; Shiprocket की मजबूत एंट्री
Digital Desk
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार 19 अगस्त को कारोबार की शुरुआत से ही दबाव दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 300 अंक टूटकर 76,900 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक नीचे 24,050 के स्तर के आसपास पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टरों पर रहा और मेटल तथा ऑटो शेयरों में दबाव ज्यादा देखने को मिला। शुरुआती कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बनी रही। रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को निफ्टी 50 करीब 0.35% नीचे 24,070.65 पर था और सेंसेक्स 0.32% गिरकर 76,991.33 के स्तर पर आ गया था।
निफ्टी के लिए यह लगातार सातवां कमजोर सत्र रहा। पिछले छह कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद बुधवार की शुरुआत ने बाजार में सतर्क माहौल को और मजबूत किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 16 प्रमुख सेक्टरों में से 13 में गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी करीब आधा फीसदी की कमजोरी रही। बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए दबाव बढ़ता है, क्योंकि इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और चालू खाते से जुड़े संकेत प्रभावित हो सकते हैं।
बाजार में गिरावट के बीच मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। पिछले कुछ सत्रों से बाजार में लगातार कमजोरी देखी जा रही है और मंगलवार को भी सेंसेक्स तथा निफ्टी में गिरावट दर्ज हुई थी। ऊंचे क्रूड और वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल नए दांव लगाने से बचते दिख रहे हैं। खासकर उन सेक्टरों में दबाव है जहां लागत, मांग और वैश्विक कमोडिटी कीमतों का असर जल्दी दिखाई देता है। ऑटो शेयरों पर भी बिकवाली का असर रहा। मंगलवार के कारोबार में मारुति सुजुकी समेत कई ऑटो कंपनियों के शेयर दबाव में रहे थे।
मेटल सेक्टर में भी हाल के कारोबार में कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर कमजोर रहे हैं। बाजार में इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का बड़ा दौर निकल चुका है, इसलिए घरेलू स्तर पर नए ट्रिगर सीमित हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। रॉयटर्स ने भी बुधवार की गिरावट के पीछे महंगे क्रूड और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को अहम वजह बताया। इससे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सावधानी बढ़ी है। हालांकि कुछ शेयरों में बाजार की सामान्य दिशा से अलग खरीदारी भी दिखाई दी। ऐसे में पूरे बाजार की तस्वीर एकतरफा नहीं रही, लेकिन इंडेक्स पर दबाव बना हुआ है।
इसी कमजोर बाजार के बीच Shiprocket के शेयरों ने बुधवार को शानदार शुरुआत की। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स कंपनी Shiprocket का IPO शेयर बाजार में 19 अगस्त को सूचीबद्ध हुआ और निवेशकों को लिस्टिंग पर ही करीब 35% का प्रीमियम मिला। कंपनी का IPO प्राइस 97 रुपए प्रति शेयर था। NSE पर शेयर 131 रुपए पर खुला, यानी इश्यू प्राइस से करीब 35.05% ऊपर। BSE पर इसकी लिस्टिंग 129.50 रुपए पर हुई, जो करीब 33.51% का प्रीमियम है। इस तरह जिन निवेशकों को IPO में शेयर अलॉट हुए थे, उन्हें बाजार में कारोबार शुरू होते ही अच्छा लिस्टिंग गेन देखने को मिला। Shiprocket का IPO 12 से 14 अगस्त के बीच खुला था और इसकी प्राइस बैंड 92 से 97 रुपए रखी गई थी।
लिस्टिंग से पहले भी ग्रे मार्केट में शेयर को लेकर मजबूत धारणा बनी हुई थी। कंपनी के IPO का आकार करीब 1,617 करोड़ रुपए था और इश्यू को निवेशकों की ओर से काफी मजबूत प्रतिक्रिया मिली। बाद की ट्रेडिंग में शेयर ने लिस्टिंग प्राइस से भी ऊपर तेजी दिखाई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शेयर एक समय इश्यू प्राइस से करीब 48.6% तक ऊपर पहुंच गया और कंपनी का बाजार मूल्यांकन लगभग 10,010 करोड़ रुपए यानी करीब 1.05 अरब डॉलर तक पहुंच गया। Shiprocket ई-कॉमर्स कारोबार के लिए लॉजिस्टिक्स और शिपिंग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है और कंपनी को Temasek का समर्थन प्राप्त है।
Shiprocket की मजबूत लिस्टिंग ऐसे दिन हुई है जब व्यापक बाजार में निवेशक दबाव में कारोबार कर रहे हैं। IPO को लेकर पहले से ही काफी उत्साह था और करीब 100 गुना सब्सक्रिप्शन ने इसकी मांग का अंदाजा दिया था। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इश्यू को कुल करीब 99.4 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। संस्थागत निवेशकों की तरफ से भी मजबूत भागीदारी रही। कंपनी IPO से मिली रकम का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट, रणनीतिक अधिग्रहण और नेटवर्क विस्तार जैसे कामों में करने वाली है।
बाजार में कंपनी की लिस्टिंग को इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में टेक और डिजिटल बिजनेस से जुड़ी कंपनियों के IPO को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। दूसरी तरफ शेयर बाजार के मुख्य सूचकांकों में जारी कमजोरी के कारण आज का कारोबार दो अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक तरफ सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में हैं, मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली है और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से चिंता बनी हुई है। दूसरी तरफ नए सूचीबद्ध Shiprocket में खरीदारी दिखाई दे रही है। निवेशकों की नजर अब दिन के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी के अगले स्तरों के साथ-साथ Shiprocket के शेयर में लिस्टिंग के बाद की चाल पर बनी हुई है।
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