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शेयर बाजार बंद: साल के अंत में मुनाफावसूली का असर, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले
बिजनेस डेस्क
बैंकिंग और आईटी शेयरों में दबाव, कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बाजार लाल निशान पर बंद
साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार की चाल डगमगा गई है। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स करीब 367 अंक टूटकर 85,041 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी लगभग 100 अंक फिसलकर 26,042 पर आ गया।
बाजार पर पूरे दिन मुनाफावसूली का दबाव बना रहा। खासतौर पर बैंकिंग और आईटी सेक्टर में कमजोरी ने सूचकांकों को संभलने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत और घरेलू शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
शुरुआत से ही दबाव में रहा बाजार
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में सुस्ती नजर आई। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खुला और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार के बाद निचले स्तरों पर बंद हुआ। निफ्टी भी पूरे सत्र में रिकवरी नहीं दिखा सका। निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज करते हुए मुनाफा निकालना ज्यादा सुरक्षित समझा।
ज्यादातर दिग्गज शेयरों में गिरावट
सेंसेक्स की 30 में से 24 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा दबाव बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टीसीएस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा और इटरनल जैसे शेयरों में देखने को मिला।
वहीं, कुछ चुनिंदा शेयरों—टाइटन, एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर—ने बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
सेक्टरों की चाल ने बिगाड़ी तस्वीर
बैंकिंग और आईटी सेक्टर में आई कमजोरी बाजार गिरावट की मुख्य वजह रही। आईटी शेयरों पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर दिखा, जबकि बैंकिंग शेयरों में पहले आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को तरजीह दी। फार्मा और मेटल सेक्टर में भी सीमित दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। ऊंचे स्तरों पर शेयरों के महंगे मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते बिकवाली बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों और कॉरपोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में निवेशक जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान दें। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चयनात्मक रणनीति अपनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है।
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बिजनेस डेस्क
साल के आखिरी कारोबारी सत्रों में शेयर बाजार की चाल डगमगा गई है। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स करीब 367 अंक टूटकर 85,041 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी लगभग 100 अंक फिसलकर 26,042 पर आ गया।
बाजार पर पूरे दिन मुनाफावसूली का दबाव बना रहा। खासतौर पर बैंकिंग और आईटी सेक्टर में कमजोरी ने सूचकांकों को संभलने का मौका नहीं दिया। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत और घरेलू शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
शुरुआत से ही दबाव में रहा बाजार
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में सुस्ती नजर आई। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खुला और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार के बाद निचले स्तरों पर बंद हुआ। निफ्टी भी पूरे सत्र में रिकवरी नहीं दिखा सका। निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज करते हुए मुनाफा निकालना ज्यादा सुरक्षित समझा।
ज्यादातर दिग्गज शेयरों में गिरावट
सेंसेक्स की 30 में से 24 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
सबसे ज्यादा दबाव बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टीसीएस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा और इटरनल जैसे शेयरों में देखने को मिला।
वहीं, कुछ चुनिंदा शेयरों—टाइटन, एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर—ने बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
सेक्टरों की चाल ने बिगाड़ी तस्वीर
बैंकिंग और आईटी सेक्टर में आई कमजोरी बाजार गिरावट की मुख्य वजह रही। आईटी शेयरों पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर दिखा, जबकि बैंकिंग शेयरों में पहले आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को तरजीह दी। फार्मा और मेटल सेक्टर में भी सीमित दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। ऊंचे स्तरों पर शेयरों के महंगे मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते बिकवाली बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों और कॉरपोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में निवेशक जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान दें। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चयनात्मक रणनीति अपनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है।
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