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CJP प्रतिनिधियों ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, मांगों का पत्र सौंपा; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी
भारत
NEET-UG पेपर लीक समेत परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए, नड्डा से करीब 10 मिनट हुई बातचीत; CJP का दावा- सरकार के स्तर पर चर्चा का मिला भरोसा
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का पत्र सौंपा। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने नड्डा से उनके आवास पर करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान NEET-UG पेपर लीक समेत शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। CJP लंबे समय से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सभी प्रमुख मांगें लिखित रूप में जेपी नड्डा के सामने रखीं। संगठन का दावा है कि नड्डा ने उनकी बात सुनी और इन मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा करने का भरोसा दिया। हालांकि बैठक के दौरान किसी मांग को स्वीकार करने या तत्काल कार्रवाई करने को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दी गई।
संगठन ने अपने मांग पत्र में शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को प्रमुखता से उठाया है। CJP का आरोप है कि प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बावजूद पर्याप्त व्यवस्थागत सुधार नहीं किए गए। संगठन इसी आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
CJP ने अपने पत्र में केवल NEET का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि CBSE कक्षा 12 से जुड़े पोर्टल की कथित अव्यवस्था और CUET परीक्षा में देरी जैसे मामलों का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली समस्याओं का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों पर पड़ता है। ऐसे में केवल तत्काल समाधान के बजाय परीक्षा प्रणाली में स्थायी और पारदर्शी सुधार किए जाने चाहिए।
जेपी नड्डा से यह मुलाकात उस समय हुई, जब मध्य दिल्ली में CJP का बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।
CJP ने संसद तक विरोध मार्च निकालने का भी आह्वान किया था। संसद का मानसून सत्र शुरू होने के कारण नई दिल्ली क्षेत्र में पहले से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों के संसद की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें निर्धारित क्षेत्र से आगे जाने से रोका। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई।
नई दिल्ली क्षेत्र में बड़े जमावड़े और बिना अनुमति जुलूस को लेकर प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरे दिन सतर्क रहीं। संसद भवन, जंतर-मंतर और आसपास के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी।
CJP नेताओं का कहना है कि संगठन सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इससे उसकी प्रमुख मांगें समाप्त नहीं होतीं। संगठन के मुताबिक, सरकार यदि परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना चाहती है तो प्रतिनिधि चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जवाबदेही तय करने की मांग पर संगठन फिलहाल कायम है।
जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद CJP ने कहा कि सरकार तक उसकी मांगें औपचारिक रूप से पहुंचा दी गई हैं। संगठन के अनुसार, नड्डा ने इन मुद्दों पर आंतरिक स्तर पर बातचीत करने की बात कही है। अब प्रदर्शनकारी सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। बैठक के बाद किसी औपचारिक समझौते या आंदोलन समाप्त करने जैसी घोषणा नहीं हुई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाए जाने को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल को बलपूर्वक खाली कराने की कार्रवाई नहीं की गई और विरोध जारी रहा। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्रों की ओर बढ़ने से रोकने पर जोर दिया गया।
CJP का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा संचालन से जुड़ी गड़बड़ियां केवल प्रशासनिक समस्या नहीं हैं, बल्कि इनका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थी वर्षों का समय और बड़ी आर्थिक राशि खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से छात्रों और उनके परिवारों में असुरक्षा बढ़ती है।
संगठन ने मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए। इसके साथ ही पेपर लीक या दूसरी गंभीर अनियमितताओं के मामलों में जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। CJP का दावा है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है और परीक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव होने चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
संसद के मानसून सत्र के बीच हुए इस प्रदर्शन के कारण मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। CJP ने आंदोलन के जरिए अपनी मांग सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है। जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक को इसी क्रम में सरकार और प्रदर्शनकारी समूह के बीच संवाद की एक कड़ी माना जा रहा है।
