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पेट्रोल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स खत्म, डीजल और ATF पर भी राहत
Digital Desk
केंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में बदलाव किया, 14 अगस्त से नई दरें लागू; डीजल पर ₹24 और ATF पर ₹19.5 प्रति लीटर शुल्क तय
केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF को लेकर सरकार ने नई दरें तय की हैं, जो 14 अगस्त से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी SAED अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर यह शुल्क शून्य रहेगा। वहीं डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर भी पहले के मुकाबले कम टैक्स देना होगा। डीजल पर SAED को 25.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपए कर दिया गया है। यानी निर्यातकों को प्रति लीटर 1.5 रुपए की राहत मिली है। इसी तरह ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क 22 रुपए प्रति लीटर से कम करके 19.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसमें भी 2.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है। सरकार की ओर से यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर लगातार नजर बनी हुई है। विंडफॉल टैक्स आमतौर पर तब लगाया जाता है, जब घरेलू या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते तेल कंपनियों को असाधारण लाभ मिलता है। इसका उद्देश्य उस अतिरिक्त कमाई के एक हिस्से को टैक्स के जरिए सरकारी राजस्व में लाना होता है। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में बदलाव से रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों की लागत और मार्जिन पर असर पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, जो भारत में कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजती हैं। पेट्रोल के मामले में शुल्क को पूरी तरह हटाने का फैसला सबसे बड़ा बदलाव है। पहले जहां निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा था, अब पेट्रोल को इस शुल्क से बाहर कर दिया गया है। डीजल पर भी दर में कमी की गई है, हालांकि यहां शुल्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने डीजल के लिए नई दर 24 रुपए प्रति लीटर तय की है। ATF पर भी राहत दी गई है और नई एक्सपोर्ट ड्यूटी 19.5 रुपए प्रति लीटर रखी गई है।
पेट्रोलियम उत्पादों पर विंडफॉल टैक्स की व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हुए बड़े उतार-चढ़ाव के बीच चर्चा में रही है। जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और रिफाइनरी कंपनियों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से असाधारण मुनाफे की स्थिति बनी, तब सरकार ने अतिरिक्त कर के जरिए इस लाभ का एक हिस्सा हासिल करने की नीति अपनाई थी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से इन दरों में कई बार बदलाव किया गया। अब पेट्रोल पर शुल्क शून्य करने और डीजल व ATF पर दर घटाने से निर्यात कारोबार में लगे उद्योगों को कुछ राहत मिल सकती है। ATF पर शुल्क में कटौती का असर एविएशन सेक्टर से जुड़े कारोबार पर भी नजर में रहेगा, क्योंकि जेट फ्यूल का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में होता है। हालांकि एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल या डीजल के खुदरा दाम तुरंत उसी अनुपात में बदल जाएंगे। घरेलू ईंधन की कीमतें कई दूसरे कारकों से भी प्रभावित होती हैं।
इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति शामिल हैं। इसी तरह निर्यात शुल्क में कमी से विदेशी बाजार में भारतीय रिफाइनरियों के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर असर पड़ सकता है। उद्योग के लिए यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि एक्सपोर्ट पर लगने वाला शुल्क सीधे तौर पर लागत गणना का हिस्सा बनता है। पेट्रोल के लिए अब SAED शून्य होने से इस मद में कोई भुगतान नहीं करना होगा। डीजल के लिए पुरानी दर 25.5 रुपए प्रति लीटर थी, जिसे घटाकर 24 रुपए कर दिया गया है। ATF में पहले 22 रुपए प्रति लीटर की दर लागू थी, जिसे अब 19.5 रुपए कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार ये संशोधित दरें 14 अगस्त से प्रभावी हैं। पेट्रोलियम निर्यात करने वाली कंपनियां अब नई दरों के आधार पर अपने एक्सपोर्ट पर लागू शुल्क की गणना करेंगी। पेट्रोल, डीजल और ATF की इन तीनों श्रेणियों में किए गए बदलाव का असर आने वाले दिनों में रिफाइनिंग कंपनियों के एक्सपोर्ट मार्जिन और सरकारी राजस्व के आंकड़ों में दिखाई दे सकता है।
