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सोने-चांदी के भाव में आज नरमी, चांदी ₹1,920 सस्ती
Digital Desk
24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए करीब ₹1.54 लाख पर, चांदी ₹2.34 लाख किलो; इस साल अब तक दोनों धातुओं में तेज उतार-चढ़ाव
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए मंगलवार 18 अगस्त का दिन थोड़ी राहत लेकर आया है। घरेलू बुलियन बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई। दिए गए IBJA आंकड़ों के मुताबिक, चांदी का भाव एक दिन में ₹1,920 घटकर करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर करीब ₹5 कम हुई और यह ₹1.54 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि सोने में गिरावट बहुत मामूली है, लेकिन चांदी में कमी कुछ ज्यादा दिखाई दे रही है। बाजार में इस समय अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भी बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच वैश्विक स्तर पर सोने पर दबाव देखा गया। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.4% नीचे आया था, जबकि चांदी में भी कमजोरी रही।
सोने के भाव में आज की हल्की गिरावट को पिछले कुछ दिनों की तेज हलचल के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों के कारण निवेशकों की नजर सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर रही। ऐसे माहौल में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल इसमें उतार-चढ़ाव पैदा करती है। फिलहाल निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर लगाए हुए हैं। मंगलवार को बाजार में भी इसी तरह की सतर्कता दिखाई दी। ऊंची यील्ड से सोने जैसे ऐसे निवेश पर दबाव पड़ता है, जिस पर नियमित ब्याज नहीं मिलता।
अगर इस साल की शुरुआत से सोने की चाल देखें तो मामूली दैनिक गिरावट के बावजूद तस्वीर काफी मजबूत रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख से ऊपर था, जो अब लगभग ₹1.54 लाख तक पहुंच चुका है। यानी साल की शुरुआत के मुकाबले इसमें करीब ₹21 हजार की बढ़त है। इस दौरान कीमतों में कई बार तेज उछाल और फिर मुनाफावसूली देखने को मिली। 29 जनवरी को सोने ने करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस समय बाजार में सोने को लेकर जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली थी। बाद में भाव नीचे आए, लेकिन मौजूदा कीमत अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी ऊंची है। इस वजह से ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए आज की छोटी गिरावट बड़ी राहत जैसी नहीं है, लेकिन रोज के भाव में बदलाव पर नजर रखने वाले ग्राहकों के लिए यह जरूर अहम है।
चांदी में इस साल की चाल सोने से भी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली रही है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी करीब ₹2.30 लाख पर थी और अब यह करीब ₹2.34 लाख के स्तर पर है। यानी साल के दौरान करीब ₹4 हजार की बढ़त बनी हुई है। हालांकि बीच में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। 29 जनवरी को इसका भाव करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। उसके बाद कीमत में काफी उतार-चढ़ाव आया और मौजूदा स्तर उस रिकॉर्ड से काफी नीचे है। चांदी में औद्योगिक मांग का भी असर रहता है, इसलिए इसकी कीमत केवल निवेशकों की खरीदारी से तय नहीं होती। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी मांग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल को प्रभावित करती है।
आज के घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई नरमी को वैश्विक बुलियन बाजार की चाल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों पर दबाव रहा। रिपोर्ट के अनुसार स्पॉट गोल्ड करीब 4,397 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर था, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी नीचे आए। दूसरी ओर तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की खबरों ने बाजार की दिशा को जटिल बना दिया है। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव सोने की मांग को बढ़ा सकता है, लेकिन महंगा तेल महंगाई का दबाव बढ़ाता है और इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं। यही वजह है कि फिलहाल बुलियन मार्केट में एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय तेज उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है।
देश के अलग-अलग शहरों में सोने के खुदरा भाव में अंतर भी देखने को मिलता है। इसका कारण सिर्फ बाजार भाव नहीं है। ज्वेलरी खरीदते समय सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST और संबंधित कारोबारी के मार्जिन से अंतिम कीमत बदल जाती है। IBJA के भाव मुख्य तौर पर बुलियन के संकेतक भाव होते हैं और ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को दुकान का अंतिम रेट अलग मिल सकता है। इसलिए 24 कैरेट के 10 ग्राम भाव को सीधे आभूषण की कीमत नहीं माना जा सकता। 22 कैरेट सोने का भाव भी अलग रहता है, क्योंकि उसमें शुद्धता का स्तर कम होता है। इसी तरह चांदी की कीमत में भी शुद्धता और खरीदारी की मात्रा के हिसाब से अंतर आ सकता है।
सोने और चांदी की कीमतों में आगे की चाल को लेकर बाजार में कई संकेतों पर नजर है। अमेरिकी फेड की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले दिनों में बुलियन मार्केट के लिए अहम रह सकती है। फिलहाल सोना अपने साल की शुरुआत के स्तर से काफी ऊपर है, जबकि चांदी भी दिसंबर के मुकाबले महंगी है। ऐसे में आज की गिरावट के बावजूद दोनों धातुओं की सालाना बढ़त बनी हुई है। स्थानीय सराफा बाजार में भी कारोबारी अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग के अगले संकेतों पर नजर रख रहे हैं।
