- Hindi News
- देश विदेश
- पटना प्रदर्शन मामला: तेज प्रताप यादव न्यायिक हिरासत में, बेऊर जेल भेजे गए
पटना प्रदर्शन मामला: तेज प्रताप यादव न्यायिक हिरासत में, बेऊर जेल भेजे गए
Digital Desk
NEET और छात्र आंदोलन को लेकर हुए बिहार बंद के दौरान प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई तेज, हिंसा भड़काने के आरोप में हुई गिरफ्तारी
बिहार की राजधानी पटना में छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए बेऊर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है। पुलिस ने उन पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित करने और कथित तौर पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया है। शनिवार को आयोजित बिहार बंद के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने व्यापक कार्रवाई शुरू की।
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के समर्थक बड़ी संख्या में पटना की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख चौराहों पर यातायात बाधित हुआ और कुछ स्थानों पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं भी सामने आईं।
पुलिस के अनुसार, रामगुलाम चौक सहित कुछ संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसी दौरान तेज प्रताप यादव भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। पुलिस का आरोप है कि उनके कुछ बयानों और गतिविधियों से प्रदर्शन और अधिक उग्र हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोबारा उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शाम के समय उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश किया गया।
देर रात हुई पेशी के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें पटना के बेऊर केंद्रीय कारागार पहुंचाया गया। गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है।
पटना पुलिस का दावा है कि बिहार बंद के दौरान राजधानी सहित राज्य के कई जिलों में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन के अनुसार, कई स्थानों पर सड़क जाम, सरकारी कामकाज में बाधा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने बताया कि पूरे अभियान के दौरान दो सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कई छात्र संगठन और राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर विरोध दर्ज कराना था। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पूरे मामले की वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जिन लोगों की भूमिका हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने में सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्षी दल इसे छात्र आंदोलन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून-व्यवस्था और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
पटना प्रदर्शन मामला: तेज प्रताप यादव न्यायिक हिरासत में, बेऊर जेल भेजे गए
Digital Desk
बिहार की राजधानी पटना में छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए बेऊर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है। पुलिस ने उन पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित करने और कथित तौर पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया है। शनिवार को आयोजित बिहार बंद के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने व्यापक कार्रवाई शुरू की।
यह प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे छात्र आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के समर्थक बड़ी संख्या में पटना की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख चौराहों पर यातायात बाधित हुआ और कुछ स्थानों पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं भी सामने आईं।
पुलिस के अनुसार, रामगुलाम चौक सहित कुछ संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसी दौरान तेज प्रताप यादव भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। पुलिस का आरोप है कि उनके कुछ बयानों और गतिविधियों से प्रदर्शन और अधिक उग्र हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान तेज प्रताप यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोबारा उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शाम के समय उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक अधिकारी के समक्ष पेश किया गया।
देर रात हुई पेशी के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें पटना के बेऊर केंद्रीय कारागार पहुंचाया गया। गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है।
पटना पुलिस का दावा है कि बिहार बंद के दौरान राजधानी सहित राज्य के कई जिलों में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन के अनुसार, कई स्थानों पर सड़क जाम, सरकारी कामकाज में बाधा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने बताया कि पूरे अभियान के दौरान दो सौ से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कई छात्र संगठन और राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर विरोध दर्ज कराना था। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
प्रशासन का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पूरे मामले की वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जिन लोगों की भूमिका हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने में सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्षी दल इसे छात्र आंदोलन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून-व्यवस्था और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
