बारिश और तूफान में पेट्स की कैसे करें देखभाल? घर के अंदर एक्टिव रखने से लेकर डर कम करने तक जानें जरूरी तरीके

लाइफ स्टाइल

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तेज बारिश से रुक जाती है डॉग्स की वॉक और बिल्लियों की आउटडोर एक्टिविटी, इंडोर गेम्स, मानसिक एक्सरसाइज, शांत माहौल और क्विक-ड्राई रूटीन से आसान हो सकती है पेट केयर

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन पालतू जानवर रखने वाले परिवारों के लिए यह कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश, तेज हवा और गरजते बादलों के कारण डॉग्स की नियमित वॉक प्रभावित होती है। वहीं घर से बाहर जाने वाली बिल्लियों को भी लंबे समय तक अंदर रखना पड़ सकता है।

ऐसे मौसम में समस्या केवल शारीरिक गतिविधि कम होने की नहीं होती। कई पालतू जानवरों में बोरियत, बेचैनी और तनाव भी बढ़ सकता है। कुछ डॉग्स और कैट्स बिजली की चमक या बादलों की तेज आवाज से डर जाते हैं। ऐसे में उनकी दिनचर्या को मौसम के अनुसार बदलना जरूरी हो जाता है।

बारिश में क्यों बदल जाता है पेट्स का व्यवहार?

पालतू जानवर अपनी नियमित दिनचर्या के अभ्यस्त होते हैं। डॉग्स के लिए सुबह और शाम की वॉक केवल एक्सरसाइज नहीं, बल्कि आसपास की गंध पहचानने, नई चीजें देखने और मानसिक रूप से सक्रिय रहने का भी जरिया होती है।

जब कई दिनों तक बारिश के कारण यह रूटीन अचानक कम हो जाती है, तो कुछ डॉग्स में अतिरिक्त ऊर्जा जमा होने लगती है। इसका असर घर में ज्यादा भौंकने, चीजें चबाने, बार-बार ध्यान मांगने या बेचैन होकर घूमने के रूप में दिखाई दे सकता है।

बिल्लियों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिल सकती है। खासकर एक्टिव कैट्स को पर्याप्त खेल और मानसिक गतिविधि नहीं मिले तो वे फर्नीचर पर ज्यादा चढ़ सकती हैं, रात में सक्रिय हो सकती हैं या व्यवहार में बदलाव दिखा सकती हैं।

घर को बनाएं छोटा इंडोर प्ले जोन

बारिश के दौरान आउटडोर वॉक कम होने पर घर के भीतर ही पेट्स के लिए सुरक्षित एक्टिविटी तैयार की जा सकती है। इसके लिए बहुत ज्यादा जगह या महंगे खिलौनों की जरूरत नहीं होती।

कमरे या गलियारे में कुशन, कार्डबोर्ड बॉक्स और सुरक्षित घरेलू वस्तुओं की मदद से छोटा ऑब्स्टेकल कोर्स बनाया जा सकता है। डॉग को अलग-अलग बाधाओं के आसपास चलने या सुरक्षित तरीके से उन्हें पार करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

हालांकि फर्श फिसलन वाला नहीं होना चाहिए। ऐसी कोई वस्तु इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए जिससे जानवर को चोट लगने या फंसने का खतरा हो।

ट्रीट हंट से दिमाग भी रहेगा एक्टिव

मानसिक गतिविधि के लिए सबसे आसान खेलों में से एक है ट्रीट हंट। डॉग या कैट की पसंदीदा ट्रीट को घर में कुछ सुरक्षित स्थानों पर छिपाकर उन्हें खोजने दिया जा सकता है।

डॉग्स अपनी सूंघने की क्षमता का इस्तेमाल करके ट्रीट खोजते हैं। इससे उनका दिमाग सक्रिय रहता है और कुछ समय तक उनका ध्यान एक लक्ष्य पर केंद्रित होता है।

शुरुआत आसान जगहों से करनी चाहिए। बाद में धीरे-धीरे गेम को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बनाया जा सकता है। ट्रीट की मात्रा पेट के नियमित भोजन और कैलोरी को ध्यान में रखकर ही तय करनी चाहिए।

DIY पजल भी बन सकता है अच्छा विकल्प

घर में मौजूद कार्डबोर्ड बॉक्स जैसी सुरक्षित चीजों से साधारण फूड पजल तैयार किया जा सकता है। बॉक्स में ट्रीट या पसंदीदा खिलौना रखकर पेट को उसे खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

