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मार्च के पहले हफ्ते में LPG खपत 17% घटी: पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी, गैस महंगी होने से रेस्टोरेंट्स ने बढ़ाए दाम
बिजनेस न्यूज
वेस्ट एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई दबाव का असर; देशभर में 57% रेस्टोरेंट्स और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने बढ़ाए खाने के दाम
देश में मार्च के पहले सप्ताह के दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खपत में करीब 17% की गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी तेल कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में LPG की मांग घटकर 1.147 मिलियन टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 1.387 मिलियन टन थी। विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़े तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर खपत के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
हालांकि LPG की मांग घटने के बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है। पेट्रोल की खपत लगभग 13.2% बढ़कर 1.5 मिलियन टन और डीजल की खपत 8.2% बढ़कर 3.384 मिलियन टन तक पहुंच गई। ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से इन ईंधनों की मांग में वृद्धि हुई है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई दबाव का असर खाने-पीने के कारोबार पर भी पड़ा है। एक उपभोक्ता सर्वे के मुताबिक देशभर में 57% रेस्टोरेंट्स और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने पिछले एक सप्ताह में अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। लागत बढ़ने के कारण कई जगह खाने की कीमतों में 10 से 25% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि घरेलू LPG की आपूर्ति सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में 12 हजार से अधिक छापे मारे गए हैं और करीब 15 हजार गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
LPG सप्लाई पर दबाव कम करने के लिए सरकार शहरी क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार डिजिटल सिस्टम मजबूत होने से LPG की ऑनलाइन बुकिंग करीब 94% तक पहुंच गई है, जबकि देश की रिफाइनरियों में LPG उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 38% की वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा स्थिति का बड़ा कारण वेस्ट एशिया में बढ़ा सैन्य तनाव है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है और उसमें से 80-85% आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
इसी बीच भारत के एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ हाल ही में गुजरात के वडिनार और मुंद्रा बंदरगाहों पर गैस लेकर पहुंचे हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लाखों घरेलू सिलेंडरों के बराबर है।
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि LPG की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। मंत्रालय के अनुसार देश में घरेलू गैस की आपूर्ति पर्याप्त है और आवश्यक कदम उठाकर सप्लाई चेन को सामान्य बनाए रखा जा रहा है।
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देश में मार्च के पहले सप्ताह के दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खपत में करीब 17% की गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी तेल कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में LPG की मांग घटकर 1.147 मिलियन टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 1.387 मिलियन टन थी। विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट एशिया में बढ़े तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर खपत के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
हालांकि LPG की मांग घटने के बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है। पेट्रोल की खपत लगभग 13.2% बढ़कर 1.5 मिलियन टन और डीजल की खपत 8.2% बढ़कर 3.384 मिलियन टन तक पहुंच गई। ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी से इन ईंधनों की मांग में वृद्धि हुई है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई दबाव का असर खाने-पीने के कारोबार पर भी पड़ा है। एक उपभोक्ता सर्वे के मुताबिक देशभर में 57% रेस्टोरेंट्स और 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने पिछले एक सप्ताह में अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं। लागत बढ़ने के कारण कई जगह खाने की कीमतों में 10 से 25% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि घरेलू LPG की आपूर्ति सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में 12 हजार से अधिक छापे मारे गए हैं और करीब 15 हजार गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
LPG सप्लाई पर दबाव कम करने के लिए सरकार शहरी क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार डिजिटल सिस्टम मजबूत होने से LPG की ऑनलाइन बुकिंग करीब 94% तक पहुंच गई है, जबकि देश की रिफाइनरियों में LPG उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 38% की वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा स्थिति का बड़ा कारण वेस्ट एशिया में बढ़ा सैन्य तनाव है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है और उसमें से 80-85% आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
इसी बीच भारत के एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ हाल ही में गुजरात के वडिनार और मुंद्रा बंदरगाहों पर गैस लेकर पहुंचे हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लाखों घरेलू सिलेंडरों के बराबर है।
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि LPG की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। मंत्रालय के अनुसार देश में घरेलू गैस की आपूर्ति पर्याप्त है और आवश्यक कदम उठाकर सप्लाई चेन को सामान्य बनाए रखा जा रहा है।
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