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23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट: ट्रम्प का दावा ईरानी आकाश पर कब्जे का गलत साबित, अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह
अंतराष्ट्रीय न्यूज
24 घंटों में अमेरिकी F-15E और A-10 जेट ईरानी मिसाइल हमले का शिकार, दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला; अमेरिका की रणनीति पर सवाल
ईरान के हवाई हमलों ने अमेरिकी वायु शक्ति की धारणाओं को चुनौती दे दी है। पिछले 24 घंटों में दो अमेरिकी फाइटर जेट और दो रेस्क्यू हेलीकॉप्टर ईरानी हमला के शिकार हुए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिरे थे, और अब 23 साल बाद यह इतिहास दोहराया गया।
ईरानी मीडिया ने बताया कि F-15E फाइटर जेट को दक्षिण-पश्चिम ईरान में मार गिराया गया। इसके क्रू को खोजने के लिए A-10 अटैक एयरक्राफ्ट भेजा गया, जिस पर भी हमला हुआ। A-10 पायलट सुरक्षित रहे, लेकिन विमान कुवैत में क्रैश हो गया। F-15E के दो क्रू मेंबर में से एक को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है। अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर हुए हमलों में मौजूद सैनिक सुरक्षित हैं।
ईरान और अमेरिका के दावे
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई शक्ति पूरी तरह नष्ट कर दी है और अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर पूरी तरह नियंत्रण में उड़ रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी तरह के दावे किए। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने ट्रम्प के दावों को चुनौती दी है।
अब तक के नुकसान
2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी क्रू सुरक्षित।
12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत।
27 मार्च: सऊदी अरब में E-3 सेंट्री नष्ट।
3 अप्रैल: F-15E और A-10 गिराए गए, दुश्मन की गोलीबारी में पहली बार अमेरिकी विमान खोए गए।
ईरानी रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने असिमेट्रिक वारफेयर का सहारा लिया है। ईरान सीधे युद्ध में अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए उसने कम संसाधनों में अधिक नुकसान पहुंचाने वाली रणनीति अपनाई। ईरान ने मजीद एयर डिफेंस सिस्टम और कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया। मजीद सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को 6 किलोमीटर ऊंचाई और 8 किलोमीटर दूरी तक निशाना बना सकता है।
मोबाइल डिफेंस सिस्टम
ईरान ने अब अपने मिसाइल लॉन्चर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर रखे हैं, जो तेजी से स्थान बदल सकते हैं। इसे ‘फायर एंड मूव’ रणनीति कहा जाता है। इसके अलावा, चीन के HQ-9B सिस्टम जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
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23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट: ट्रम्प का दावा ईरानी आकाश पर कब्जे का गलत साबित, अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह
अंतराष्ट्रीय न्यूज
ईरान के हवाई हमलों ने अमेरिकी वायु शक्ति की धारणाओं को चुनौती दे दी है। पिछले 24 घंटों में दो अमेरिकी फाइटर जेट और दो रेस्क्यू हेलीकॉप्टर ईरानी हमला के शिकार हुए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी विमान दुश्मन की गोलीबारी में गिरे थे, और अब 23 साल बाद यह इतिहास दोहराया गया।
ईरानी मीडिया ने बताया कि F-15E फाइटर जेट को दक्षिण-पश्चिम ईरान में मार गिराया गया। इसके क्रू को खोजने के लिए A-10 अटैक एयरक्राफ्ट भेजा गया, जिस पर भी हमला हुआ। A-10 पायलट सुरक्षित रहे, लेकिन विमान कुवैत में क्रैश हो गया। F-15E के दो क्रू मेंबर में से एक को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है। अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर हुए हमलों में मौजूद सैनिक सुरक्षित हैं।
ईरान और अमेरिका के दावे
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई शक्ति पूरी तरह नष्ट कर दी है और अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर पूरी तरह नियंत्रण में उड़ रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी तरह के दावे किए। लेकिन हाल के घटनाक्रम ने ट्रम्प के दावों को चुनौती दी है।
अब तक के नुकसान
2 मार्च: कुवैत में ‘फ्रेंडली फायर’ में 3 F-15 गिरे, सभी क्रू सुरक्षित।
12 मार्च: इराक में KC-135 टैंकर क्रैश, 6 अमेरिकी एयरक्रू की मौत।
27 मार्च: सऊदी अरब में E-3 सेंट्री नष्ट।
3 अप्रैल: F-15E और A-10 गिराए गए, दुश्मन की गोलीबारी में पहली बार अमेरिकी विमान खोए गए।
ईरानी रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने असिमेट्रिक वारफेयर का सहारा लिया है। ईरान सीधे युद्ध में अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए उसने कम संसाधनों में अधिक नुकसान पहुंचाने वाली रणनीति अपनाई। ईरान ने मजीद एयर डिफेंस सिस्टम और कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया। मजीद सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को 6 किलोमीटर ऊंचाई और 8 किलोमीटर दूरी तक निशाना बना सकता है।
मोबाइल डिफेंस सिस्टम
ईरान ने अब अपने मिसाइल लॉन्चर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर रखे हैं, जो तेजी से स्थान बदल सकते हैं। इसे ‘फायर एंड मूव’ रणनीति कहा जाता है। इसके अलावा, चीन के HQ-9B सिस्टम जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
