मानसून में बच्चों की सेहत का रखें खास ख्याल: पौष्टिक टिफिन, सुरक्षित खाना और वायरल संक्रमण से बचाव पर दें ध्यान

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बारिश के मौसम में बदलती दिनचर्या के बीच बच्चों की इम्युनिटी को सपोर्ट करने के लिए संतुलित भोजन, साफ पानी, सुरक्षित लंचबॉक्स और हाथों की स्वच्छता बेहद जरूरी

बारिश का मौसम बच्चों के लिए खुशनुमा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है। स्कूल खुलने के बाद बच्चे रोजाना घर से बाहर रहते हैं, अलग-अलग सतहों के संपर्क में आते हैं और कई बार टिफिन या पानी भी साझा करते हैं। ऐसे में पौष्टिक भोजन और अच्छी स्वच्छता की आदतें बच्चों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्कूल बच्चों की खान-पान की आदतें विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण जगह हैं। WHO ने स्कूलों में पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के साथ ज्यादा नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सिफारिश की है।

टिफिन में क्या रखें?

मानसून में बच्चों के लंचबॉक्स को स्वादिष्ट होने के साथ पोषण से भरपूर रखना जरूरी है। घर का ताजा खाना प्राथमिकता हो सकता है। टिफिन में अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

  • रोटी या पराठे के साथ सब्जी
  • दाल, चना या राजमा जैसे प्रोटीन स्रोत
  • मौसमी फल
  • दही या अन्य उपयुक्त डेयरी विकल्प
  • घर पर तैयार पोहा, उपमा, इडली या खिचड़ी
  • पर्याप्त साफ और सुरक्षित पानी

WHO विविध और ताजे खाद्य पदार्थों में अनाज, दालें, सब्जियां, फल और उपयुक्त पशु-आधारित खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह देता है।

पैकेज्ड स्नैक्स को रोज का टिफिन न बनाएं

बारिश के दिनों में गर्मागर्म पैकेज्ड स्नैक्स या मीठे पेय बच्चों को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन इन्हें नियमित टिफिन का विकल्प बनाना बेहतर नहीं है। UNICEF India ने भी बच्चों के खान-पान में ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है।

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बच्चों को धीरे-धीरे फल, घर के बने स्नैक्स और संतुलित भोजन की आदत डालना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

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लंचबॉक्स की सफाई भी उतनी ही जरूरी

सिर्फ टिफिन में क्या रखा गया है, यह मायने नहीं रखता; उसे किस तरह रखा और संभाला गया है, यह भी महत्वपूर्ण है। खाने से पहले हाथ साफ होना चाहिए और टिफिन को रोजाना अच्छी तरह धोकर सुखाना चाहिए।

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खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर पड़ा न रहे, खासकर गर्म और उमस भरे मौसम में। भोजन की गंध, रंग या बनावट असामान्य लगे तो बच्चे को वह खाना न दें। WHO के अनुसार दूषित भोजन से बच्चों को विशेष जोखिम हो सकता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चे खाद्य जनित बीमारियों के बोझ का बड़ा हिस्सा झेलते हैं।

वायरल संक्रमण से बचने के लिए हाथों की सफाई

मानसून में स्कूल जाने वाले बच्चों को हाथ धोने की आदत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खाना खाने से पहले, शौचालय इस्तेमाल करने के बाद और बाहर से घर लौटने पर साबुन और पानी से हाथ साफ करना जरूरी है। WHO के अनुसार हाथों की स्वच्छता खराब होने से दस्त और सांस से जुड़ी बीमारियों समेत कई संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों को खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने और बार-बार चेहरे को छूने से बचने जैसी आदतें भी सिखाई जा सकती हैं।

स्कूल में पानी और भोजन की सुरक्षा पर ध्यान

बच्चों को स्कूल भेजते समय साफ पानी की बोतल देना उपयोगी है। स्कूलों में भी पीने के पानी, भोजन की साफ-सफाई और सुरक्षित खाद्य व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। UNICEF के मुताबिक स्कूलों में पौष्टिक और सुरक्षित भोजन के साथ सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

बच्चे की तबीयत बिगड़े तो स्कूल न भेजें

अगर बच्चे को बुखार, लगातार खांसी, उल्टी, दस्त, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे सामान्य गतिविधियों में भेजने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। बारिश के मौसम में हर बुखार या सर्दी को केवल सामान्य वायरल मानकर खुद से दवा देना उचित नहीं है। लक्षण गंभीर हों, लंबे समय तक बने रहें या बच्चा बहुत सुस्त दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मानसून में बच्चों के लिए आसान हेल्थ रूटीन

सुबह पौष्टिक नाश्ता, स्कूल के लिए संतुलित टिफिन, पर्याप्त सुरक्षित पानी, हाथों की नियमित सफाई, पर्याप्त नींद और रोजाना शारीरिक गतिविधि—ये आदतें बच्चों की सामान्य सेहत को सपोर्ट करने में मदद कर सकती हैं। UNICEF भी स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर पोषण, शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ स्कूल वातावरण को महत्वपूर्ण मानता है।

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