बिल्लियों के लिए कार्डबोर्ड बॉक्स अक्सर खुद में एक दिलचस्प एक्टिविटी बन जाते हैं। उनमें अलग-अलग प्रवेश रास्ते बनाकर छोटा प्ले एरिया तैयार किया जा सकता है।

DIY गेम हमेशा निगरानी में कराए जाने चाहिए। प्लास्टिक, धागे, रबर बैंड या आसानी से निगली जा सकने वाली छोटी वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

ट्रेनिंग को भी बनाएं खेल

बारिश के दिनों में डॉग्स के लिए छोटे ट्रेनिंग सेशन मानसिक एक्सरसाइज का अच्छा जरिया बन सकते हैं। बैठना, रुकना, हाथ मिलाना या किसी निर्धारित स्थान पर जाना जैसे पहले से सीखे संकेतों का अभ्यास कराया जा सकता है।

हर सेशन को छोटा और सकारात्मक रखना बेहतर होता है। सही प्रतिक्रिया पर प्रशंसा या छोटी ट्रीट देकर पेट को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

इससे बाहर की गतिविधि कम होने के बावजूद पेट को मानसिक चुनौती मिलती है और मालिक के साथ उसका जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है।

बिल्लियों के लिए बदलते रहें खेल

कैट्स के लिए एक ही खिलौना लगातार सामने रखने से उसका आकर्षण कम हो सकता है। इसलिए खिलौनों को रोटेशन में देना उपयोगी हो सकता है।

इंटरैक्टिव वैंड, हल्की गेंद और सुरक्षित पजल फीडर जैसी चीजों से उनकी शिकार करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को सकारात्मक दिशा मिल सकती है।

घर में खिड़की के पास सुरक्षित बैठने की जगह भी बनाई जा सकती है, जहां से बिल्ली बाहर की गतिविधियां देख सके। ध्यान रहे कि खिड़की या बालकनी पूरी तरह सुरक्षित हो।

गरज और बिजली से क्यों डरते हैं कुछ पेट्स?

तूफान के दौरान कई डॉग्स में डर के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। वे कांप सकते हैं, छिपने की कोशिश कर सकते हैं, लगातार हांफ सकते हैं या मालिक के बहुत करीब रहने लगते हैं।

इस डर की वजह केवल बादलों की आवाज नहीं होती। तेज चमक, हवा, वातावरण में बदलाव और अचानक आने वाली आवाजें भी उन्हें असहज कर सकती हैं।

ऐसी स्थिति में उन्हें जबरदस्ती बाहर निकालना या डांटना उचित नहीं है। घर में ऐसा सुरक्षित कोना तैयार करना बेहतर है जहां शोर अपेक्षाकृत कम पहुंचे और पेट अपनी इच्छा से जाकर बैठ सके।

प्रेशर रैप और शांत संगीत हो सकते हैं मददगार

कुछ डॉग्स को शरीर पर हल्का और समान दबाव देने वाले प्रेशर रैप से आराम महसूस हो सकता है। लेकिन हर पेट की प्रतिक्रिया अलग होती है, इसलिए इसे सही फिटिंग और निगरानी के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए।

हल्का संगीत या व्हाइट नॉइज बाहर की अचानक आने वाली आवाजों को कुछ हद तक कम महसूस करा सकता है। खिड़कियां बंद रखना और पर्दे लगाने से बिजली की तेज चमक का असर भी घटाया जा सकता है।

यदि तूफान के दौरान पेट का डर बहुत गंभीर हो, वह खुद को नुकसान पहुंचाने लगे या लंबे समय तक सामान्य न हो पाए, तो पशु चिकित्सक या योग्य पशु व्यवहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

वॉक जरूरी हो तो समय और दूरी बदलें

बारिश के दिनों में हर बार वॉक पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता, खासकर डॉग्स के मामले में। ऐसे में लंबी वॉक की जगह मौसम देखकर छोटी और जरूरत आधारित आउटिंग की जा सकती है।

तेज बिजली चमकने, आंधी या गंभीर मौसम चेतावनी के दौरान पेट को बाहर ले जाने से बचना चाहिए। सामान्य बारिश में भी पट्टा मजबूत होना चाहिए, क्योंकि अचानक गरजने पर डॉग घबराकर भागने की कोशिश कर सकता है।

