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इम्युनिटी बूस्टर के रूप में उभरा सीताफल, सर्दियों में बढ़ा सेवन
लाइफ स्टाइल
ठंड के मौसम में बाजारों में बढ़ी सीताफल की मांग, डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ भी मानते हैं इसे सर्दियों का उपयोगी फल
सर्दियों के मौसम में मौसमी फलों की भूमिका सेहत के लिहाज से अहम मानी जाती है। ऐसे में सीताफल, जिसे कस्टर्ड एप्पल भी कहा जाता है, ठंड के दिनों में पोषण का भरोसेमंद स्रोत बनकर उभरा है। देश के कई हिस्सों में नवंबर से फरवरी के बीच मिलने वाला यह फल न केवल स्वाद में मीठा है, बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सर्दियों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला फल मानते हैं।
पोषण विशेषज्ञों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार सीताफल में मौजूद विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में होने वाली आम समस्याओं—जैसे सर्दी-जुकाम, थकान, पाचन गड़बड़ी और त्वचा की रूखापन—से बचाव में मदद करते हैं। यही कारण है कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग, बुजुर्ग और बच्चे खासतौर पर सर्दियों में सीताफल को अपने आहार में शामिल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है, जिसे सीताफल प्राकृतिक रूप से पूरा करता है।
सीताफल मुख्य रूप से सर्दियों के शुरुआती महीनों से ही फल मंडियों और खुदरा बाजारों में उपलब्ध हो जाता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसका उत्पादन और खपत अधिक देखी जा रही है।
सीताफल में मौजूद विटामिन C इम्युनिटी मजबूत करता है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड में होने वाली कब्ज की समस्या में भी यह फल राहत देता है। साथ ही, इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है।
दिल्ली के एक वरिष्ठ डाइटीशियन के अनुसार, “सीताफल सर्दियों में सीमित मात्रा में खाने पर बेहद फायदेमंद है। यह वजन बढ़ाने में भी मदद करता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि सीताफल को रात में या दूध-दही के साथ नहीं खाना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से अपच या पेट भारी होने की शिकायत हो सकती है।
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते आने वाले दिनों में सीताफल की खपत और बढ़ने की संभावना है। फल विक्रेताओं के मुताबिक, इस बार सर्दियों में सीताफल की मांग पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा दर्ज की जा रही है, जिससे इसकी कीमतों में भी हल्का उछाल देखा गया है।
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पोषण विशेषज्ञों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार सीताफल में मौजूद विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में होने वाली आम समस्याओं—जैसे सर्दी-जुकाम, थकान, पाचन गड़बड़ी और त्वचा की रूखापन—से बचाव में मदद करते हैं। यही कारण है कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग, बुजुर्ग और बच्चे खासतौर पर सर्दियों में सीताफल को अपने आहार में शामिल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है, जिसे सीताफल प्राकृतिक रूप से पूरा करता है।
सीताफल मुख्य रूप से सर्दियों के शुरुआती महीनों से ही फल मंडियों और खुदरा बाजारों में उपलब्ध हो जाता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसका उत्पादन और खपत अधिक देखी जा रही है।
सीताफल में मौजूद विटामिन C इम्युनिटी मजबूत करता है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि ठंड में होने वाली कब्ज की समस्या में भी यह फल राहत देता है। साथ ही, इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है।
दिल्ली के एक वरिष्ठ डाइटीशियन के अनुसार, “सीताफल सर्दियों में सीमित मात्रा में खाने पर बेहद फायदेमंद है। यह वजन बढ़ाने में भी मदद करता है, लेकिन डायबिटीज मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि सीताफल को रात में या दूध-दही के साथ नहीं खाना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से अपच या पेट भारी होने की शिकायत हो सकती है।
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते आने वाले दिनों में सीताफल की खपत और बढ़ने की संभावना है। फल विक्रेताओं के मुताबिक, इस बार सर्दियों में सीताफल की मांग पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा दर्ज की जा रही है, जिससे इसकी कीमतों में भी हल्का उछाल देखा गया है।
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