प्राकृतिक फूलों से बने हर्बल रंग त्वचा और बालों के लिए सुरक्षित, जानिए घर पर बनाने का आसान तरीका और इको-फ्रेंडली होली मनाने के फायदे

लाइफस्टाइल डेस्क

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रासायनिक रंगों से दूरी बनाकर फूलों से तैयार करें सुरक्षित, सुगंधित और पर्यावरण अनुकूल होली के रंग

होली रंगों का त्योहार है, लेकिन रासायनिक रंगों के कारण त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचने की चिंता भी साथ आती है। इस बार अगर आप सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल होली खेलना चाहते हैं, तो प्राकृतिक फूलों से बने रंग एक बेहतरीन विकल्प हैं। ये रंग न केवल त्वचा के लिए कोमल होते हैं, बल्कि सुगंधित, पारंपरिक और पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल भी होते हैं।

क्यों चुनें प्राकृतिक फूलों के रंग

बाज़ार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल, सिंथेटिक डाई और भारी धातुएँ पाई जाती हैं, जो एलर्जी, खुजली और त्वचा की सूखापन बढ़ा सकती हैं। इसके विपरीत, फूलों से बने रंगों में प्राकृतिक पिगमेंट होते हैं जो त्वचा को नुकसान नहीं पहुँचाते। इन रंगों में हल्की खुशबू और आयुर्वेदिक गुण भी होते हैं, जो त्वचा को शांत रखते हैं।

घर पर ऐसे बनाएं प्राकृतिक रंग

1. गुलाब से लाल और गुलाबी रंग
सूखे गुलाब की पंखुड़ियों को धूप में सुखाकर पीस लें। इसमें थोड़ा बेसन या कॉर्नफ्लोर मिलाने से रंग हल्का और मुलायम बनता है। यह रंग त्वचा पर कोमल लगता है और अच्छी खुशबू भी देता है।

2. गेंदा से पीला रंग
गेंदा के फूलों की पंखुड़ियों को सुखाकर पीसें। यह चमकीला पीला रंग देता है और त्वचा पर लगाने से जलन नहीं होती। गेंदा में एंटीसेप्टिक गुण भी पाए जाते हैं।

3. पलाश के फूल से केसरिया रंग
पलाश के सूखे फूलों को पानी में उबालकर प्राकृतिक केसरिया रंग तैयार किया जा सकता है। ठंडा होने पर यह पानी होली खेलने के लिए सुरक्षित होता है और त्वचा को मुलायम बनाए रखता है।

4. गुड़हल से गहरा लाल रंग
गुड़हल की पंखुड़ियों को सुखाकर पीसें या पानी में भिगोकर रंगीन घोल तैयार करें। यह रंग बालों और त्वचा दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।

प्राकृतिक रंगों के फायदे
  • त्वचा पर एलर्जी और रैशेज का खतरा कम

  • बालों को नुकसान नहीं

  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित

  • बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी उपयुक्त

  • सुगंधित और पारंपरिक अनुभव

होली खेलते समय रखें ये सावधानियां

प्राकृतिक रंग सुरक्षित होते हैं, फिर भी त्वचा पर पहले सरसों या नारियल तेल लगा लें ताकि रंग आसानी से निकल जाए। आंखों और मुंह में रंग जाने से बचें। होली खेलने के बाद हल्के साबुन और गुनगुने पानी से त्वचा साफ करें।

परंपरा और स्वास्थ्य का संगम

फूलों से होली खेलने की परंपरा नई नहीं है। प्राचीन समय में लोग प्रकृति से प्राप्त रंगों का ही उपयोग करते थे। आज फिर वही तरीका अपनाकर हम न केवल अपनी त्वचा की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकते हैं।इस होली, खुशियों के साथ-साथ स्वास्थ्य और प्रकृति का भी ख्याल रखें—और फूलों के रंगों से त्योहार को और भी खास बनाएं।

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