पानी भरी सड़कों, खुले नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी रखना जरूरी है। बारिश के बाद जमीन पर पड़े अज्ञात पदार्थों या गंदे पानी को पेट को चाटने या पीने से भी रोकना चाहिए।

घर लौटते ही अपनाएं क्विक-ड्राई रूटीन

बारिश में बाहर जाने के बाद पेट को लंबे समय तक गीला छोड़ना ठीक नहीं है। घर के प्रवेश द्वार के पास एक अलग तौलिया रखने से सफाई आसान हो सकती है।

सबसे पहले पंजों और पैरों को साफ पानी या हल्के गीले कपड़े से साफ किया जा सकता है। इसके बाद पेट, छाती और शरीर के बाकी गीले हिस्सों को अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

लंबे बालों वाले डॉग्स में त्वचा तक नमी बनी रह सकती है। इसलिए केवल ऊपर से तौलिया फेरना पर्याप्त नहीं होता। पंजों की उंगलियों के बीच भी नमी और गंदगी की जांच करनी चाहिए।

पंजों और कानों की सफाई पर रखें नजर

गीली मिट्टी और लगातार नमी के कारण पंजों में जलन या त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। यदि पंजों से दुर्गंध आए, लगातार लालिमा दिखे या पेट बार-बार पंजे चाटे तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बारिश के बाद कानों में भी अतिरिक्त नमी रह सकती है, खासकर झुके हुए कानों वाली नस्लों में। कान के बाहरी हिस्से को हल्के हाथ से सुखाया जा सकता है, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह किसी वस्तु को कान के अंदर डालकर सफाई नहीं करनी चाहिए।

रूटीन बनाए रखना सबसे अहम

खराब मौसम के कारण बाहर की गतिविधियां बदल सकती हैं, लेकिन पेट के खाने, सोने और खेलने का समय जितना संभव हो नियमित रखना उपयोगी होता है।

सुबह की लंबी वॉक संभव न हो तो उसकी जगह छोटी आउटिंग के साथ कुछ मिनट का इंडोर गेम रखा जा सकता है। शाम को पजल फीडिंग या ट्रेनिंग एक्टिविटी जोड़ी जा सकती है।

इस तरह पेट को अनुमान रहता है कि दिन में कब भोजन, खेल और आराम मिलेगा। नियमित दिनचर्या कई जानवरों में अनिश्चितता और बेचैनी कम करने में मदद कर सकती है।

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20 Jul 2026 By Priyanka

बारिश और तूफान में पेट्स की कैसे करें देखभाल? घर के अंदर एक्टिव रखने से लेकर डर कम करने तक जानें जरूरी तरीके

लाइफ स्टाइल

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन पालतू जानवर रखने वाले परिवारों के लिए यह कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश, तेज हवा और गरजते बादलों के कारण डॉग्स की नियमित वॉक प्रभावित होती है। वहीं घर से बाहर जाने वाली बिल्लियों को भी लंबे समय तक अंदर रखना पड़ सकता है।

ऐसे मौसम में समस्या केवल शारीरिक गतिविधि कम होने की नहीं होती। कई पालतू जानवरों में बोरियत, बेचैनी और तनाव भी बढ़ सकता है। कुछ डॉग्स और कैट्स बिजली की चमक या बादलों की तेज आवाज से डर जाते हैं। ऐसे में उनकी दिनचर्या को मौसम के अनुसार बदलना जरूरी हो जाता है।

बारिश में क्यों बदल जाता है पेट्स का व्यवहार?

पालतू जानवर अपनी नियमित दिनचर्या के अभ्यस्त होते हैं। डॉग्स के लिए सुबह और शाम की वॉक केवल एक्सरसाइज नहीं, बल्कि आसपास की गंध पहचानने, नई चीजें देखने और मानसिक रूप से सक्रिय रहने का भी जरिया होती है।

जब कई दिनों तक बारिश के कारण यह रूटीन अचानक कम हो जाती है, तो कुछ डॉग्स में अतिरिक्त ऊर्जा जमा होने लगती है। इसका असर घर में ज्यादा भौंकने, चीजें चबाने, बार-बार ध्यान मांगने या बेचैन होकर घूमने के रूप में दिखाई दे सकता है।

बिल्लियों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिल सकती है। खासकर एक्टिव कैट्स को पर्याप्त खेल और मानसिक गतिविधि नहीं मिले तो वे फर्नीचर पर ज्यादा चढ़ सकती हैं, रात में सक्रिय हो सकती हैं या व्यवहार में बदलाव दिखा सकती हैं।

