तालिबान का अमेरिका को बड़ा ऑफर, $1 ट्रिलियन की अफगान खनिज संपदा पर नजर

Digital Desk

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तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने अमेरिकी निवेश का स्वागत किया है। काबुल खनन और अन्य क्षेत्रों में निवेश के बदले प्रतिबंधों में राहत चाहता है।

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने अमेरिका के साथ संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश तेज कर दी है। तालिबान ने अमेरिकी कंपनियों को देश के खनन, बुनियादी ढांचे, कृषि और व्यापार क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। इसके बदले काबुल अमेरिका से प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अफगान संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है।

तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि अफगानिस्तान अमेरिकी निवेश के लिए “पूरी तरह” तैयार है। तालिबान का यह प्रयास अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के सत्ता में लौटने के पांच साल बाद सामने आया है।

अफगानिस्तान में कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित खनिज संपदा होने का दावा किया जाता है। इसमें तांबा, लौह अयस्क, लिथियम, कोबाल्ट, सोना और नियोबियम जैसे संसाधन शामिल हैं। हालांकि, यह आंकड़ा खनिज भंडार के अनुमानित मूल्य को दर्शाता है, न कि अमेरिका को दिए जा रहे 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश प्रस्ताव को।

अमेरिकी निवेश चाहता है तालिबान

मुत्तकी ने कहा कि काबुल भविष्य में वॉशिंगटन के साथ अपने संबंधों को युद्ध के इतिहास के बजाय आर्थिक सहयोग पर आधारित करना चाहता है।

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उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की आर्थिक नीति निवेश के लिए खुली है और अमेरिकी कंपनियां खनन, बुनियादी ढांचे, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में निवेश कर सकती हैं।

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तालिबान को उम्मीद है कि अमेरिकी और अन्य विदेशी निवेश से अफगानिस्तान की आर्थिक और वित्तीय अलगाव की स्थिति कम होगी तथा लंबे समय से अधूरी पड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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$1 ट्रिलियन की खनिज संपदा

अफगानिस्तान की विशाल खनिज संपदा तालिबान के निवेश प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

अमेरिका और पूर्व अफगान सरकार के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों में देश में कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के खनिज संसाधनों का अनुमान लगाया गया है। इनमें तांबा, लौह अयस्क, कोबाल्ट, लिथियम, सोना और नियोबियम प्रमुख हैं।

हालांकि, दशकों तक चले युद्ध, कमजोर बुनियादी ढांचे और निवेश की कमी के कारण इन संसाधनों का बड़ा हिस्सा अभी तक व्यावसायिक स्तर पर विकसित नहीं हो सका है।

तालिबान अब खनन क्षेत्र को विदेशी निवेश और आर्थिक विकास के प्रमुख स्रोत के रूप में पेश कर रहा है।

प्रतिबंधों में राहत की मांग

अमेरिकी निवेश के प्रस्ताव के साथ तालिबान ने आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग भी उठाई है।

काबुल चाहता है कि तालिबान अधिकारियों पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील दी जाए और विदेशों में रखी अफगान केंद्रीय बैंक की संपत्तियों तक पहुंच बहाल की जाए।

मुत्तकी का तर्क है कि प्रतिबंध अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अफगान संपत्तियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

तालिबान की कोशिश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक अपनी पहुंच बढ़ाने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने की है।

अरबों डॉलर की संपत्ति फंसी

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि उसकी करीब 9.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्ति देश के बाहर है। इसमें लगभग 7 अरब डॉलर अमेरिका में होने का अनुमान है।

2022 में अमेरिका ने अफगान केंद्रीय बैंक के करीब 3.5 अरब डॉलर के फंड को स्विट्जरलैंड स्थित अफगान फंड में स्थानांतरित किया था।

इस फंड का उद्देश्य अफगानिस्तान की वित्तीय स्थिरता में मदद करना है, जबकि धन को सीधे तालिबान के नियंत्रण में रखने से बचा गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज सहित अफगान फंड की राशि अब 4 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है।

बगराम एयरबेस पर समझौता नहीं

तालिबान का अमेरिकी निवेश का प्रस्ताव बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस सौंपने तक नहीं जाता।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बगराम एयरबेस को वापस लेने की इच्छा कई बार जताई है। यह एयरबेस काबुल के उत्तर में स्थित है और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान प्रमुख केंद्र रहा था।

हालांकि, तालिबान बगराम को अफगान राष्ट्रीय संपत्ति मानता है।

मुत्तकी ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान की सैन्य और नागरिक सुविधाएं, जिसमें बगराम भी शामिल है, राष्ट्रीय संपत्तियां हैं और अमेरिकी आर्थिक निवेश के प्रस्ताव का हिस्सा नहीं हैं।

इससे तालिबान का रुख स्पष्ट होता है—काबुल अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक निवेश का स्वागत करना चाहता है, लेकिन अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य वापसी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

चीन और ईरान पहले से सक्रिय

अफगानिस्तान के खनन क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करने की तालिबान की कोशिश नई नहीं है।

2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान सरकार ने चीन और ईरान सहित विभिन्न देशों के साथ खनन क्षेत्र में 7 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की है।

इन परियोजनाओं में सोना, कीमती पत्थर और क्रोमाइट जैसे संसाधनों का दोहन शामिल है।

अमेरिका की ओर तालिबान का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि काबुल अपने विदेशी निवेश साझेदारों का दायरा बढ़ाना चाहता है।

अमेरिकी कंपनियों के सामने जोखिम

अफगानिस्तान की खनिज संपदा आकर्षक जरूर है, लेकिन अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश से जुड़े गंभीर राजनीतिक और व्यावसायिक जोखिम भी हैं।

अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। तालिबान द्वारा महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं भी अब तक बनी हुई हैं।

अमेरिकी कंपनियों को तालिबान अधिकारियों पर लागू प्रतिबंधों और अफगानिस्तान में निवेश से जुड़े कानूनी जोखिमों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इसके बावजूद तालिबान ने चीन, भारत, ईरान, कतर और मध्य एशिया के कई देशों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की कोशिश की है। रूस ने भी तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता दी है और काबुल के साथ सहयोग बढ़ाया है।

अमेरिका-तालिबान संबंधों का नया दौर

तालिबान का ताजा प्रस्ताव अमेरिका के साथ अपने संबंधों को युद्ध और सैन्य टकराव के अतीत से निकालकर आर्थिक सहयोग की दिशा में ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

काबुल अमेरिकी कंपनियों को अफगानिस्तान की विशाल प्राकृतिक संपदा में निवेश का अवसर देने की बात कर रहा है। इसके साथ वह प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अफगान धन तक अधिक पहुंच की मांग कर रहा है।

हालांकि, इस रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां हैं। तालिबान का अंतरराष्ट्रीय अलगाव, प्रतिबंध, मानवाधिकारों से जुड़े सवाल और बगराम एयरबेस को लेकर अमेरिका की मांग प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

फिलहाल तालिबान का संदेश स्पष्ट है—अफगानिस्तान अमेरिकी निवेश चाहता है, लेकिन अमेरिकी सैन्य वापसी नहीं। देश की अनुमानित 1 ट्रिलियन डॉलर की खनिज संपदा इस आर्थिक रणनीति का आधार है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वॉशिंगटन और अमेरिकी कंपनियां तालिबान के इस प्रस्ताव पर किस तरह प्रतिक्रिया देती हैं।

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