GLP-1 दवाओं की कवरेज पर नई बहस: क्या मोटापे की रोकथाम के लिए भी बीमा में शामिल हों वजन घटाने वाले इंजेक्शन?

Priyanka Mathur

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डायबिटीज तक सीमित रहे कवरेज या मोटापे को भी बीमारी मानकर इलाज मिले? बढ़ती कीमत, स्वास्थ्य लाभ और समान पहुंच के बीच स्वास्थ्य प्रणालियों के सामने बड़ा सवाल

GLP-1 दवाओं ने मोटापे के इलाज की तस्वीर बदल दी है। इन दवाओं का इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ वजन प्रबंधन में भी किया जा रहा है। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणालियां और बीमा कंपनियां GLP-1 दवाओं को मोटापे की रोकथाम और इलाज के लिए भी कवर करें या केवल डायबिटीज जैसे रोगों तक सीमित रखें। विश्व स्वास्थ्य संगठन मोटापे को एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी मानता है और GLP-1 उपचार को व्यापक स्वास्थ्य देखभाल, बेहतर खान-पान और शारीरिक गतिविधि के साथ इस्तेमाल करने की सिफारिश करता है।

खर्च सबसे बड़ी चुनौती

व्यापक कवरेज का सबसे बड़ा सवाल इसकी लागत है। अमेरिका में जनवरी 2026 तक केवल 13 राज्य अपनी fee-for-service Medicaid योजनाओं में मोटापे के इलाज के लिए GLP-1 दवाओं को कवर कर रहे थे। कई योजनाओं में prior authorization जैसी शर्तें भी लागू हैं। बीमा कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए भी लंबे समय तक इन दवाओं का भुगतान करना महंगा साबित हो सकता है। इसी कारण कुछ योजनाएं डायबिटीज के लिए कवरेज देती हैं, लेकिन वजन घटाने के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू करती हैं।

अमेरिका में कवरेज का नया मॉडल

अमेरिका में 1 जुलाई 2026 से Medicare GLP-1 Bridge कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके तहत कुछ पात्र लाभार्थियों को वजन घटाने के लिए कुछ GLP-1 दवाओं तक पहुंच मिल रही है। हालांकि यह सुविधा सभी Medicare लाभार्थियों के लिए बिना शर्त उपलब्ध नहीं है।

समर्थकों और विरोधियों की अलग दलील

कवरेज के समर्थकों का कहना है कि मोटापे का समय पर इलाज करने से भविष्य में इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके इलाज पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। वहीं विरोध में सबसे बड़ा तर्क दवा की कीमत और लंबे समय तक उपचार की जरूरत है। इसके अलावा मरीजों का सही चयन, चिकित्सकीय निगरानी और दवा बंद करने के बाद वजन दोबारा बढ़ने जैसी चुनौतियां भी नीति बनाने में महत्वपूर्ण हैं। इसलिए GLP-1 कवरेज की बहस अब सिर्फ “डायबिटीज या वजन घटाना” तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें इलाज की लागत, भविष्य की स्वास्थ्य बचत, मरीजों की पहुंच और सरकारी तथा बीमा बजट—सभी पहलू शामिल हैं।

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