घर को बनाएं छोटा इंडोर प्ले जोन

बारिश के दौरान आउटडोर वॉक कम होने पर घर के भीतर ही पेट्स के लिए सुरक्षित एक्टिविटी तैयार की जा सकती है। इसके लिए बहुत ज्यादा जगह या महंगे खिलौनों की जरूरत नहीं होती।

कमरे या गलियारे में कुशन, कार्डबोर्ड बॉक्स और सुरक्षित घरेलू वस्तुओं की मदद से छोटा ऑब्स्टेकल कोर्स बनाया जा सकता है। डॉग को अलग-अलग बाधाओं के आसपास चलने या सुरक्षित तरीके से उन्हें पार करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

हालांकि फर्श फिसलन वाला नहीं होना चाहिए। ऐसी कोई वस्तु इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए जिससे जानवर को चोट लगने या फंसने का खतरा हो।

ट्रीट हंट से दिमाग भी रहेगा एक्टिव

मानसिक गतिविधि के लिए सबसे आसान खेलों में से एक है ट्रीट हंट। डॉग या कैट की पसंदीदा ट्रीट को घर में कुछ सुरक्षित स्थानों पर छिपाकर उन्हें खोजने दिया जा सकता है।

डॉग्स अपनी सूंघने की क्षमता का इस्तेमाल करके ट्रीट खोजते हैं। इससे उनका दिमाग सक्रिय रहता है और कुछ समय तक उनका ध्यान एक लक्ष्य पर केंद्रित होता है।

शुरुआत आसान जगहों से करनी चाहिए। बाद में धीरे-धीरे गेम को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बनाया जा सकता है। ट्रीट की मात्रा पेट के नियमित भोजन और कैलोरी को ध्यान में रखकर ही तय करनी चाहिए।

DIY पजल भी बन सकता है अच्छा विकल्प

घर में मौजूद कार्डबोर्ड बॉक्स जैसी सुरक्षित चीजों से साधारण फूड पजल तैयार किया जा सकता है। बॉक्स में ट्रीट या पसंदीदा खिलौना रखकर पेट को उसे खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

बिल्लियों के लिए कार्डबोर्ड बॉक्स अक्सर खुद में एक दिलचस्प एक्टिविटी बन जाते हैं। उनमें अलग-अलग प्रवेश रास्ते बनाकर छोटा प्ले एरिया तैयार किया जा सकता है।

DIY गेम हमेशा निगरानी में कराए जाने चाहिए। प्लास्टिक, धागे, रबर बैंड या आसानी से निगली जा सकने वाली छोटी वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

ट्रेनिंग को भी बनाएं खेल

बारिश के दिनों में डॉग्स के लिए छोटे ट्रेनिंग सेशन मानसिक एक्सरसाइज का अच्छा जरिया बन सकते हैं। बैठना, रुकना, हाथ मिलाना या किसी निर्धारित स्थान पर जाना जैसे पहले से सीखे संकेतों का अभ्यास कराया जा सकता है।

हर सेशन को छोटा और सकारात्मक रखना बेहतर होता है। सही प्रतिक्रिया पर प्रशंसा या छोटी ट्रीट देकर पेट को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

इससे बाहर की गतिविधि कम होने के बावजूद पेट को मानसिक चुनौती मिलती है और मालिक के साथ उसका जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है।

बिल्लियों के लिए बदलते रहें खेल

कैट्स के लिए एक ही खिलौना लगातार सामने रखने से उसका आकर्षण कम हो सकता है। इसलिए खिलौनों को रोटेशन में देना उपयोगी हो सकता है।

इंटरैक्टिव वैंड, हल्की गेंद और सुरक्षित पजल फीडर जैसी चीजों से उनकी शिकार करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को सकारात्मक दिशा मिल सकती है।

घर में खिड़की के पास सुरक्षित बैठने की जगह भी बनाई जा सकती है, जहां से बिल्ली बाहर की गतिविधियां देख सके। ध्यान रहे कि खिड़की या बालकनी पूरी तरह सुरक्षित हो।

गरज और बिजली से क्यों डरते हैं कुछ पेट्स?

