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लालू यादव परिवार पर IRCTC मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
Digital Desk
दिल्ली की अदालत ने IRCTC होटल लीज मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए।
दिल्ली की एक अदालत ने RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ लंबे समय से चल रहे IRCTC होटल लीज मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे और रांची तथा पुरी स्थित रेलवे होटलों के संचालन के लिए ठेके दिए गए थे।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव परिवार से जुड़े भूमि लेनदेन और कथित अपराध की आय के संबंध में प्रथम दृष्टया पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह बनता है। अदालत ने कुल नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, जबकि सात अन्य को आरोपों से मुक्त कर दिया गया। औपचारिक रूप से आरोप 3 अक्टूबर को तय किए जाने हैं।
अदालत ने पद के दुरुपयोग पर जताया संदेह
अदालत की टिप्पणियों का केंद्र यह आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रेलवे अधिकारियों ने कथित तौर पर निविदा प्रक्रिया में हेरफेर किया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रांची और पुरी के दो IRCTC होटलों के संचालन का ठेका M/s Sujata Hotels Pvt. Ltd. को दिया गया था। यह कंपनी कारोबारी विजय और विनय कोचर से जुड़ी बताई गई है।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि होटल संचालन से कथित लाभ मिलने के बाद पटना में जमीन से जुड़े कुछ लेनदेन किए गए।
पटना की जमीन बनी मामले का केंद्र
जांच के अनुसार, पटना की 358 डिसमिल की प्रमुख जमीन फरवरी 2005 में Delight Marketing Company Pvt. Ltd. को हस्तांतरित की गई थी। यह कंपनी RJD नेता पीसी गुप्ता के परिवार से जुड़ी बताई गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि यह लेनदेन रेलवे होटल के ठेके दिए जाने से जुड़ा था।
जांच एजेंसी का आगे आरोप है कि जमीन रखने वाली कंपनी का स्वामित्व बाद में शेयर लेनदेन के माध्यम से राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से जुड़ गया।
कथित क्विड प्रो क्वो की जांच
CBI और ED ने कथित व्यवस्था को quid pro quo यानी लाभ के बदले लाभ की व्यवस्था के रूप में पेश किया है। एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी ठेकों के बदले निजी संपत्तियों और कंपनियों के शेयरों का लाभ पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन और उससे जुड़े कारोबारी हित बाद में यादव परिवार के सदस्यों के नियंत्रण में आए और इनका मूल्य कथित तौर पर वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम था।
इन्हीं आरोपों के आधार पर मौजूदा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई आगे बढ़ी है।
2018 में ED ने दाखिल की थी चार्जशीट
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में 2018 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें लालू प्रसाद यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। RJD नेता पीसी गुप्ता, उनकी पत्नी सरला गुप्ता, Lara Projects और अन्य लोगों के नाम भी मामले में सामने आए थे।
ED का कहना है कि मूल लेनदेन से जुड़ी कथित अपराध की आय को बाद में कंपनियों के एक नेटवर्क के माध्यम से स्थानांतरित किया गया।
यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि आरोप उस समय के सरकारी फैसलों से जुड़े हैं, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्रालय संभाल रहे थे।
शेयर लेनदेन पर भी उठे सवाल
ED ने आरोप लगाया है कि पटना की जमीन रखने वाली कंपनी का नियंत्रण धीरे-धीरे राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव द्वारा शेयरों की खरीद के माध्यम से हासिल किया गया।
जांच एजेंसियों ने इन लेनदेन में इस्तेमाल धन के स्रोत और प्रकृति पर सवाल उठाए हैं।
ED ने यह भी दावा किया है कि कुछ ऐसे लोगों ने, जिन्हें तेजस्वी यादव को शेयर बेचने वालों के रूप में चिन्हित किया गया था, उन शेयरों के अपने पास होने या उन्हें बेचने की जानकारी से इनकार किया। इससे लेनदेन को लेकर जांच एजेंसियों के सवाल और बढ़े।
कथित मनी ट्रेल की जांच जारी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल धन के स्रोत पर सवाल हैं और इसे पीसी गुप्ता से जुड़ी 151 समूह कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से कथित तौर पर घुमाया गया।
जांच में Abhishek Finance Company Ltd नामक NBFC का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसियों ने इसे कथित धन प्रवाह से जुड़े लेनदेन के संदर्भ में जांचा है।
ED का कहना है कि ये लेनदेन एक व्यापक तंत्र का हिस्सा थे, जिसके माध्यम से कथित अपराध की आय उत्पन्न हुई और बाद में उसे अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित किया गया।
3 अक्टूबर को तय होंगे औपचारिक आरोप
अदालत का ताजा आदेश यादव परिवार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण चरण है। हालांकि, आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों को सुनवाई के दौरान कानून के अनुसार साबित करना होगा।
3 अक्टूबर को औपचारिक आरोप तय किए जाने के साथ यह मामला आगे बढ़ेगा। अभियोजन पक्ष के सामने IRCTC होटल ठेकों, पटना की जमीन के लेनदेन और बाद के शेयर हस्तांतरण के बीच कथित संबंध को साबित करने की चुनौती होगी।
मामला आने वाले समय में कानूनी के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
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