बिलासपुर सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के नाम पर पैसे मांगने का आरोप, नर्स का वीडियो भी हुआ वायरल, जानें पूरा मामला

Digital Desk

By Rohit.P
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बिलासपुर के जिला अस्पताल स्थित मातृ-शिशु अस्पताल से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। प्रसूति वार्ड के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं।

बिलासपुर के जिला अस्पताल स्थित मातृ-शिशु अस्पताल से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। प्रसूति वार्ड के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें डिलीवरी के बाद प्रसूता के परिजनों से कथित रूप से पैसों की मांग करते हुए अस्पताल स्टाफ दिखाई दे रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

डिलीवरी के बाद ‘दवा-पानी’ और ‘खुशी’ के नाम पर मांग

वायरल वीडियो में एक स्टाफ नर्स प्रसूता के परिजन को यह कहते हुए सुनाई देती है कि सब कुछ ठीक से हो गया है। परिजन द्वारा धन्यवाद कहने पर नर्स जवाब देती है कि केवल धन्यवाद से काम नहीं चलेगा। वह ‘दवा-पानी’ और ‘खुशी’ के नाम पर प्रेम से कुछ देने की बात कहती है। बातचीत के दौरान वह स्वयं के लिए एक हजार रुपये और अन्य स्टाफ के लिए 500-500 रुपये देने की बात करती सुनाई देती है। परिजन द्वारा अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर बताने और 500 रुपये देने की बात कहने पर नर्स कथित रूप से उसे अस्वीकार कर देती है और अधिक रकम की अपेक्षा जताती है।

वीडियो में यह भी सुनाई देता है कि परिजन इस तरह की मांग को गलत बताते हैं, जिस पर नर्स सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी का हवाला देती है और कहती है कि उन्हें बुनियादी सामग्री तक उपलब्ध नहीं होती। अंततः बातचीत 1000 रुपये पर आकर रुकती है, जिसमें आधी रकम नर्स और आधी अन्य स्टाफ के नाम पर देने की बात कही जाती है। वीडियो में अन्य कर्मचारियों की आवाजें भी सुनाई देती हैं, जो अतिरिक्त पैसे देने का दबाव बनाती होती हैं।

एडमिशन फॉर्म के नाम पर भी वसूली का आरोप

दूसरे वायरल वीडियो में एडमिशन फॉर्म भरवाने के नाम पर सौ रुपये मांगे जाने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसी आईडी से यह वीडियो भी पोस्ट किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक कार्रवाई में इस आरोप का भी उल्लेख किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हलचल मच गई।

कार्रवाई के बाद दो नर्सें निलंबित

मामले को गंभीरता से लेते हुए संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. अनिल गुप्ता ने स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि इस विषय पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

चेतावनी बोर्ड के बावजूद सवाल

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस प्रसूति कक्ष से यह मामला जुड़ा बताया जा रहा है, उसके बाहर स्पष्ट रूप से सूचना पट्ट लगा है, जिसमें लिखा है कि अगर कोई कर्मचारी पैसे की मांग करे तो आरएमओ या सिविल सर्जन से शिकायत करें। अनाधिकृत रूप से पैसे लेना या देना दंडनीय अपराध है और भुगतान की स्थिति में रसीद लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद कथित रूप से खुलेआम पैसों की मांग होना प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप

यह घटना कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा। इससे पहले भी जिला अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल में डिलीवरी के बाद ‘न्योछावर’ के नाम पर रकम मांगने, दुर्व्यवहार और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान न निकल पाना चिंता का विषय बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसी तरह की शिकायतें मिलती रही हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आम नागरिकों ने सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और क्या इस तरह की घटनाओं पर स्थायी रोक लग पाती है या नहीं।

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26 Feb 2026 By Rohit.P

बिलासपुर सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के नाम पर पैसे मांगने का आरोप, नर्स का वीडियो भी हुआ वायरल, जानें पूरा मामला

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बिलासपुर के जिला अस्पताल स्थित मातृ-शिशु अस्पताल से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। प्रसूति वार्ड के दो अलग-अलग वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें डिलीवरी के बाद प्रसूता के परिजनों से कथित रूप से पैसों की मांग करते हुए अस्पताल स्टाफ दिखाई दे रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

डिलीवरी के बाद ‘दवा-पानी’ और ‘खुशी’ के नाम पर मांग

वायरल वीडियो में एक स्टाफ नर्स प्रसूता के परिजन को यह कहते हुए सुनाई देती है कि सब कुछ ठीक से हो गया है। परिजन द्वारा धन्यवाद कहने पर नर्स जवाब देती है कि केवल धन्यवाद से काम नहीं चलेगा। वह ‘दवा-पानी’ और ‘खुशी’ के नाम पर प्रेम से कुछ देने की बात कहती है। बातचीत के दौरान वह स्वयं के लिए एक हजार रुपये और अन्य स्टाफ के लिए 500-500 रुपये देने की बात करती सुनाई देती है। परिजन द्वारा अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर बताने और 500 रुपये देने की बात कहने पर नर्स कथित रूप से उसे अस्वीकार कर देती है और अधिक रकम की अपेक्षा जताती है।

वीडियो में यह भी सुनाई देता है कि परिजन इस तरह की मांग को गलत बताते हैं, जिस पर नर्स सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी का हवाला देती है और कहती है कि उन्हें बुनियादी सामग्री तक उपलब्ध नहीं होती। अंततः बातचीत 1000 रुपये पर आकर रुकती है, जिसमें आधी रकम नर्स और आधी अन्य स्टाफ के नाम पर देने की बात कही जाती है। वीडियो में अन्य कर्मचारियों की आवाजें भी सुनाई देती हैं, जो अतिरिक्त पैसे देने का दबाव बनाती होती हैं।

एडमिशन फॉर्म के नाम पर भी वसूली का आरोप

दूसरे वायरल वीडियो में एडमिशन फॉर्म भरवाने के नाम पर सौ रुपये मांगे जाने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसी आईडी से यह वीडियो भी पोस्ट किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक कार्रवाई में इस आरोप का भी उल्लेख किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हलचल मच गई।

कार्रवाई के बाद दो नर्सें निलंबित

मामले को गंभीरता से लेते हुए संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. अनिल गुप्ता ने स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि इस विषय पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

चेतावनी बोर्ड के बावजूद सवाल

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस प्रसूति कक्ष से यह मामला जुड़ा बताया जा रहा है, उसके बाहर स्पष्ट रूप से सूचना पट्ट लगा है, जिसमें लिखा है कि अगर कोई कर्मचारी पैसे की मांग करे तो आरएमओ या सिविल सर्जन से शिकायत करें। अनाधिकृत रूप से पैसे लेना या देना दंडनीय अपराध है और भुगतान की स्थिति में रसीद लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद कथित रूप से खुलेआम पैसों की मांग होना प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप

यह घटना कोई पहला मामला नहीं बताया जा रहा। इससे पहले भी जिला अस्पताल और मातृ-शिशु अस्पताल में डिलीवरी के बाद ‘न्योछावर’ के नाम पर रकम मांगने, दुर्व्यवहार और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान न निकल पाना चिंता का विषय बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में भी इसी तरह की शिकायतें मिलती रही हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आम नागरिकों ने सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि विभागीय जांच के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और क्या इस तरह की घटनाओं पर स्थायी रोक लग पाती है या नहीं।

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