तूफान के दौरान कई डॉग्स में डर के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं। वे कांप सकते हैं, छिपने की कोशिश कर सकते हैं, लगातार हांफ सकते हैं या मालिक के बहुत करीब रहने लगते हैं।

इस डर की वजह केवल बादलों की आवाज नहीं होती। तेज चमक, हवा, वातावरण में बदलाव और अचानक आने वाली आवाजें भी उन्हें असहज कर सकती हैं।

ऐसी स्थिति में उन्हें जबरदस्ती बाहर निकालना या डांटना उचित नहीं है। घर में ऐसा सुरक्षित कोना तैयार करना बेहतर है जहां शोर अपेक्षाकृत कम पहुंचे और पेट अपनी इच्छा से जाकर बैठ सके।

प्रेशर रैप और शांत संगीत हो सकते हैं मददगार

कुछ डॉग्स को शरीर पर हल्का और समान दबाव देने वाले प्रेशर रैप से आराम महसूस हो सकता है। लेकिन हर पेट की प्रतिक्रिया अलग होती है, इसलिए इसे सही फिटिंग और निगरानी के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए।

हल्का संगीत या व्हाइट नॉइज बाहर की अचानक आने वाली आवाजों को कुछ हद तक कम महसूस करा सकता है। खिड़कियां बंद रखना और पर्दे लगाने से बिजली की तेज चमक का असर भी घटाया जा सकता है।

यदि तूफान के दौरान पेट का डर बहुत गंभीर हो, वह खुद को नुकसान पहुंचाने लगे या लंबे समय तक सामान्य न हो पाए, तो पशु चिकित्सक या योग्य पशु व्यवहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

वॉक जरूरी हो तो समय और दूरी बदलें

बारिश के दिनों में हर बार वॉक पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता, खासकर डॉग्स के मामले में। ऐसे में लंबी वॉक की जगह मौसम देखकर छोटी और जरूरत आधारित आउटिंग की जा सकती है।

तेज बिजली चमकने, आंधी या गंभीर मौसम चेतावनी के दौरान पेट को बाहर ले जाने से बचना चाहिए। सामान्य बारिश में भी पट्टा मजबूत होना चाहिए, क्योंकि अचानक गरजने पर डॉग घबराकर भागने की कोशिश कर सकता है।

पानी भरी सड़कों, खुले नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी रखना जरूरी है। बारिश के बाद जमीन पर पड़े अज्ञात पदार्थों या गंदे पानी को पेट को चाटने या पीने से भी रोकना चाहिए।

घर लौटते ही अपनाएं क्विक-ड्राई रूटीन

बारिश में बाहर जाने के बाद पेट को लंबे समय तक गीला छोड़ना ठीक नहीं है। घर के प्रवेश द्वार के पास एक अलग तौलिया रखने से सफाई आसान हो सकती है।

सबसे पहले पंजों और पैरों को साफ पानी या हल्के गीले कपड़े से साफ किया जा सकता है। इसके बाद पेट, छाती और शरीर के बाकी गीले हिस्सों को अच्छी तरह सुखाना चाहिए।

लंबे बालों वाले डॉग्स में त्वचा तक नमी बनी रह सकती है। इसलिए केवल ऊपर से तौलिया फेरना पर्याप्त नहीं होता। पंजों की उंगलियों के बीच भी नमी और गंदगी की जांच करनी चाहिए।

पंजों और कानों की सफाई पर रखें नजर

गीली मिट्टी और लगातार नमी के कारण पंजों में जलन या त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है। यदि पंजों से दुर्गंध आए, लगातार लालिमा दिखे या पेट बार-बार पंजे चाटे तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बारिश के बाद कानों में भी अतिरिक्त नमी रह सकती है, खासकर झुके हुए कानों वाली नस्लों में। कान के बाहरी हिस्से को हल्के हाथ से सुखाया जा सकता है, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह किसी वस्तु को कान के अंदर डालकर सफाई नहीं करनी चाहिए।

रूटीन बनाए रखना सबसे अहम

खराब मौसम के कारण बाहर की गतिविधियां बदल सकती हैं, लेकिन पेट के खाने, सोने और खेलने का समय जितना संभव हो नियमित रखना उपयोगी होता है।

सुबह की लंबी वॉक संभव न हो तो उसकी जगह छोटी आउटिंग के साथ कुछ मिनट का इंडोर गेम रखा जा सकता है। शाम को पजल फीडिंग या ट्रेनिंग एक्टिविटी जोड़ी जा सकती है।

इस तरह पेट को अनुमान रहता है कि दिन में कब भोजन, खेल और आराम मिलेगा। नियमित दिनचर्या कई जानवरों में अनिश्चितता और बेचैनी कम करने में मदद कर सकती है।

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