सोने-चांदी के भाव में आज नरमी, चांदी ₹1,920 सस्ती
Digital Desk
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए मंगलवार 18 अगस्त का दिन थोड़ी राहत लेकर आया है। घरेलू बुलियन बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई। दिए गए IBJA आंकड़ों के मुताबिक, चांदी का भाव एक दिन में ₹1,920 घटकर करीब ₹2.34 लाख प्रति किलो रह गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर करीब ₹5 कम हुई और यह ₹1.54 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि सोने में गिरावट बहुत मामूली है, लेकिन चांदी में कमी कुछ ज्यादा दिखाई दे रही है। बाजार में इस समय अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भी बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच वैश्विक स्तर पर सोने पर दबाव देखा गया। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.4% नीचे आया था, जबकि चांदी में भी कमजोरी रही।
सोने के भाव में आज की हल्की गिरावट को पिछले कुछ दिनों की तेज हलचल के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों के कारण निवेशकों की नजर सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों पर रही। ऐसे माहौल में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल इसमें उतार-चढ़ाव पैदा करती है। फिलहाल निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर लगाए हुए हैं। मंगलवार को बाजार में भी इसी तरह की सतर्कता दिखाई दी। ऊंची यील्ड से सोने जैसे ऐसे निवेश पर दबाव पड़ता है, जिस पर नियमित ब्याज नहीं मिलता।
अगर इस साल की शुरुआत से सोने की चाल देखें तो मामूली दैनिक गिरावट के बावजूद तस्वीर काफी मजबूत रही है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख से ऊपर था, जो अब लगभग ₹1.54 लाख तक पहुंच चुका है। यानी साल की शुरुआत के मुकाबले इसमें करीब ₹21 हजार की बढ़त है। इस दौरान कीमतों में कई बार तेज उछाल और फिर मुनाफावसूली देखने को मिली। 29 जनवरी को सोने ने करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस समय बाजार में सोने को लेकर जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली थी। बाद में भाव नीचे आए, लेकिन मौजूदा कीमत अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले काफी ऊंची है। इस वजह से ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए आज की छोटी गिरावट बड़ी राहत जैसी नहीं है, लेकिन रोज के भाव में बदलाव पर नजर रखने वाले ग्राहकों के लिए यह जरूर अहम है।
चांदी में इस साल की चाल सोने से भी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली रही है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी करीब ₹2.30 लाख पर थी और अब यह करीब ₹2.34 लाख के स्तर पर है। यानी साल के दौरान करीब ₹4 हजार की बढ़त बनी हुई है। हालांकि बीच में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। 29 जनवरी को इसका भाव करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। उसके बाद कीमत में काफी उतार-चढ़ाव आया और मौजूदा स्तर उस रिकॉर्ड से काफी नीचे है। चांदी में औद्योगिक मांग का भी असर रहता है, इसलिए इसकी कीमत केवल निवेशकों की खरीदारी से तय नहीं होती। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी मांग भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल को प्रभावित करती है।
आज के घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई नरमी को वैश्विक बुलियन बाजार की चाल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों पर दबाव रहा। रिपोर्ट के अनुसार स्पॉट गोल्ड करीब 4,397 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर था, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी नीचे आए। दूसरी ओर तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की खबरों ने बाजार की दिशा को जटिल बना दिया है। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव सोने की मांग को बढ़ा सकता है, लेकिन महंगा तेल महंगाई का दबाव बढ़ाता है और इससे ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं। यही वजह है कि फिलहाल बुलियन मार्केट में एकतरफा तेजी या गिरावट के बजाय तेज उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है।
देश के अलग-अलग शहरों में सोने के खुदरा भाव में अंतर भी देखने को मिलता है। इसका कारण सिर्फ बाजार भाव नहीं है। ज्वेलरी खरीदते समय सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज, GST और संबंधित कारोबारी के मार्जिन से अंतिम कीमत बदल जाती है। IBJA के भाव मुख्य तौर पर बुलियन के संकेतक भाव होते हैं और ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को दुकान का अंतिम रेट अलग मिल सकता है। इसलिए 24 कैरेट के 10 ग्राम भाव को सीधे आभूषण की कीमत नहीं माना जा सकता। 22 कैरेट सोने का भाव भी अलग रहता है, क्योंकि उसमें शुद्धता का स्तर कम होता है। इसी तरह चांदी की कीमत में भी शुद्धता और खरीदारी की मात्रा के हिसाब से अंतर आ सकता है।
सोने और चांदी की कीमतों में आगे की चाल को लेकर बाजार में कई संकेतों पर नजर है। अमेरिकी फेड की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले दिनों में बुलियन मार्केट के लिए अहम रह सकती है। फिलहाल सोना अपने साल की शुरुआत के स्तर से काफी ऊपर है, जबकि चांदी भी दिसंबर के मुकाबले महंगी है। ऐसे में आज की गिरावट के बावजूद दोनों धातुओं की सालाना बढ़त बनी हुई है। स्थानीय सराफा बाजार में भी कारोबारी अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू मांग के अगले संकेतों पर नजर रख रहे हैं।
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