पेट्रोल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स खत्म, डीजल और ATF पर भी राहत
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केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF को लेकर सरकार ने नई दरें तय की हैं, जो 14 अगस्त से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी SAED अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर यह शुल्क शून्य रहेगा। वहीं डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर भी पहले के मुकाबले कम टैक्स देना होगा। डीजल पर SAED को 25.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपए कर दिया गया है। यानी निर्यातकों को प्रति लीटर 1.5 रुपए की राहत मिली है। इसी तरह ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क 22 रुपए प्रति लीटर से कम करके 19.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसमें भी 2.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है। सरकार की ओर से यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर लगातार नजर बनी हुई है। विंडफॉल टैक्स आमतौर पर तब लगाया जाता है, जब घरेलू या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते तेल कंपनियों को असाधारण लाभ मिलता है। इसका उद्देश्य उस अतिरिक्त कमाई के एक हिस्से को टैक्स के जरिए सरकारी राजस्व में लाना होता है। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में बदलाव से रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों की लागत और मार्जिन पर असर पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, जो भारत में कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल और ATF जैसे उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजती हैं। पेट्रोल के मामले में शुल्क को पूरी तरह हटाने का फैसला सबसे बड़ा बदलाव है। पहले जहां निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा था, अब पेट्रोल को इस शुल्क से बाहर कर दिया गया है। डीजल पर भी दर में कमी की गई है, हालांकि यहां शुल्क अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने डीजल के लिए नई दर 24 रुपए प्रति लीटर तय की है। ATF पर भी राहत दी गई है और नई एक्सपोर्ट ड्यूटी 19.5 रुपए प्रति लीटर रखी गई है।
पेट्रोलियम उत्पादों पर विंडफॉल टैक्स की व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हुए बड़े उतार-चढ़ाव के बीच चर्चा में रही है। जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और रिफाइनरी कंपनियों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से असाधारण मुनाफे की स्थिति बनी, तब सरकार ने अतिरिक्त कर के जरिए इस लाभ का एक हिस्सा हासिल करने की नीति अपनाई थी। इसके बाद बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से इन दरों में कई बार बदलाव किया गया। अब पेट्रोल पर शुल्क शून्य करने और डीजल व ATF पर दर घटाने से निर्यात कारोबार में लगे उद्योगों को कुछ राहत मिल सकती है। ATF पर शुल्क में कटौती का असर एविएशन सेक्टर से जुड़े कारोबार पर भी नजर में रहेगा, क्योंकि जेट फ्यूल का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में होता है। हालांकि एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल या डीजल के खुदरा दाम तुरंत उसी अनुपात में बदल जाएंगे। घरेलू ईंधन की कीमतें कई दूसरे कारकों से भी प्रभावित होती हैं।
इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति शामिल हैं। इसी तरह निर्यात शुल्क में कमी से विदेशी बाजार में भारतीय रिफाइनरियों के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर असर पड़ सकता है। उद्योग के लिए यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि एक्सपोर्ट पर लगने वाला शुल्क सीधे तौर पर लागत गणना का हिस्सा बनता है। पेट्रोल के लिए अब SAED शून्य होने से इस मद में कोई भुगतान नहीं करना होगा। डीजल के लिए पुरानी दर 25.5 रुपए प्रति लीटर थी, जिसे घटाकर 24 रुपए कर दिया गया है। ATF में पहले 22 रुपए प्रति लीटर की दर लागू थी, जिसे अब 19.5 रुपए कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार ये संशोधित दरें 14 अगस्त से प्रभावी हैं। पेट्रोलियम निर्यात करने वाली कंपनियां अब नई दरों के आधार पर अपने एक्सपोर्ट पर लागू शुल्क की गणना करेंगी। पेट्रोल, डीजल और ATF की इन तीनों श्रेणियों में किए गए बदलाव का असर आने वाले दिनों में रिफाइनिंग कंपनियों के एक्सपोर्ट मार्जिन और सरकारी राजस्व के आंकड़ों में दिखाई दे सकता है।
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