संगठन ने साफ किया है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखना चाहता है। CJP नेताओं का कहना है कि मांगों पर ठोस कदम उठने तक प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां संसद सत्र को देखते हुए मध्य दिल्ली में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का पत्र सौंपा। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने नड्डा से उनके आवास पर करीब 10 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान NEET-UG पेपर लीक समेत शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। CJP लंबे समय से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सभी प्रमुख मांगें लिखित रूप में जेपी नड्डा के सामने रखीं। संगठन का दावा है कि नड्डा ने उनकी बात सुनी और इन मुद्दों पर उचित स्तर पर चर्चा करने का भरोसा दिया। हालांकि बैठक के दौरान किसी मांग को स्वीकार करने या तत्काल कार्रवाई करने को लेकर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दी गई।
संगठन ने अपने मांग पत्र में शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को प्रमुखता से उठाया है। CJP का आरोप है कि प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बावजूद पर्याप्त व्यवस्थागत सुधार नहीं किए गए। संगठन इसी आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
CJP ने अपने पत्र में केवल NEET का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि CBSE कक्षा 12 से जुड़े पोर्टल की कथित अव्यवस्था और CUET परीक्षा में देरी जैसे मामलों का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली समस्याओं का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों पर पड़ता है। ऐसे में केवल तत्काल समाधान के बजाय परीक्षा प्रणाली में स्थायी और पारदर्शी सुधार किए जाने चाहिए।
जेपी नड्डा से यह मुलाकात उस समय हुई, जब मध्य दिल्ली में CJP का बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।
CJP ने संसद तक विरोध मार्च निकालने का भी आह्वान किया था। संसद का मानसून सत्र शुरू होने के कारण नई दिल्ली क्षेत्र में पहले से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों के संसद की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें निर्धारित क्षेत्र से आगे जाने से रोका। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की गई।
नई दिल्ली क्षेत्र में बड़े जमावड़े और बिना अनुमति जुलूस को लेकर प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरे दिन सतर्क रहीं। संसद भवन, जंतर-मंतर और आसपास के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी।
CJP नेताओं का कहना है कि संगठन सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इससे उसकी प्रमुख मांगें समाप्त नहीं होतीं। संगठन के मुताबिक, सरकार यदि परीक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना चाहती है तो प्रतिनिधि चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जवाबदेही तय करने की मांग पर संगठन फिलहाल कायम है।
जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद CJP ने कहा कि सरकार तक उसकी मांगें औपचारिक रूप से पहुंचा दी गई हैं। संगठन के अनुसार, नड्डा ने इन मुद्दों पर आंतरिक स्तर पर बातचीत करने की बात कही है। अब प्रदर्शनकारी सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। बैठक के बाद किसी औपचारिक समझौते या आंदोलन समाप्त करने जैसी घोषणा नहीं हुई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाए जाने को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल को बलपूर्वक खाली कराने की कार्रवाई नहीं की गई और विरोध जारी रहा। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्रों की ओर बढ़ने से रोकने पर जोर दिया गया।
CJP का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा संचालन से जुड़ी गड़बड़ियां केवल प्रशासनिक समस्या नहीं हैं, बल्कि इनका असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में विद्यार्थी वर्षों का समय और बड़ी आर्थिक राशि खर्च करते हैं। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने से छात्रों और उनके परिवारों में असुरक्षा बढ़ती है।
संगठन ने मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए। इसके साथ ही पेपर लीक या दूसरी गंभीर अनियमितताओं के मामलों में जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। CJP का दावा है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है और परीक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव होने चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
संसद के मानसून सत्र के बीच हुए इस प्रदर्शन के कारण मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। CJP ने आंदोलन के जरिए अपनी मांग सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है। जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक को इसी क्रम में सरकार और प्रदर्शनकारी समूह के बीच संवाद की एक कड़ी माना जा रहा है।
संगठन ने साफ किया है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखना चाहता है। CJP नेताओं का कहना है कि मांगों पर ठोस कदम उठने तक प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां संसद सत्र को देखते हुए मध्य दिल्ली में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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