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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले CM विष्णुदेव साय, बताया नैतिक राजनीति का उदाहरण
रायपुर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति से लेकर शिक्षा सुधारों तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के कार्यकाल की सराहना की
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उस पद पर रहते हुए किए गए कार्यों और निभाई गई जिम्मेदारियों से होती है। उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने अलग-अलग मंत्रालयों में रहते हुए जिस तरह काम किया, उसने उन्हें एक जिम्मेदार और परिणाम देने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने हर दायित्व को पूरी गंभीरता के साथ निभाया और हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के पिछले वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम हों या युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयास, हर जगह उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी संस्थानों और व्यावसायिक प्रशिक्षण को नई दिशा देने की कोशिश की गई। शिक्षा प्रणाली को बदलती वैश्विक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए भी कई योजनाओं पर काम हुआ, जिनका असर आने वाले समय में और अधिक दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार केवल पाठ्यक्रम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने, शोध को बढ़ावा देने और नई तकनीक के उपयोग को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके नेतृत्व में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिनका उद्देश्य शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रोजगारोन्मुख और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना था। साथ ही राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रयास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किसी एक दिन का काम नहीं होता, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें निरंतर निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता होती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही का विशेष महत्व होता है। उनके मुताबिक सार्वजनिक जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं, जब व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना इसी सोच को दर्शाता है। यह फैसला बताता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिकता और जवाबदेही केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादाओं का पालन और अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान होती है।
साय ने कहा कि राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी कार्यशैली से एक अलग छवि बनाई है। संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। मुख्यमंत्री के अनुसार उनके निर्णयों में हमेशा विकास और जनहित को प्राथमिकता देने का प्रयास दिखाई देता रहा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय के अलावा अन्य विभागों में भी धर्मेंद्र प्रधान ने कई ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया, जिनका लाभ देश के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचा। यही वजह है कि उनके कार्यकाल को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि नीतिगत बदलावों के संदर्भ में भी याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। जब कोई जनप्रतिनिधि अपने पद की गरिमा और सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं को सर्वोच्च मानते हुए निर्णय लेता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक उदाहरण बनता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन ऐसे फैसले यह संदेश देते हैं कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों से भी होती है जो उन संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन में इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है और इस क्षेत्र में निरंतर सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए, जिनमें धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका प्रमुख रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने के प्रयासों को हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है।
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले CM विष्णुदेव साय, बताया नैतिक राजनीति का उदाहरण
रायपुर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उस पद पर रहते हुए किए गए कार्यों और निभाई गई जिम्मेदारियों से होती है। उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने अलग-अलग मंत्रालयों में रहते हुए जिस तरह काम किया, उसने उन्हें एक जिम्मेदार और परिणाम देने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने हर दायित्व को पूरी गंभीरता के साथ निभाया और हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के पिछले वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम हों या युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयास, हर जगह उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में कई बड़े कदम उठाए गए। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी संस्थानों और व्यावसायिक प्रशिक्षण को नई दिशा देने की कोशिश की गई। शिक्षा प्रणाली को बदलती वैश्विक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए भी कई योजनाओं पर काम हुआ, जिनका असर आने वाले समय में और अधिक दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार केवल पाठ्यक्रम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने, शोध को बढ़ावा देने और नई तकनीक के उपयोग को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके नेतृत्व में कई ऐसे निर्णय लिए गए जिनका उद्देश्य शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, रोजगारोन्मुख और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना था। साथ ही राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर नई शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रयास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किसी एक दिन का काम नहीं होता, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें निरंतर निर्णय और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता होती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही का विशेष महत्व होता है। उनके मुताबिक सार्वजनिक जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं, जब व्यक्तिगत या राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना इसी सोच को दर्शाता है। यह फैसला बताता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिकता और जवाबदेही केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादाओं का पालन और अपने दायित्वों के प्रति गंभीरता किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पहचान होती है।
साय ने कहा कि राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी कार्यशैली से एक अलग छवि बनाई है। संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। मुख्यमंत्री के अनुसार उनके निर्णयों में हमेशा विकास और जनहित को प्राथमिकता देने का प्रयास दिखाई देता रहा। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय के अलावा अन्य विभागों में भी धर्मेंद्र प्रधान ने कई ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया, जिनका लाभ देश के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचा। यही वजह है कि उनके कार्यकाल को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि नीतिगत बदलावों के संदर्भ में भी याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। जब कोई जनप्रतिनिधि अपने पद की गरिमा और सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं को सर्वोच्च मानते हुए निर्णय लेता है, तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक उदाहरण बनता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन ऐसे फैसले यह संदेश देते हैं कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि उन लोगों से भी होती है जो उन संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन में इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के विकास में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है और इस क्षेत्र में निरंतर सुधार की आवश्यकता बनी रहती है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए, जिनमें धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका प्रमुख रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने के प्रयासों को हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है।
