मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोप बेबुनियाद: चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को किया खारिज

JAGRAN DESK

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से नकार दिया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूची में नामों की जोड़-घटाव की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के साथ की जाती है।


क्या है मामला?

लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया था कि 2019 से 2024 के बीच महाराष्ट्र की मतदाता सूची में करीब 30 लाख नए नाम जोड़े गए हैं, जिनमें से कई की वैधता पर सवाल है। उन्होंने इस पर विस्तृत चर्चा की मांग भी की थी।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दावा किया कि यह आंकड़ा मतदाता सूची में बड़ी हेराफेरी और डुप्लिकेट वोटर्स की ओर इशारा करता है।


चुनाव आयोग का जवाब: “आरोप तथ्यहीन और भ्रामक”

चुनाव आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने विपक्ष के इन आरोपों को “तथ्यहीन और भ्रामक” बताया है। आयोग का कहना है कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची की नियमित समीक्षा की जाती है, जिसमें नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है, और मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नाम हटाए जाते हैं

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र में अब तक केवल 89 अपील दर्ज हुई हैं, जबकि राज्य भर में लाखों मतदाता हैं। इससे साफ है कि गड़बड़ी के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।


कानूनी पहलुओं पर भी दी गई सफाई

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जो लोग मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें 1961 में बनाए गए चुनाव कानून का गहराई से अध्ययन करना चाहिए। मतदाता सूची में परिवर्तन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपील का अधिकार भी दिया गया है।


ईपीआईसी नंबरों पर भ्रम फैलाने की कोशिश

आयोग ने स्पष्ट किया कि EPIC (Electors Photo Identity Card) नंबरों की समानता का यह मतलब नहीं कि वोटर फर्जी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलत व्याख्याएं जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं।


क्या है आगे की रणनीति?

सूत्रों के मुताबिक, आगामी महीनों में बिहार समेत कई राज्यों में चुनाव होने हैं, ऐसे में राजनीतिक दलों द्वारा इस मुद्दे को बार-बार उछाले जाने की आशंका है। लेकिन चुनाव आयोग पहले ही इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है और आवश्यक आँकड़े भी सार्वजनिक कर दिए हैं।


निष्कर्ष: पारदर्शिता पर सवाल नहीं

देश में लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती के लिए चुनाव आयोग की भूमिका बेहद अहम है। मतदाता सूची को लेकर बार-बार सवाल उठाना यदि बिना ठोस सबूत के किया जाए, तो यह प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा सवाल है।

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17 Apr 2025 By दैनिक जागरण

मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोप बेबुनियाद: चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावे को किया खारिज

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आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूची में नामों की जोड़-घटाव की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के साथ की जाती है।


क्या है मामला?

लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह आरोप लगाया था कि 2019 से 2024 के बीच महाराष्ट्र की मतदाता सूची में करीब 30 लाख नए नाम जोड़े गए हैं, जिनमें से कई की वैधता पर सवाल है। उन्होंने इस पर विस्तृत चर्चा की मांग भी की थी।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दावा किया कि यह आंकड़ा मतदाता सूची में बड़ी हेराफेरी और डुप्लिकेट वोटर्स की ओर इशारा करता है।


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चुनाव आयोग से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने विपक्ष के इन आरोपों को “तथ्यहीन और भ्रामक” बताया है। आयोग का कहना है कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची की नियमित समीक्षा की जाती है, जिसमें नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है, और मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट नाम हटाए जाते हैं

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र में अब तक केवल 89 अपील दर्ज हुई हैं, जबकि राज्य भर में लाखों मतदाता हैं। इससे साफ है कि गड़बड़ी के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।


कानूनी पहलुओं पर भी दी गई सफाई

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जो लोग मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें 1961 में बनाए गए चुनाव कानून का गहराई से अध्ययन करना चाहिए। मतदाता सूची में परिवर्तन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपील का अधिकार भी दिया गया है।


ईपीआईसी नंबरों पर भ्रम फैलाने की कोशिश

आयोग ने स्पष्ट किया कि EPIC (Electors Photo Identity Card) नंबरों की समानता का यह मतलब नहीं कि वोटर फर्जी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलत व्याख्याएं जनता को भ्रमित करने का प्रयास हैं।


क्या है आगे की रणनीति?

सूत्रों के मुताबिक, आगामी महीनों में बिहार समेत कई राज्यों में चुनाव होने हैं, ऐसे में राजनीतिक दलों द्वारा इस मुद्दे को बार-बार उछाले जाने की आशंका है। लेकिन चुनाव आयोग पहले ही इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुका है और आवश्यक आँकड़े भी सार्वजनिक कर दिए हैं।


निष्कर्ष: पारदर्शिता पर सवाल नहीं

देश में लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती के लिए चुनाव आयोग की भूमिका बेहद अहम है। मतदाता सूची को लेकर बार-बार सवाल उठाना यदि बिना ठोस सबूत के किया जाए, तो यह प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा सवाल है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/election/allegations-of-rigging-in-voter-list-baseless-election-commission-rejected/article-17932

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